चल दिया

खाया पिया चल दिया
पूछा, क्यों भाई क्या हुआ?
क्यों भोजन से मुँह फेर लिया?
क्यों थाली को खिसका दिया।
वह बोला,
भोजन बेकार है
इसे गधे भी नहीं खा सकते
इंसान की क्या औकात है?
आप फिर भी
इसे खाते हो
कैसे इंसान हो।
मन में
कुछ विचारों ने उथल पुथल की
सच कहते हैं
बूढ़े बुजुर्ग
भरे पेट को खाना खिलाना
मतलब खुद को दोषी ठहराना
संताप घर बुलाना।

परिचय - अशोक बाबू माहौर

जन्म -10 /01 /1985 साहित्य लेखन -हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में संलग्न प्रकाशित साहित्य-विभिन्न पत्रिकाओं जैसे -स्वर्गविभा ,अनहदकृति ,सहित्यकुंज ,हिंदीकुंज ,साहित्य शिल्पी ,पुरवाई ,रचनाकार ,पूर्वाभास,वेबदुनिया आदि पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित I साहित्य सम्मान -इ पत्रिका अनहदकृति की ओर से विशेष मान्यता सम्मान २०१४-१५ से अलंकृति I अभिरुचि -साहित्य लेखन ,किताबें पढ़ना संपर्क-ग्राम-कदमन का पुरा, तहसील-अम्बाह ,जिला-मुरैना (म.प्र.)476111 ईमेल- ashokbabu.mahour@gmail.com 9584414669 ,8802706980