भारत में बेरोजगारी के बढते कदम

हाल ही में एक सरकारी संस्था (एन एस एस ओ ) जो देश के चुनिंदा 45 शहरों की बेरोजगारी दर का अध्ययन किया है जिसके परिणामस्वरूप देश के सबसे बडे राज्य उत्तर प्रदेश का प्रयागराज जिला बेरोजगारी के क्षेत्र में टाॅप में 8.8 प्रतिशत एवं मेरठ 8.6 प्रतिशत दूसरे पायदान पर हैं इससे पता चलता है कि हमारे देश में बेरोजगारी की दर पिछले 45 सालों से उच्चतर स्थिति पर है ।
हमारा देश दुनिया की पांचवी सबसे बडी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है जो अपने उत्कृष्ट परिश्रम से पूरी दुनिया के लिये एक सबक या अवसर बन रहा है लेकिन भारत देश को पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के साथ अनेक चुनौतियों का डटकर सामना करना पड सकता है क्योंकि यही वो चुनौती हैं जो भारत देश को तीसरी क्या दुनियां की पहली अर्थव्यवस्था बना सकती है इसलिये हमारी सरकार को देश में किसी भी चुनौती का डटकर सामना करना होगा । हमारा देश आज अनेक संघर्षशील चुनौतियों से गुजर रहा है क्योंकि देश के नागरिकों को उनके जीवन की ज़रूरतों को पूरी करना है और यही जरूरतें जब तक पूरी नहीं की जाती तब तक हमारे देश का मानव संसाधन सुरक्षित नहीं होगा और यही कारण है कि हमारे देश के नागरिक अपनी जरूरतों को पूरी करने के लिये आतंकवाद तथा नक्सलवाद की राह अपनाते है ।
अनेक अर्थशास्त्रियों द्वारा देश की बेरोजगारी समस्या को दूर करने के अनेक प्रयत्न किये जा रहें हैं लेकिन ये समस्या तो और भी विकराल होती जा रही है इसका मतलब सीधे तौर पर यही लगाया जा सकता है कि देश के नागरिकों ने अपने प्रतिमानों तथा मूल्यों को भुला सा दिया है जिसके परिणामस्वरूप आज पूंजीपति तथा गरीबों के बीच एक मजबूत दीवार सी बन गयी है जो दोनों वर्गों को बिल्कुल अलग करती है इसलिये आज पूंजीपतियों के पास इतनी अधिक पूँजी इकट्ठा हो चुकी है कि वे खर्च करने के लिये फिजूल खर्च को बढावा देते है जिसके प्रभाव से बाजार में मंहगाई बढने लगती है और यही मंहगाई गरीबों को बिना पानी के ढकार लेती है तथा एक तरफ गरीबों की संख्या इतनी बढ़ चुकी है कि उन्हें एक वक्त का भोजन तक नशीब नहीँ होता और इसीलिये आज हमारा देश कुपोषण का शिकार है जिसके परिणामस्वरूप देश में बीमारियों का प्रकोप बढता ही जा रहा है जिससे देश का मानव संसाधन कमजोर होता है जो देश की अर्थव्यवस्था के लिये बहुत ही हानिकारक है ।
देश में बेरोजगारी की दर कम करने के अनेक उपाय हैं लेकिन इन उपायों का प्रयोग उचित ढंग से नहीं किया जा रहा है यदि इसीतरह हाथ में हाथ धरे बैठे रहे तो एक दिन हमारे देश को गरीबी निवाला बनाकर सभी वर्गों को नष्ट कर देगी ।
देश में बेरोजगारी बढने के बहुत से कारण हैं लेकिन अगर इन्हीं कारणों का समुचित ढंग से संसोधन करके हल निकाला जाये तो हल जरूर निकल सकता है
पहला , हमारे देश में शिक्षण की व्यवस्था आज इतनी बदहाल हो गयी है जिसके प्रभाव से हमारे देश का युवा कौशलमुक्त हो रहा है बिना शिक्षण प्राप्त किये सिर्फ कागजी डिग्रियों के बल पर रोजगार के लिये गली गली घूमना ये बेरोजगारी थोड़ी न कहलायेगा इसको बेकारी नाम दे सकते है ।
दूसरा , बढती हुयी जनसंख्या जो बेरोजगारी दर को प्रति वर्ग की तरह बढाती है क्योंकि हमारे पास तो संसाधनों की संख्या सीमित है तथा इन संसाधनों पर असीमित लोंगो की जरूरतें नहीं पूरी की जा सकती इसलिये जब तक हम जनसंख्या वृद्धि को सीमित नहीं करेंगे तब तक बेरोजगारी की समस्या बढती ही जायेगी
तीसरा , संविधान के मूल कर्तव्यों का हनन , जी हाँ हमारे पूर्वजों ने जिस संविधान की रचना की है उसमें देश के नागरिकों को ऐसे अधिकार दिये गये हैं जिसके प्रभाव से ऊंच – नीच की दीवार हमेशा के लिये टूट जायेगी और कोई भी वर्ग जन्म नहीं ले सकेगा लेकिन आज ये संविधान सिर्फ लिखी एक किताब बनकर रह गया जो हमे आगे चलने की राह तो दिखाती है लेकिन उस राह पर चलने वाला कोई व्यक्ति ही नहीं है इसलिये हमारे देश में आज भी वही ऊंच – नीच , भेद – भाव , अमीरी – गरीबी आदि की दीवार बनी हुयी है जो देश की सामाजिक तथा आर्थिक व्यवस्था को चोटिल करती हैं और यही कारण है कि हमारे देश में बेरोजगारी की दर बढती ही जा रही है ।
अर्थात जब तक हम सब देश के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा से अपने आप को समर्पित नहीं करेंगे तब तक हमें पूर्ण किसी भी संसाधन पर पूर्ण अधिकार प्राप्त नहीं होगा जिससे कारण व्यक्तियों की आवश्यकताओं की सीमा बढ जायेगी जो बेरोजगारी दर को बढाने में सहायक है ।

परिचय - ओम नारायण कर्णधार

मो. 7490877265 ईमेल - omnarayan774@gmail.com