विशेषज्ञ सुदर्शन भाई: जन्मदिन की बधाई

आपको शीर्षक से तो पता चल ही गया है, कि आज हम सुदर्शन भाई को जन्मदिन की बधाई देने वाले हैं, चलिए सबसे पहले हम उनको जन्मदिन की बधाई ही दे देते हैं, फिर बार करेंगे विशेषज्ञता की.
प्रिय सुदर्शन भाई,
”खुश रहिए हमेशा, यह दुआ है हमारी,
राह तकें बुलंदियां, सदियों तक तुम्हारी,
जन्मदिन आपका प्रेम से मनाने को,
कतार बांधे खड़ी है कायनात सारी.”
सुदर्शन भाई, आपको हमारी तरफ से व अपना ब्लॉग की तरफ से जन्मदिन की कोटिशः बधाइयां व शुभकामनाएं. आप जीवन में जिस पथ पर अग्रसर हैं, हर मुकाम पर सफलताएं आपके चरण चूमें, आप सदैव स्वस्थ रहें और दीर्घायु हों. आपको और परिवार में सभी को हार्दिक बधाई. आप सभी के जीवन में खुशियों की बरसात होती रहे और हर दिन एक नयी ख़ुशी आपको मिलती रहे.

सुदर्शन भाई की विशेषज्ञता से पहले यह देखें कि यह विशेषज्ञता उनमें आई कहां से. यह विशेषज्ञता उनके पूजनीय पिताजी की देन है. अनेक भाषाओं के विशेषज्ञ व एकदम उत्तम, सर्वोत्तम, सुंदर व हर काम संपूर्णता से करने वाले उनके पिताजी ने बचपन से ही इनके काम पर नजर रखी, फलस्वरूप सुदर्शन भाई हर काम एकदम उत्तम, सर्वोत्तम, सुंदर व हर काम संपूर्णता से करने वाले बन गए. यह विशेषज्ञता उनके संस्कारों में, ब्लॉग्स-लेखन में, प्रतिक्रिया-लेखन में, त्रुटिरहित भाषा-लेखन में, विषयोचित शैली में, पात्रों के मनोविज्ञान में, प्रकृति-चित्रण में, संबोधन में यानी सब में दिखाई देती है.

सुदर्शन भाई की माताजी भी सुशिक्षित और सुसंस्कृत महिला हैं. नन्हे सुदर्शन को प्रेरणा व प्रोत्साहन देकर उन्होंने उनको विशेषज्ञ सुदर्शन खन्ना बना दिया. उनका यह प्रयास अभी भी जारी है. हमने सुदर्शन भाई पर ब्लॉग ‘मनोविज्ञान के चतुर चितेरे: सुदर्शन खन्ना’ लिखा था, उस पर उनकी माताजी ने जो प्रतिक्रिया लिखी, वह ब्लॉग के बराबर थी और हमने उसका ब्लॉग बना दिया था, जो आप पढ़ चुके हैं.

सुदर्शन भाई अपनी हमें भी अपनी विशेषज्ञता का श्रेय देते हैं. संयोग पर संयोग-5 पर हमने प्रतिक्रिया में लिखा था-
प्रिय ब्लॉगर सुदर्शन भाई जी, आप लाख कहिए- ”मेरी लेखनी को शक्ति आपने दी है.” हम प्रतिकार नहीं करेंगे, पर वास्तविक सत्य यही है, कि आपकी धारदार लेखनी ही आपकी शक्ति है, जिसे बचपन से ही अत्यधिक प्रतिभाशाली बनाने का प्रयत्न किया गया है. आपकी प्रतिभा-लगन-मेहनत के शुद्ध दुग्ध में अगर हमारी प्रेरणा और प्रोत्साहन का थोड़ा-सा जामन दमदार दही का रूप ले लेता है और निरंतर प्रवाह से आप उसमें से शानदार-जानदार रचनाओं रूपी मक्खन के पेड़े निकालते जाते हैं, तो हम अपनी प्रेरणा और प्रोत्साहन को धन्य मानते हैं. ऐसे ही निरंतर प्रवाहित होते रहिए.

आगे बढ़ने से पहले हम आपको पहले ही बता देना चाहते हैं कि अभी सुदर्शन भाई को ब्लॉग पर आए एक साल भी नहीं हुआ है और यह उनका पहला जन्मदिन है. शैशवकाल में ही हम सुदर्शन भाई की विशेषज्ञता की बात कर रहे हैं. उनकी 200 से अधिक रचनाएं अब तक आ चुकी हैं और उनकी एक-एक रचना अनमोल नगीने के समान है. इस कारण उनके ब्लॉग-साहित्य का कैनवास बहुत बड़ा है, हमारी लेखनी छोटी, तो हम केवल मात्र संकेत या तनिक उल्लेख ही कर पाएंगे.

