आगे बढ़ते रहो (जन्मदिन की शुभकामनाएं)

प्रिय पोते आरोह,
जन्मदिन मुबारक हो,
आज 8 जुलाई आपका जन्मदिन है. सबसे पहले आपको Happy birthday.
तुम जियो हजारों साल,
साल के दिन हों पचास हजार,
सोच-समझकर आगे बढ़ते रहो.
जीवन की बगिया में आती रहे बहार.
”चरैवेति चरैवेति” कह रहे वेद करके पुकार
चलते रहो, चलते रहो,
जब तक न पाओ मंजिल का पार,
उस मंजिल के आगे भी कई मंजिलें होंगी,
हर मंजिल दे तुम्हें प्यार अपरम्पार.

मुझे मालूम है आपको कविताएं बहुत अच्छी लगती हैं. मुझे भी कविताएं बहुत अच्छी लगती हैं. कविता की एक विशेष विशेषता है- थोड़े में बहुत कुछ कह देना. इसके अलावा इन्हें याद करना भी सरल और कहीं सुनाना भी सरल. फिर कविता सुनाने का अंदाज सजीला हो, तो सोने पर सुहागा! खूब तालियां भी मिलती हैं और सुनने वालों को भी याद हो जाती हैं. आज हम आपकी और कविता की बात भी करेंगे.

जब आप तीन साल के थे, मैंने आपको एक ऐक्शन-सॉन्ग सिखाया था- ”चिड़िया-चिड़िया उड़ती जा”. ऑस्ट्रेलिया में जन्मे-पले तुम हिंदी तो समझ नहीं पाते थे, लेकिन जो ऐक्शन मैंने आपको सिखाए थे, उससे आप सब समझ गए थे, फिर आपने वैसा ही एक ऐक्शन-सॉन्ग इंग्लिश में बनाया था- ”Butterfly Butterfly fly fly fly”. यह गीत-संगीत-कविता की भाषा ही तो है, जो सबको साथ जोड़े रखती है. अब तो आप हिंदी समझते भी हो और हमसे अच्छी तरह बोलते भी हो. हमने आपके लिए एक कविता लिखी है- मत कहो कि ”कुछ नहीं हो सकता”.
पहले कविता देख लो, फिर हम बताएंगे कि यह कविता हमने आपके लिए यह कविता क्यों लिखी?
क्यों कहते कुछ नहीं हो सकता?
चाहो तो सब कुछ हो सकता,
कोशिश तो करो मन से प्यारो,
मत कहो कि ”कुछ नहीं हो सकता”.

तुम रक्तदान कर सकते हो,
तुम चक्षुदान कर सकते हो,
चिपको आंदोलन फिर से छेड़,
पेड़ों को बचा तुम सकते हो.

नारी अस्मिता का बीड़ा ले,
नारी-रक्षा कर सकते हो,
परिवार में सद्भावना बढ़ा,
उसको मधुरिम कर सकते हो.

क्यों कहते कुछ नहीं हो सकता?
चाहो तो सब कुछ हो सकता,
कोशिश तो करो मन से प्यारो,
ये कहो कि ”सब कुछ हो सकता”.

आशा है, यह कविता आपको अच्छी लगी होगी. अब हम बताते हैं, कि हमने आपके लिए यह कविता क्यों लिखी? अब आप किशोरावस्था में पहुंच चुके हो और अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी समझने लग गए हो, विकास की राह पर अग्रसर हो रहे हो, हमारी शुभकामनाएं है कि ऐसे ही आगे बढ़ते रहो.
हमने देखा-जाना है कि आप हर नया काम सीखने-करने में रुचि रखते हो और किसी काम को मुश्किल नहीं समझते हो. आपने 3 साल की उम्र में जाना कि दादी कविता लिखती है, तो आपने इंग्लिश में कविता-गीत लिखने शुरु कर दिए. किसी का भी जन्मदिन हो, बहुत सुंदर कॉर्ड बनाकर देते हो, जिसमें कविता में बधाई भी होती है. आपने देखा कि पापा वीडियो गेम बनाते हैं, आपने भी बनाया. आपने देखा कि दादी ब्लॉग्स लिखती हैं, तो आपने भी ब्लॉगर बनने की इच्छा जाहिर की यानी किसी काम को मुश्किल नहीं समझते हो.

ब्लॉगर बनना आपके लिए कोई मुश्किल काम नहीं है, क्योंकि उसके लिए आपके पास ज्ञान का भंडार भी है और लेखनी पर पकड़ भी है. ऑस्ट्रेलिया में जन्मे-पले होने के बावजूद आपको भारत से प्यार है. आपको स्कूल में स्पीच देनी थी, आपने महात्मा गांधी पर स्पीच तैयार की. भारत का इतिहास पढ़ते हुए आपको भारत के परतंत्र होने और बड़ी मुश्किल से आजादी मिलने पर आप हम सबसे पूछते हो, कि हमने उसके लिए क्या सहयोग दिया. जब पता लगा, कि दादी-दादू उस समय बहुत छोटे थे, इसलिए कुछ करना संभव नहीं है, तो आप यह सोचकर बहुत खुश हो जाते हो कि दादी ब्लॉग के जरिए देश-समाज की सेवा करने तथा सकारात्मकता का प्रचार-प्रसार करने में जुटी हुई हैं. आपके मन में भी ऐसा करने की भावनाएं-संवेदनाएं पनपी हुई हैं, यह सोचकर हम भी बहुत खुश हैं.

कुछ समय पहले आपने एक ”कम्प्यूटर गेम” बनाकर आगे बढ़ते रहो की राह पर चलकर दिखाया. यह भी बहुत अच्छी बात है, कि आप भाई के साथ अपनी कंपनी चलाते हुए दादी की तरह ब्लॉगर बनना चाहते हो. कुछ समय पहले आपने दादू से इंटरव्यू लेकर उन पर जो सचित्र ब्लॉग लिखा था, उसे स्कूल में पुरस्कृत किया गया था. इसी तरह आगे बढ़ते रहो. एक बार पुनः आपको जन्मदिन की कोटिशः बधाइयां और शुभकामनाएं.
”जन्मदिवस की बधाई हो,
खुशियों की शहनाई हो,
उठे नज़र जिस ओर, जिधर भी,
मस्त बहारें छाई हों.”

प्रिय आरोह,
”Past को भूल जाओ
हमेशा Future की तरफ बढ़ो
Present तुम्हारे लिए Present बने,
सफलता तुम्हारे चरण चूमे,
जीवन में सबसे जरुरी चीज़ ये है कि आप आगे बढ़ते रहो.”
दादी
लीला तिवानी

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।