लघुकथा

लक्ष्मीबाई

” तुम सब डरी हुई क्यों हो ……”?

कोई जवाब नहीं सिर्फ खामोशी ……

” देखो , ये मेरा काम है ,सृष्टि को चलाने के लिए तुमको जाना होगा । मन मेरा भी नही तुम सबको भेजने का पर मज़बूर हूँ “।।

कोई भी जवाब नही दे रही सभी डरी सहमी एक दूसरे के पिछे छुप रही ।।

किताब बन्द कर आँखे मूंद वो भी बैठ गए क्योंकि बिन उनकी हाँ कुछ नहीं कर सकते वो भी …………।।

थोड़ी देर बाद…….

” मेरी बच्चीयों कोई नही जाएगा तो दुनिया खत्म हो जाएगी और विनाश होगा …….कोई तो जाओ…..

” मैं जाउंगी आपके लिए लेकिन मैं दिव्या, आरिफा, ट्विंकल या निर्भया नही बनूंगी ।

कहिये ????

” हाँ , अब ये कोई नही बनेगा । तुम बनोगी लक्ष्मीबाई , पद्मावती जिन्होंने अपने और देश के लिए लड़ाई लड़ी वीरांगना कहलाई ।।।

— सारिका औदिच्य

*डॉ. सारिका रावल औदिच्य

पिता का नाम ---- विनोद कुमार रावल जन्म स्थान --- उदयपुर राजस्थान शिक्षा----- 1 M. A. समाजशास्त्र 2 मास्टर डिप्लोमा कोर्स आर्किटेक्चर और इंटेरीर डिजाइन। 3 डिप्लोमा वास्तु शास्त्र 4 वाचस्पति वास्तु शास्त्र में चल रही है। 5 लेखन मेरा शोकियाँ है कभी लिखती हूँ कभी नहीं । बहुत सी पत्रिका, पेपर , किताब में कहानी कविता को जगह मिल गई है ।