व्यंग्य – गरमी में बरतें नरमी

दोपहर के दो बज चुके हैं। गली में खामोशी पसरी हुई है। केवल इक्का-दुक्का कुल्फी वाले भइयों की लारी के अलावा दूर तलक कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। गरमी से हताहत हुए और डरे-सहमे लोग घर में डूबकर बैठे हैं। भरी दोपहरी में किसी का साहस नहीं बन पा रहा है कि गरमी से पंगा ले और दो-दो हाथ कर उसे पटकनी दें। मोहल्ले के तथाकथित दादा लोग भी गरमी के आगे भीगी बिल्ली बनकर शांत बैठे हैं। आजकल गली में एक की ही दादागरी चल रही है वह गरमी की। गरमी ने मनुष्यों की नाजुक नस ढूंढ़ ली है और वह उसे दिनोंदिन पूरे आवेग के साथ दबाकर उन्हें पराजित कर रही है।
गरमी का आतंक इतना है कि गली के आवारा मवेशियों ने भी दोपहर में बाहर निकलना बंद कर दिया। यहां तक पक्षियों ने तो अपनी उड़ान ही रद्द कर दी है। हालात यह हो रखे हैं कि सर्दियों में पत्नियों और गर्लफ्रेंडों से लिपटकर अपनी ठंड उड़ाने वाले प्रेमी आशिक दीवाना लोग आजकल कूलरों, टेबल पंखों व एसी से लिपटकर अपनी गर्मी उड़ाने में लगे हुए हैं। यह पुरुष प्रजाति का अवगुण ही है कि उसे जहां मजा मिलता है वह उसे पकड़ लेता है और मजा खत्म होने के बाद वह उसे मुड़कर भी नहीं देखता। गरमी ने वैवाहिक जीवन के सुख को दु:ख में तब्दील कर दिया। अब गरमी व पसीने भरी रातों में न तो बेला-चंपा महकता है और न रोमांस वाला सीन होता है। बल्कि मच्छरों और सूखते गले के कारण नींद का सुकून भी चला गया है।
सुबह उठते ही रवि रौद्र रूप धारण कर सिर पर चिकनी चमेली डांस करने लग जाता है। विटामिन डी एक साथ इतनी मात्रा में दे देता है कि शरीर के बाकी सारे विटामिनों के साथ प्रोटीन भी परदेस चला जाता है। व्यक्ति को व्यक्ति से मानवता की महक की बजाय इस सीजन में पसीने की दुर्गंध के कारण अलगाव पैदा होने लगा। हाथ मिलाकर गले मिलने वाले दोस्त-यार दूर से ही एक दूसरे को हेलो-हाय करने लगे हैं। गरमी में लड़कियां सुबह घर से कैटरीना कैफ बनकर निकलती हैं, वापस घर आते-आते मिशेल ओबामा बन जाती हैं। और लड़के सलमान खान बनकर निकलते हैं, वपास आते-आते रजनीकांत बन जाते हैं। गरमी सूर्य की हो या इंसान के सिर की सदैव अनर्थ ही करती है। गरमी में माथा और चेहरे का भूगोल बदल जाता है, व्यक्ति आग बबूला होकर अपना इतिहास भूला बैठता है और अपने ही हाथों अपना वर्तमान खराब करने लगता है। यदि गरम स्वभाव रहेगा तो लोग अवश्यंभावी डरेंगे लेकिन वे आपके प्रति अपने मन में नकारात्मक भाव भी पैदा करते जाएंगे। लेकिन इसके विपरीत स्वभाव रेफ्रिजरेटर में रखी शीतल आइसक्रीम जैसा होगा तो हर कोई आपको होंठों से लगाएगा। गरमी में यदि बरतें नरमी तो न होगा झगड़ा, लफड़ा और न होगी प्यार की कमी।

परिचय - देवेन्द्रराज सुथार

देवेन्द्रराज सुथार , अध्ययन -कला संकाय में द्वितीय वर्ष, रचनाएं - विभिन्न हिन्दी पत्र-पि़त्रकाओं में प्रकाशित। पता - गांधी चौक, आतमणावास, बागरा, जिला-जालोर, राजस्थान। पिन कोड - 343025 मोबाईल नंबर - 8101777196 ईमेल - devendrasuthar196@gmail.com