यहां हम आपको बताते चलें, कि हमारे ब्लॉग संयोग कैसे-कैसे! पर सुदर्शन भाई ने लिखा था ”वाह, क्या शीर्षक है, यह तो पूरी श्रंखला है” और आपको याद होगा कि आप सभी नियमित पाठक-कामेंटेटस पर संयोग पर संयोग की 11 कड़ियां बनी थीं.

दिलखुश जुगलबंदी के प्रणेता भी सुदर्शन भाई हैं यह बात आप ब्लॉग दिलखुश जुगलबंदी: एक नवीन काव्य-विधा में पढ़ चुके हैं और अब तो आप सब भी दिलखुश जुगलबंदी करने में माहिर भी हो गए हैं.

संस्कारों के विशेषज्ञ-
अभी पिछले महीने ही एक धार्मिक कार्यक्रम में सुदर्शन भाई से मिलना हुआ था. प्रोग्राम के उल्लेख से लेकर उनसे मिलने तक उन्होंने जिस सादगी और संस्कारों का परिचय दिया, उससे लगता है कि ये भारतीय सुसंस्कार उनके अंदर गहरी जड़ जमाए हुए हैं. उनके लेखन में भी सुसंस्कारों का सुदर्शन होता है.

नम्रता के विशेषज्ञ-
सुदर्शन भाई नम्रता के विशेषज्ञ हैं, यह तो आप जानते ही हैं. चाहे ब्लॉग हो, उनके ब्लॉग में प्रतिक्रिया का उत्तर हो या किसी के ब्लॉग में प्रतिक्रिया, नम्रता उनकी सहचरी बनकर चलती है. आदरणीय और सादर प्रणाम उनकी नम्रता के सुदृढ़ स्तम्भ हैं. नम्रता का सबसे पहला उदाहरण देखिए-

दरख्त उनका पहला ब्लॉग था और पहली कविता भी. उस पर हमने लिखा-
”प्रिय ब्लॉगर सुदर्शन भाई जी, आप अपना ब्लॉग पर पहली बार पधारे हैं, आपका हार्दिक स्वागत है. आपके आने से साहित्य जगत में रौनक आ गई है. आपकी पहली ही कविता अभिभूत कर गई. ऐसे ही हमें लिखना सिखाते रहिए. अत्यंत साहित्यिक, सटीक व सार्थक ब्लॉग के लिए आभार.”

”माननीया में आप सभी के समक्ष एक विद्यार्थी हूँ आपसे प्रेरणा पाकर कुछ लिखने का साहस जुटा पाया हूँ मैं आपका आभारी हूँ सादर प्रणाम.”

कविता के विशेषज्ञ-
सुदर्शन भाई की कविता कितनी सार्थक और सटीक होती है, यह तो आप जानते ही हैं. उनकी कुछ कविताएं हैं- दरख्त, मैं तरु हूं इक मित्र तुम्हारा, ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा.
‘मैं तरु हूं इक मित्र तुम्हारा’ कविता के सृजन की कहानी बड़ी अनूठी है. गौरव द्विवेदी के एक ब्लॉग की प्रतिक्रिया में उन्होंने इस कविता को लिखा. हमें यह कविता बहुत भा गई. हमने उनसे इस कविता को अपना ब्लॉग में प्रकाशित करवाने को कहा, इस कविता को आप सबका बहुत प्यार मिला.
ऐसी ही अनूठी कहानी है एक और प्रतिक्रिया की ब्लॉग ‘कम्प्यूटर के कीबोर्ड में F1-F12 कीज़’ में. इस ब्लॉग में हमने लिखा था- ‘अंकण-टंकण के बारे में तो हमारे विशेषज्ञ पाठक कामेंट्स में आपको बताएंगे.’ सचमुच सुदर्शन भाई ने इतनी विस्तार से खूबसूरत-उपयोगी प्रतिक्रिया लिख दी, कि हमने उसे ब्लॉग का हिस्सा ही बना लिया.
फिर सदाबहार काव्यालय उनकी कविता ‘दरख़्त’ से ही प्रारंभ हुआ था. इसके अलावा 7. निःशब्द, 10. क्यों है मांगता?, 13. रक्त कणिका भी अत्यंत सटीक व सार्थक हैं.

मनोविज्ञान के विशेषज्ञ-
हमारे ब्लॉग ‘मनोविज्ञान के चतुर चितेरे: सुदर्शन खन्ना’ में आप सुदर्शन भाई के मनोविज्ञान के बारे में पढ़ चुके हैं-
”एक शब्द का ब्लॉग, ग़ज़ब का मनोविज्ञान, सधी हुई भाषा-शैली, ग़ज़ब का पर्यवेक्षण, संवेदन (Sensation), अवधान (attention), प्रत्यक्षण (Perception), सीखना (अधिगम), स्मृति, चिन्तन आदि सब समाहित. यह है सुदर्शन भाई का अद्भुत लेखन. यही है सुदर्शन भाई का मनोविज्ञान और बालमनोविज्ञान.”

