शायद बेनाम हो

तुम कहाँ हो?
खोये खोये रहते हो
क्या तुम्हारा कोई वजूद है?
या हासिल करना चाहते हो
कुछ नया।
जिंदगी किसकी है
किसके नाम
कब बनती?
कब सुधरती है?
सब पता है तुम्हें
किंतु वैसे ही झल्लाते हो
अपनी ही तानते हो।
वक्त को मुट्ठी में दबाकर
बतियाना चाहते हो
पता नहीं
तुम कौन हो?
शायद बेनाम हो।

परिचय - अशोक बाबू माहौर

जन्म -10 /01 /1985 साहित्य लेखन -हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में संलग्न प्रकाशित साहित्य-विभिन्न पत्रिकाओं जैसे -स्वर्गविभा ,अनहदकृति ,सहित्यकुंज ,हिंदीकुंज ,साहित्य शिल्पी ,पुरवाई ,रचनाकार ,पूर्वाभास,वेबदुनिया आदि पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित I साहित्य सम्मान -इ पत्रिका अनहदकृति की ओर से विशेष मान्यता सम्मान २०१४-१५ से अलंकृति I अभिरुचि -साहित्य लेखन ,किताबें पढ़ना संपर्क-ग्राम-कदमन का पुरा, तहसील-अम्बाह ,जिला-मुरैना (म.प्र.)476111 ईमेल- ashokbabu.mahour@gmail.com 9584414669 ,8802706980