कविता

आमो के डाल पर कोयल का बसेरा

आमो के डाल पर कोयल का बसेरा
चारो तरफ पेड़ो के बीच
अपना एक प्यारा सा आसियाना
सुबह कोयल के प्यारी सी कुंक के साथ
अलसायी नींदो को झकझोर झट से उठ जाना
सूर्य की किरणे मेरी खिड़कियों से होकर
पूरे घर को रौशन कर जाना
चाय के दो प्याली के साथ
मेरा तुम्हारा बैठ कर बातें करना
अखबार मे छपे देश दुनिया की बाते को पढ़कर
एक दूसरे को सुनाना
छोटी छोटी बातों पर आपस मे नोक झोक करना
सच मे कितना सुखद होता है ये पल
इसी तरह इसे रोज की दिनचर्या मे ढाल
एक खूबसूरत दिन की शुरुआत करना
यही तो है अपना रोज की कहानी l
निवेदिता चतुर्वेदी

निवेदिता चतुर्वेदी

बी.एसी. शौक ---- लेखन पता --चेनारी ,सासाराम ,रोहतास ,बिहार , ८२११०४