नवाचारों के विशेषज्ञ-
सुदर्शन भाई नवाचारों के विशेषज्ञ भी हैं, यह आप सब जानते हैं. ब्लॉग ‘बर्थडे गिफ्ट’ को उन्होंने अपने हस्तलेख से सजाकर एक सफल नवीन प्रयोग किया, जिसे आप सबने बहुत पसंद किया और लिखा- ‘ हस्तलिखित पृष्ठ ने कथा में चार चांद लगा दिये.’ अगले दिन फ़ादर्स डे पर ब्लॉग ‘फ़ादर्स डे’ भी नवाचार का एक सफल प्रयास रहा.

भाषा के विशेषज्ञ-
भाषा के विशेषज्ञ में हम आपको बताएं कि सुदर्शन भाई हिंदी, इंग्लिश, पंजाबी, उर्दू आदि कई भाषाओं के जानकार तो हैं ही, हिंदी और इंग्लिश भाषा में उनको समान रूप से विशेषज्ञता हासिल है. वे हिंदी-इंग्लिश की अनेक थीसिस-पुस्तकों की एडीटिंग भी कर चुके हैं. उनकी शब्दावली का कैनवास तो इतना विशाल है, कि उनकी शब्दावली के आगे समुद्र का विस्तार भी छोटा पड़ जाता है.
‘निराले विषयों के निराले युवा लेखक’ ब्लॉग में हमने सुदर्शन भाई के बारे में लिखा था- ”यों तो युवा लेखक बहुतेरे हैं पर हमने इनकी रचनाओं को युवा रचनाएं क्यों कहा, यह मुद्दे की बात है. सुदर्शन खन्ना की रचनाओं में युवा की सी ताज़गी है. एक ब्लॉग पढ़कर इतनी ताज़गी आ जाती है, कि अन्य ब्लॉग्स पढ़ने को मन मचल उठता है. ये रचनाएं लेखन की दृष्टि से, शब्दों के चयन की दृष्टि से, चित्रण की दृष्टि से, विषय की नवीनता की दृष्टि से, प्रस्तुतिकरण की दृष्टि से ताज़गी भरी हैं.”

शैली के विशेषज्ञ-
सुदर्शन भाई के ब्लॉग ‘चिड़ चिड़ वाली आंटी’ नाम से आप चिड़ चिड़ वाली आँटी के बारे में आप न जाने क्या-क्या सोचते होंगे, लेकिन इस ब्लॉग में आपको चिड़ चिड़ वाली आँटी की मधुरिम विशेषता के अलावा आंखों की देखभाल से संबंधित ढेरों नुस्खे मिल जाएंगे. यह सुदर्शन भाई की अप्रतिम शैली के विशेषज्ञता का प्रतीक है. यह विशेषता उनके लगभग हर ब्लॉग में दिखाई देगी.

ब्लॉग के विशेषज्ञ-
सुदर्शन भाई 21 जुलाई को अपना ब्लॉग पर आए और आते ही अपना ब्लॉग जगत पर छा गए. उनका एक-एक ब्लॉग साहित्यिक तो होता ही है, साथ ही इतना अनुपम, अप्रतिम और नायाब होता है, कि मन से आवाज आती है- ”असली ब्लॉग -लेखन इसी को कहते हैं, रोचक, जानकारी से भरपूर और सार्थक.”
सुदर्शन भाई के कुछ सुपरहिट ब्लॉग्स-
इतना तो कोई सगा भी नहीं करता
ना भूलाई जा सकने वालीं पिताजी की यादें
आकाश और धरा
दूषित किरणें मैली बारिश
अगले जनम मोहे प्रियंका का डॉगी ही कीजो
”रिटर्न गिफ्ट”
”मक़सद”
मैला रिश्ता
गुब्बारा
तीसरा रविवार
आकाश और धरा
दूषित किरणें मैली बारिश
ऐ बादल झूम के चल

दिलखुश जुगलबंदी सुदर्शन भाई नी ही शुरु की थी और दिलखुश जुगलबंदी के बहुत-से अंक सुदर्शन भाई की कलम से सुसज्जित हुए हैं. इसके अलावा
फिर सदाबहार काव्यालय में सुदर्शन खन्ना के ब्लॉग्स हैं-
फिर सदाबहार काव्यालय-1 दरख्त, 7 निःशब्द, 10. क्यों है मांगता?, 13. रक्त कणिका

सुदर्शन भाई की विशेषज्ञता के बारे में बात करते-करते आप यह न समझें, कि हम उनके जन्मदिन के बारे में भूल गए हैं. सुदर्शन भाई, एक बार पुनः आपको जन्मदिन की कोटिशः बधाइयां और शुभकामनाएं.
जन्मदिवस की बधाई हो,
खुशियों की शहनाई हो,
उठे नज़र जिस ओर, जिधर भी,
मस्त बहारें छाई हों.
आज बस इतना ही, शेष बातें कामेंट्स में हमारे पाठक और कामेंटेटर्स की जुबानी.
सुदर्शन भाई का ब्लॉग-
https://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/sudershan-navyug/
जय विजय में सुदर्शन भाई का ब्लॉग-
http://jayvijay.co/author/sudarshankhanna/

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।