पुस्तक समीक्षा

 पुस्तक समीक्षा- विज्ञान की सरल और सहज कहानियों की पुस्तक


पुस्तक -रोचक विज्ञान बाल कहानियां
लेखक- ओम प्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’
पृष्ठ-६०  मूल्य-१००  पेपर बैक
प्रकाशक – रवीना प्रकाशन गंगा नगर दिल्ली ९४

मस्तिष्क की ग्रह्यता का सरल व सामान्य सिद्धांत है.  कहकर बताई गई   या पढ़ा कर समझाई गई बात की अपेक्षा यदि उसे करके दिखाया जावे या चित्र से समझाया जावे तो वह अधिक सरलता से बेहतर रूप में समझ में आती है. ऐसी चीजे स्मृति में अधिक रहती है .

इसी तरह खेल खेल में समझे गये सिद्धांत या कहानियों के द्वारा बताई गई बातें बच्चों पर गहरा प्रभाव छोड़ती हैं .  क्यों कि कहानियों में कथ्य के साथ साथ बच्चे मन में एक छबि निर्मित होती चली जाती हैं
जो उन्हें किसी तथ्य को याद करने व समझने में सहायक होती है .
विज्ञान कथा कहानी की वह विधा है जिसमें वैज्ञानिक सिद्धांतो या परिकल्पनओं को कहानियों के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाता है . विज्ञान कथा के द्वारा लेखक अपनी वैज्ञानिक कल्पना को उड़ान दे पाता है . मैं  ने अपनी १९८८ में लिखी विज्ञान कथा में कल्पना की थी कि सड़को में स्ट्रीट लाइट की जगह एक कम ऊंचाई पर छोटा सा भू स्थिर उपग्रह हर शहर के लिये छोड़ा जावे तो कैसा रहे . मेरी यह कहानी विज्ञान प्रगति में छपी है .

हाल ही चीन ने इस तरह की परियोजना को लगभग मूर्त रूप दे दिया है , जिस  में वे आर्टीफीशियल मून लांच कर रहे हैं . इसी तरह मेरी एक विज्ञान कथा में मैने सेटेलाईट में लगे कैमरे से अपराध नियंत्रण की कल्पना की थी जो अब लगभग साकार है . देखें – बिना तार के रेडियेशन से एक जगह से दूसरी जगह बिजली  पहुंचाने की मेरी विज्ञान कथा में छपी हुई परिकल्पना कब साकार होती है .
ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ एक शिक्षक हैं . वे बच्चों को विज्ञान पढ़ाने के लिये रोचक कथा में पिरो कर उन्हें विज्ञान के गूढ़ सिद्धांत समझाते हैं . कहानी बुनने के लिये वे कभी बच्चे की नींद में देखे स्वप्न का सहारा
लेते हैं तो कभी पशु पक्षियों , जानवरों को मानवीय स्वरूप दे कर उन से बातें  करते हैं . संग्रह में कुल १७ छोटी-छोटी कहानियां हैं. हर कहानी में एक कथ्य है . पहली कहानी ही  गुरुत्वाकर्षण का नियम समझाती है . इंद्रधनुष
के सात रंग श्वेत रंग के ही अवयव हैं यह वैज्ञानिक तथ्य  बताने के साथ ही परस्पर मिल कर रहने की शिक्षा भी देते हुये इंद्रढ़नुष बिखर गया कहानी बुनी गई है . इसी तरह प्रत्येक कहानी बच्चों  पर अलग शैक्षिक प्रभाव छोड़ती है .

किताब बहुत बढ़िया है . सभी बच्चों को पढ़ना चाहिए. इन का उपयोग शालाओ में बहुत उपयोगी होगा . ऐसा मेरा विश्वास है.
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टिप्पणी … विवेक रंजन श्रीवास्तव , ए १ , शिला कुंज नयागांव जबलपुर
मो ७०००३७५७९८

परिचय - ओमप्रकाश क्षत्रिय "प्रकाश"

नाम- ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ जन्म- 26 जनवरी’ 1965 पेशा- सहायक शिक्षक शौक- अध्ययन, अध्यापन एवं लेखन लेखनविधा- मुख्यतः लेख, बालकहानी एवं कविता के साथ-साथ लघुकथाएं. शिक्षा- एमए (हिन्दी, अर्थशास्त्र, राजनीति, समाजशास्त्र, इतिहास) पत्रकारिता, लेखरचना, कहानीकला, कंप्युटर आदि में डिप्लोमा. समावेशित शिक्षा पाठ्यक्रम में 74 प्रतिशत अंक के साथ अपने बैच में प्रथम. रचना प्रकाशन- सरिता, मुक्ता, चंपक, नंदन, बालभारती, गृहशोभा, मेरी सहेली, गृहलक्ष्मी, जाह्नवी, नईदुनिया, राजस्थान पत्रिका, चैथासंसार, शुभतारिका सहित अनेक पत्रपत्रिकाआंे में रचनाएं प्रकाशित. विशेष लेखन- चंपक में बालकहानी व सरससलिस सहित अन्य पत्रिकाओं में सेक्स लेख. प्रकाशन- लेखकोपयोगी सूत्र एवं 100 पत्रपत्रिकाओं का द्वितीय संस्करण प्रकाशनाधीन, लघुत्तम संग्रह, दादाजी औ’ दादाजी, प्रकाशन का सुगम मार्गः फीचर सेवा आदि का लेखन. पुरस्कार- साहित्यिक मधुशाला द्वारा हाइकु, हाइगा व बालकविता में प्रथम (प्रमाणपत्र प्राप्त). मराठी में अनुदित और प्रकाशित पुस्तकें-१- कुंए को बुखार २-आसमानी आफत ३-कांव-कांव का भूत ४- कौन सा रंग अच्छा है ? संपर्क- पोस्ट आॅफिॅस के पास, रतनगढ़, जिला-नीमच (मप्र) संपर्कसूत्र- 09424079675 ई-मेल opkshatriya@gmail.com

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