Monthly Archives: June 2019


  • गीत

    गीत

    आस-निरास की बदरी घिरकर बहती है चुपचाप नयन में। मन के आगे मनुज मौन है विचरण करता है निर्जन में।। रिश्तों का बाजार सजाया लोभ मोह में मन भरमाया स्वारथ के रिश्तों ने लूटा। ईश सुमिर...

  • कलम

    कलम

    कलम कहती है बहुत कुछ कुछ दिल की बातें जब लेती है यह सुन शब्दों से आलिंगन कर एहसासों के मोतियों को पिरो लेती है। कलम देखती है वो सब कुछ जो दिखाया जाता है कभी...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    अहंकार का बोझ जब, सिर पर चढने लगा, आदमी को आदमी तब, कीडे सा लगने लगा| ढोने लगा वह बोझ अपना, अपने कांधो पर यहाँ, आदमी से आदमियत का, अहसास भी घटने लगा| — अ कीर्ति...


  • परिणाम

    परिणाम

    ”बेटी, साइकिल चलाना सीख ले, स्कूटी चलाना सीख ले, काम आएगा.” मां खुद पहले साइकिल, अब स्कूटी चलाती थीं, इसलिए बार-बार कहती थीं. बेटी सुना-अनसुना कर देती थी. न उसने साइकिल चलानी सीखी न स्कूटी. घर...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    साथ  तेरा  अगर   पायेंगे  दूर तक। तब यक़ीनन सनम जायेंगे दूर तक। उलझनों से निजी  जब उबर पायेंगे, देख तब  ही कहीं  पायेंगे  दूर तक। कल तलक जोहुआ वोहुआ सोहुआ, अब न धोखे मियाँ खायेंगे  दूर...