मेरी अभिलाषा

5 जून ‘पर्यावरण दिवस’ के अवसर पर विशेष

छोटी-सी कुदाल दिलवादे,
मैं भी गड्ढा खोदूंगा,
उसमें नीम का पेड़ लगाकर,
रोज ही जल से सींचूंगा,
समय-समय पर खुरपी से मैं,
निराई-गुड़ाई भी कर दूंगा,
पेड़ बड़ा हो छाया देगा,
खुशियों से मन भर लूंगा,
इसके हर हिस्से से मिले दवाई,
सबके दुःख मैं हर लूंगा,
मां इतनी-सी बात मान ले,
ये मत कहना छोटा हूं,
पर्यावरण-सुधार में मैं भी,
कुछ सहयोग तो दे दूंगा,
बचपन में ही काम बड़े कर,
कुल को रोशन कर दूंगा.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।