पर्यावरण ब्लॉग/परिचर्चा लेख सामाजिक

मानसून की देरी और वर्षा की कमी से परेशानी

हम सभी मित्रगण शाम को एक जगह मैदान में बैठे थे. यह एक कैंपस की खुली जगह है जहाँ छोटे बच्चे क्रिकेट भी खेल लेते हैं और दुर्गा पूजा के समय एक समारोह भी हो जाता है. एक दो बूँद झींसी गिर रही थी. बादल जमकर छाये थे पर वर्षा नहीं के बराबर हुई. बल्कि […]

गीत/नवगीत

गीत

आस-निरास की बदरी घिरकर बहती है चुपचाप नयन में। मन के आगे मनुज मौन है विचरण करता है निर्जन में।। रिश्तों का बाजार सजाया लोभ मोह में मन भरमाया स्वारथ के रिश्तों ने लूटा। ईश सुमिर से नाता टूटा।। सबने छुपकर घात किया है- त्राहि त्राहि है अब जीवन मे।। यूँ लगता है मन अनंत […]

कविता

कलम

कलम कहती है बहुत कुछ कुछ दिल की बातें जब लेती है यह सुन शब्दों से आलिंगन कर एहसासों के मोतियों को पिरो लेती है। कलम देखती है वो सब कुछ जो दिखाया जाता है कभी अनदेखी, अनदेखा भी दिल दहलाने वाली वारदातों को भी लिख देती है। कलम लेखक की ताकत होते हुए भी […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

अहंकार का बोझ जब, सिर पर चढने लगा, आदमी को आदमी तब, कीडे सा लगने लगा| ढोने लगा वह बोझ अपना, अपने कांधो पर यहाँ, आदमी से आदमियत का, अहसास भी घटने लगा| — अ कीर्ति वर्धन

गीत/नवगीत

गीत – तुम बिन सावन आग लगाये‌

कैसे कहूं मुंह से कहा ना जाये कि तुम बिन सावन आग लगाये‌ । भीगा मौसम, भिगाये मन मेरा ठंडी हवाएं सिहराये तन मेरा बिजली तड़प कर मुझको डराये‌ कि तुम बिन सावन आग लगाये‌। बागों में अब पड़ गये झूले ओ जी पिया तुम कैसे ये भूले सखियों का संग मन को ना भाये […]

लघुकथा

परिणाम

”बेटी, साइकिल चलाना सीख ले, स्कूटी चलाना सीख ले, काम आएगा.” मां खुद पहले साइकिल, अब स्कूटी चलाती थीं, इसलिए बार-बार कहती थीं. बेटी सुना-अनसुना कर देती थी. न उसने साइकिल चलानी सीखी न स्कूटी. घर में बाकी सब चलाते थे, सबके साथ स्कूटी पर जाती थी, पर न उसे कभी सीखने की जरूरत महसूस […]

समाचार

शालू मिश्रा जयपुर रत्न से सम्मानित

समाज को अपना विशिष्ट योगदान देने वाली प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 29 जून को जयपुर रत्न सम्मान समारोह के दूसरे संस्करण का आयोजन  निर्मला आडिटोरियम में किया गया। मुख्य अतिथि प्रसिद्ध बॉलीवुड सेलिब्रटी पंकज बेरी जी, राजस्‍थान की फेमस कालबेलिया डांसर  पद्मश्री गुलाबो सपेरा,कालीचरण सर्राफ,अकबर खान,अशोक लाहौटी, आदि […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

साथ  तेरा  अगर   पायेंगे  दूर तक। तब यक़ीनन सनम जायेंगे दूर तक। उलझनों से निजी  जब उबर पायेंगे, देख तब  ही कहीं  पायेंगे  दूर तक। कल तलक जोहुआ वोहुआ सोहुआ, अब न धोखे मियाँ खायेंगे  दूर तक। मंज़िलों  के  निशां  खूब बतला चुके, ऊँच और नीच  समझायेंगे  दूर तक। दूर  कर   के  रहेंगे   सभी   उलझनें, […]

कहानी

हावड़ा – मेदिनीपुर की लास्ट लोकल

महानगरों के मामले में गांव – कस्बों में रहने वाले लोगों के मन में कई तरह की सही – गलत धारणाएं हो सकती है। जिनमें एक धारणा यह भी है कि देर रात या मुंह अंधेरे महानगर से उपनगरों के बीच चलने वाली लोकल ट्रेनें अमूमन खाली ही दौड़ती होंगी। पहले मैं भी ऐसा ही […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – नकल का सुख

नकल का भी अपना ही सुख है।हम बचपन से नकल करते -करते बड़े हो गए। छोटे थे तो अपने माता -पिता और बड़ों की नकल की।नकल से बहुत कुछ सीखा ।और इस प्रकार नकल से असल रूप में तैयार हो गए। पर नकल करने का हमारा संस्कार नकली नहीं रहा। वह असली हो गया। नतीजा […]