ठक-ठक, ठक-ठक- 11

ठक-ठक, ठक-ठक-1
”ठक-ठक, ठक-ठक”.
”कौन है?”
”मैं हूं पानी.”
”पानी! कहिए-कहिए, आज कैसे दर्शन दिए?”
”मैं तो रोज दर्शन देने के लिए तैयार हूं, पर आप लोग संभलकर खर्च करने के लिए यैयार हो, तब न!”
”क्या मतलब?”
”मतलब आप खूब समझते हैं, पर अनाप-शनाप पानी खर्च करने से बाज नहीं आते हैं. सरकार बहुत खर्च करके पानी को पीने लायक बनाती है, लेकिन आप लोग फव्वारे से नहाते हैं, पाइप से कार धुलवाते हैं, बारिश के पानी को धरती में जाने का कोई जतन नहीं करते हैं, बगीचे में पाइप लगाकर पानी खोलकर गायब हो जाते हैं, पेड़ काटते जाते हैं और नए न लगाकर मिट्टी का कटाव नहीं रोकते हैं, तो फिर पानी की कमी तो होनी ही है!”
”कोई हल तो बताओ.”
”हल तो मैंने बता ही दिया है. साथ ही सचिवों की बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार पानी से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देगी. मोदी सरकार ग्रामीण भारत के सभी घरों तक पाइपलाइन से पानी पहुंचाने की योजना पर काम करेगी. जल संसाधन मंत्रालय को ‘जल शक्ति’ बनाकर पीएम मोदी ने पहले ही इस बात के संकेत दे दिए थे कि आने वाले वक्त में जल की उपलब्धता सरकार की प्राथमिकता में होगी. ग्रामीणों को जल संरक्षण के लिए जागरूक करने के लिए जलदूतों की नियुक्ति पर हो रहा है विचार. अब सरकार की योजनाएं तो तभी सफल होंगी, जब योजनाएं क्रियांवित हों और जनता भी सचमुच जलदूत बनकर पानी की बचत करे.”
”हम सच्चे जलदूत बनेंगे.”

ठक-ठक, ठक-ठक-2
”ठक-ठक, ठक-ठक”.
”कौन है?”
”मैं हूं सुपरकंप्यूटर.”
”सुपरकंप्यूटर! सभी कंप्यूटर सुपर ही तो होते हैं न!”
”अरे नहीं! मैं दुनिया का सबसे पावरफुल एआई सुपरकंप्यूटर अब भारत में भी आ गया हूं.”
”भारत में! कहां?
”मुझे जोधपुर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में लगाया गया है.”
”तुम्हारी विशेषता?”
”मुझसे देश में आर्टिफिशिल इंटेलिजेंस प्रशिक्षण गतिविधियों को बल मिलने की उम्मीद है.”
”और?”
”मैं 15 दिन का काम डेढ़ दिन में कर सकता हूं. मुझे यहां एक विशेष प्रयोगशाला में लगाया गया है.”
”डेढ़ दिन में 15 दिन का काम! वो कैसे?”
”मुझमें 16 विशेष जीपीयू कार्ड लगे हैं और प्रत्येक की क्षमता 32 जीबी की है। इसकी रैम 512 जीबी की है. आम कंप्यूटर की क्षमता केवल 150 से 200 वाट होती है, जबकि मेरी क्षमता 10 किलोवाट की है. मुझसे एआई के बड़े ऐप्लिकेशन के प्रशिक्षण में मदद मिलेगी.”
”तुम्हारी लागत?”
”दिल थाम कर रखना- लगभग 2.50 करोड़ रुपये!”

ठक-ठक, ठक-ठक-3
”ठक-ठक, ठक-ठक”.
”कौन है?”
”मैं हूं ख़ास आम.”
”ख़ास आम का क्या मतलब? कोई या तो ख़ास हो सकता है या आम. तुम आम आदमी पार्टी के ख़ास हो क्या?”
”अरे नहीं मैं तो फलों का राजा आम हूं. मेरी एक ख़ास किस्म है, उसकी बात कर रहा हूं.”
”क्या है उस ख़ास किस्म की ख़ासियत?”
”मेरी प्रजाति ‘नूरजहां’ है. ‘नूरजहां’ के गिने-चुने पेड़ मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में ही पाए जाते हैं. नूरजहां के फलों की सीमित संख्या के कारण शौकीन लोग तब ही इनकी पहले से बुकिंग कर लेते हैं, जब ये डाल पर लटककर पक रहे होते हैं.”
”अपने बारे में और कुछ बताना चाहोगे?”
”हां-हां क्यों नहीं?मुझे ‘आमों की मल्लिका’ कहा जाता है. नूरजहां के फल तकरीबन एक फुट तक लंबे हो सकते हैं, एक फल का औसत वजन 2.5 किलो के आस-पास. सिर्फ एक फल की कीमत होती है 500 रुपये.”
”वह भई वाह! मान गए. तुम तो सचमुच ख़ास आम हो!”

