जीनियस मां

मां के कई रूप हैं और उसमें धैर्य है, प्यार है और इतनी फिक्र है कि उसका कर्ज उतारना मुश्किल है. मां की ममता और वात्सल्य निःस्वार्थ होते हैं. मां कभी भी अपने उपकारों का, अपने प्यार का, अपने त्याग का और कष्टों का न तो कभी अहसान जताती है और न ही कभी इसका मूल्य मांगती है.
”आपने शायद जीनियस मां को नहीं देखा होगा.” एडिसन ने कहा था.
”मां तो सबकी जीनियस होती है. सभी अपनी मां को जीनियस और अपना आदर्श मानते हैं.”
”मेरी मां की बात कुछ अलग थी.” एडिसन का कहना था.
”वो कैसे?”
”एक दिन मुझे मेरी टीचर ने लेटर दिया और इसे मां को देने को कहा. मैंने वह लेटर अपनी मां को दिया और उनसे पढ़ने को कहा.
मां ने जैसे ही लेटर को देखा, उनकी आंखों में आंसू आ गए. उन्होंने पढ़ना शुरू किया, कहा- आपका बच्चा बेहद प्रतिभाशाली है. यह स्कूल उसे पढ़ाने के लिए छोटा है. इस स्कूल में उसे ट्रेनिंग देने के लिए पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं. कृपया उसे आप ही पढ़ाएं.
मां ने मुझे घर पर ही पढ़ाया.
कई सालों बाद जब मेरी मां की मृत्यु हो गई, एक दिन मैं घर में कुछ ढूंढ रहा था. इस दौरान उनकी नजर परिवार से जुड़ी तस्वीरों और एक लेटर पर पड़ी. मैंने अलमारी की दराज के कोने में पड़े इस लेटर को उठाया और पढ़ा. उसमें लिखा था, ‘‘आपका बेटा बेहद मंदबुद्धि है. हम उसे अब और स्कूल आने नहीं दे सकते.’’
एडिसन ने अपनी डायरी में लिखा, ‘‘थॉमस अल्वा एडिसन अपनी जीनियस मां का वह मंदबुद्धि लड़का है जो सदी का जीनियस बना.’’

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।