लघुकथा

छतरी वाली लड़की

5 जून ‘पर्यावरण दिवस’ के अवसर पर विशेष

साहित्यिक लघुकथा मंच ‘नया लेखन नए दस्तखत’ पर विजेता लघुकथा

 

 

आज एक कला प्रदर्शनी में एक चित्र देखा. चित्र क्या था, बोलते-चालते विकास और प्रदूषण का जीवंत चित्रांकन था! एक तरफ धुआं छोड़ती गाड़ियां, एक तरफ प्रदूषण फैलाती कल-कारखानों की चिमनियां. उस चित्र को देखकर मुझे उस छतरी वाली लड़की की याद आ गई, जो ऑस्ट्रेलिया में लगातार 4 महीने तक मुझे सुबह सैर करते हुए मिलती रही थी. उसी समय पर उसी जगह पर, क्योंकि उसे ठीक नौ बजे काम पर पहुंचना होता था और मुझे ठीक नौ बजे घर, ताकि सबको नाश्ता ठीक समय पर मिल सके.
पिचकी नाक वाली गोरी-चिट्टी-नाटी वह चीनी लड़की कोई भी मौसम हो, छतरी ताने चलती थी. पहले सर्दी का मौसम था. हल्की सुनहरी धूप बहुत सुहानी लगती थी, पर वह यानी डिक्सी छतरी ताने! मुझे आश्चर्य लगा. फिर मैंने सोचा, शायद यह गोरी-चिट्टी होने के कारण रंग काला न पड़ जाए, इस डर से छतरी ताने चलती थी. एक दिन गुड मॉर्निंग के बाद मैंने उससे पूछ ही लिया. उसका जवाब चौंकाने वाला था.
”प्रदूषण.” उसका जवाब था.
”प्रदूषण? मुझे तो यहां कोई प्रदूषण नहीं दिखाई दे रहा!” मेरे मन में तो दिल्ली बसी हुई थी.
”आप पॉश सबर्ब में रहने वाली हैं, जरा आउट स्कर्ट्स में आकर देखिए. कारें तो पूरी सिडनी में हैं ही, चिमनियों का धुआं सांस लेना तक दूभर कर देता है. नीची चिमनियां पॉल्यूशन लेवल को और ऊंचा कर देती हैं.” उसने नाक पर हाथ को ऐसे रख लिया था मानो इस समय भी चिमनियों का धुआं उसकी सांस को प्रदूषित कर रहा हो.
मुझे हैरानी हो रही थी. 20 साल से यहां आती रही हूं, दो-दो साल भी रहकर गई हूं, न मक्खी-मच्छर, न तिलचट्टा-छिपकली. कूड़े के निपटान की सुव्यवस्था. सफाई और अनुशासन ऐसा, कि दंग रह जाओ. उस दिन उसकी बात से दंग रह गई थी.
”इंडस्ट्रियल एरिया में संचालित कल-कारखानों की चिमनियों से उठते धुएं व आसपास बहती केमिकलयुक्त गंदगी भी प्रदूषण को बढ़ाने का काम कर रही है.” उसने कहा था.
”ऐसा क्या!” मेरी हैरानी बढ़ती जा रही थी.
”यहां प्रदूषण दिखाई नहीं देता, पर प्रदूषण के कारण सूर्य की किरणें इतनी प्रदूषित हो गई हैं, कि सर्दी में भी छतरी के बिना धूप में चलने से त्वचा की ऐसी बीमारियां हो जाती हैं, जिनका ठीक होना मुश्किल है. इसलिए बचाव में ही समझदारी है.”
तब से मैं भी छतरी वाली बन गई थी.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

One thought on “छतरी वाली लड़की

  1. ‘छतरी वाली लड़की’ लघुकथा पर्यावरण से प्रदूषण हटाने पर आधारित है. यह प्रदूषण कभी हमें दिखाई देता है, कभी नहीं. कभी बाहर खुले में भी सांस लेने में दिक्कत होती है, तो कभी गले में खराश होती है. समाचारों में सुनने को मिलता है कि सुबह नौ बजे से पहले सैर पर न निकलें, जब कि पहले ब्रह मुहूर्त यानी सुबह चार बजे टहलने के ढेरों लाभ गिनाए जाते थे. यह लघुकथा ”नया लेखन नया दस्तखत” लघुकथा मंच पर साप्ताहिक लघुकथा प्रतियोगिता में विजेता लघुकथा घोषित की गई थी. यह प्रतियोगिता प्रदत चित्र पर आधारित होती है.
    5 जून ‘पर्यावरण दिवस’ के अवसर पर यह विशेष लघुकथा पढ़िए और पर्यावरण से प्रदूषण हटाने का संकल्प लेकर उस पर अमल कीजिए, अपने संकल्प के बारे में हमें कामेंट्स में बताइए.

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