ठक-ठक, ठक-ठक-4
”ठक-ठक, ठक-ठक”.
”कौन है?”
”हम हैं यूट्यूबर किसान.”
”यूट्यूबर किसान! ऐसे किसान तो हमने सुने ही ह नहीं!”
”इसलिए तो हम ठक-ठक, ठक-ठक करके सुना रहे हैं. हम हैं यूट्यूबर किसान, कर रहे हैं खेती को आसान.”
”वो कैसे?”
”हम खेती के आसान तरीकों के वीडियो बनाकर यूट्यूब पर अपलोड करते हैं, उन पर कामेंटस आते हैं, लोग हमसे प्रश्न पूछते हैं, हम उनकी जिज्ञासाएं शांत करते हैं और उन्हें खेती के नए-नए तरीके सीखने को मिलते हैं.”
”जैसे?”
”हम उन्हें सिखाते हैं, कि हमारे पशुओं को 24×7 वाटर सप्लाई कैसे मिल सकती है, बरसाती पाइप के जरिए सिंचाई कैसे की जाती है, गर्मी में जब पानी कम रहता है तो किसान ट्रडिशनल मूंगलफली की जगह तिल्ली उगा सकते हैं. तिल्ली को कम पानी की जरूरत होती है. 1 क्विंटल तिल्ली के लिए 10,000 रुपये जबकि इतनी ही मूंगफली के लिए 4,000 रुपये मिलते हैं, आदि-आदि.”
”यह तो बड़े काम की बातें हैं भाई!”
”जी.”
”अपना नाम तो बताओ!”
”हम हैं हरविलास सिंह, दर्शन सिंह, संतोष जाधव, नंदकिशोर धाकड़ आदि. हमारे चैनल किसानों को लाभकारी जानकारी के साथ हमें धन की उपलब्धि भी करवाते हैं.
”यह तो वही वाली बात हुई! एक पंथ, दो काज.”
”जी, ऐसा ही समझिए.”

ठक-ठक, ठक-ठक-5
”ठक-ठक, ठक-ठक”.
”कौन है?”
”मैं हूं समस्या.”
”समस्या! कौन-सी समस्या?”
”वही, बेरोजगारी की समस्या?”
”इस समस्या का कारण बताओ.”
”मैं तो समस्या हूं, कारण और समाधान तो आप निकालोगे. मुझे तो बस इतना पता है कि इन्फोसिस के पूर्व सीएफओ और दिग्गज निवेशक टी.वी. मोहनदास पई ने कहा है कि भारत में नौकरी की नहीं, वेतन की समस्या है.”
”वो कैसे?”
”उनका कहना है- भारत में कम आमदनी वाली नौकरियों के अवसर उत्पन्न हो रहे हैं, जिन्हें डिग्री होल्डर नहीं चाहते. उन्होंने बेरोजगारी के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए हैं.”
”फिर हमें क्या करना होगा?”
”अच्छी नौकरियों के अवसर बनाने होंगे. चीन की तरह भारत श्रम प्रधान उद्योग शुरू करे और बंदरगाहों के नजदीक इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करे. साथ ही नौकरी करने वालों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हाईटेक R&D में अधिक निवेश करे.”
”चीन ने क्या किया?”
”चीन ने पहले श्रम प्रधान उद्योग लगाए. पूरी दुनिया को आमंत्रित किया कि इसके श्रम का इस्तेमाल करे और निर्यात का कारोबार किया. चीन ने इलेक्ट्रॉनिक असेंबली और चीप निर्माण सहित हाईटेक रिसर्च और डिवेलपमेंट में भारी निवेश किया है. इको सिस्टम तैयार करने के लिए निचले स्तर पर बढ़ावा दिया गया. उन्होंने कहा कि चीन ने तटीय इलाकों में इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाए.”
”हम भी ऐसा करें, तो शायद बेरोजगारी की समस्या समाप्त हो जाए.”
”बिलकुल सही कहा.”

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।