सरस्वती वंदना

हे हंस वाहिनी मुझे वरदान दो वरदान दो |
अपनी कृपा की कोर दो उत्थान दो वरदान दो |

वागीश वीणा वादिनी करुणा करो करुणा करो |
मुझको अगम स्वर ज्ञान का वरदान दो वरदान दो |

निष्काम हो हर कामना मैं नित करूँ आराधना |
मन का कलुष तम दूर हो वरदान दो वरदान दो |

नव गीत नव लय ताल दो शुचि शब्द का भंडार दो |
हर कल्पना साकार हो वरदान दो वरदान दो |

हो विमल मति हो सरल गति शालीनता उर में बसे |
बृम्हासुता ज्योतिर्मया वरदान दो वरदान दो |

हे धवल वसना भगवती विद्या की देवी वंदिता |
हिमराशि सी मुक्ता लड़ी सुर पूजिता आनंदिता |
सम्पूर्ण जड़ता दूर हो वरदान दो वरदान दो |

अपनी कृपा – – – – – – – – – – – – – – – –
हे हंसवाहिनी – – – – – – – – – – – – – – – –

मंजुषा श्रीवास्तव’मृदुल’

परिचय - मंजूषा श्रीवास्तव

शिक्षा : एम. ए (हिन्दी) बी .एड पति : श्री लवलेश कुमार श्रीवास्तव साहित्यिक उपलब्धि : उड़ान (साझा संग्रह), संदल सुगंध (साझा काव्य संग्रह ), गज़ल गंगा (साझा संग्रह ) रेवान्त (त्रैमासिक पत्रिका) नवभारत टाइम्स , स्वतंत्र भारत , नवजीवन इत्यादि समाचार पत्रों में रचनाओं प्रकाशित पता : 12/75 इंदिरा नगर , लखनऊ (यू. पी ) पिन कोड - 226016