चौकीदार

बात लगभग 45 साल पुरानी है. मैं बिटिया-बेटे को स्कूल से वापिस ला रही थी. मैंने बिटिया से पूछा- ”आज पेपर में कौन-सा प्रश्न आया?”
”पहला प्रश्न था- चौकीदार किसे कहते हैं?” बिटिया ने कहा.
”जो हमारे जान-माल की रक्षा करने की जिम्मेदारी संभाले.” छोटे बेटे ने जवाब दिया. पिछले दिन बिटिया को प्रश्न-उत्तर याद कराते हुए उसे भी याद हो गया था.
इस बार लोकसभा चुनाव में प्रचार करते हुए न जाने किस भावना से प्रधानमंत्री मोदी जी को न केवल चौकीदार कहा गया, बल्कि यह कहा गया- ”चौकीदार चोर है.”
प्रधानमंत्री मोदी जी ने वास्तव में अपने को देश सेवा के लिए चौकीदार मानते हुए, इस शब्द को न केवल अंगीकार किया, बल्कि इसको सकारात्मकता से स्वीकार कर कैंपेन चलाते हुए सबको कहा- ”शान से कहो- हम भी हैं चौकीदार. चौकीदारी का मतलब है अपनी ज़िम्मेदारी निभाना.”
मोदी जी ने यह जिम्मेदारी भलीभांति निभाई, इसलिए जनता ने उन्हें फिर से जनादेश दे दिया और पहले से भी अच्छी तरह दिया है, ताकि वे देश के विकास की जिम्मेदारी भलीभांति निभा पाएं.
लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी बंपर जीत की तरफ बढ़ रही है. अबतक एनडीए गठबंधन 346 सीटों पर आगे है. इस समाचार के आने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर से अपने नाम के आगे से चौकीदार शब्द हटा लिया है. पीएम मोदी ने चौकीदार हटाने की जानकारी देते हुए ट्वीट भी किया और बाकी लोगों से भी ऐसा करने का आग्रह किया है.
मोदी जी के अनुसार- ”वक्त आ गया है कि चौकीदार की भावना को अगले स्तर तक लेकर जाया जाए. इस भावना को जिंदा रखते हुए हम भारत की प्रगति के लिए काम करना जारी रखेंगे. ट्विटर पर मेरे नाम से चौकीदार शब्द हटाया जा रहा है. लेकिन यह शब्द मेरा अभिन्न हिस्सा रहेगा. मैं आप सभी से भी ऐसा ही करने का आग्रह करता हूं.”
चौकीदार बनिए, अपनी जिम्मेदारी निभाइए.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।