असली मुस्कुराहट (पत्रात्मक लघुकथा)

राष्ट्रीय मुस्कुराहट दिवस पर विशेष
आज 15 जून राष्ट्रीय मुस्कुराहट दिवस है. आप लोग एक दूसरे को मुस्कुराहट दिवस की शुभकामनाओं के कॉर्ड भेजेंगे. कॉर्ड भेजने वाले भी मुस्कुराएंगे और पाने वाले भी. आपके पास मजेदार चुटकुले आएंगे और आप भेजेंगे भी. हो सकता है कुछ देर के लिए आपके होठों पर मुस्कुराहट आ जाए, लेकिन वह मुस्कुराहट न तो असली होगी और न ही स्थाई. हमारे और हमारे जिले और गांव के लिए आज मुस्कुराहट है. जाहिर है आप हमारी असली मुस्कुराहट की वजह जानना चाहेंगे. इसकी वजह है हमारी मेहनत और वह भी सही दिशा में.
तमिलनाडु का वेल्लोर जिला अकसर सूखे के कारण चर्चा में रहता है. पिछले चार सालों में खेती में काम करने वाले लगभग 50 पर्सेंट मजदूर खेत छोड़कर शहर की ओर पलायन कर चुके हैं. तमिलनाडु सरकार ने इस साल मई में ही 24 जिलों को सूखा प्रभावित घोषित किया था, जिसमें वेल्लोर का भी नाम शामिल है. हम महिलाओं ने हिम्मत से काम लिया.
तमिलनाडु के वेल्लोर में हम महिलाओं ने रीचार्ज कुएं बनाकर इलाके का जलस्तर बढ़ाया. मनरेगा में मजदूरी करने वाली हम महिलाओं ने आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के वालंटियर्स की मदद से नागनदही नदी को पुनर्जीवित कर दिया है. नदी को पुनर्जीवित करना आसान नहीं होता. सिर्फ बहने वाली नदी ही नदी नहीं होती, साफ बहने के लिए जमीन के नीचे से पानी बराबर नदी को मिलना चाहिए. धीरे-धीरे बारिश का पानी जमीन के अंदर जाना चाहिए.
बारिश का पानी धीरे-धीरे करके जमीन के अंदर चला जाए, इसके लिए पिछले चार साल में हम 50 महिलाओं के एक ग्रुप ने 36 रीचार्ज कुएं और 25 बोल्डर चेक बना डाले हैं. बोल्डर चेक में पत्थरों का उपयोग करके बारिश के पाने के बहाव को कम किया जाता है. इससे हमें अपनी धान की खेती के लिए भी पानी मिल जाता है और महीने के 25 दिन लगभग 224 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से कमाई भी हो जाती है. वेल्लोर के बाकी हिस्से सूखे से प्रभावित हैं लेकिन इस गांव की हम महिलाओं की मेहनत ने यहां पानी को जिंदा रखा है, नागनदही नदी को पुनर्जीवित कर दिया है.
यही है हमारी असली मुस्कुराहट की वजह.
हम सबको राष्ट्रीय मुस्कुराहट दिवस की कोटिशः शुभकामनाएं-

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हम हैं वेल्लोर जिले के सालामनातम गांव की महिलाएं

मुस्कान पर लीला तिवानी के ब्लॉग
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परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।