सत्य की जय हो

“सत्य की जय हो”

विनम्रता से सुख को भोगा जा सकता है।
धैर्य से दुख को मात दिया जा सकता है।
अध्ययन करके विद्या अर्जित की जा सकती है।
सम्मान देकर सम्मान पाया जा सकता है।
धन से ऐश्वर्य प्राप्त किया जा सकता है।
क्रोध से खुद को मिटाया जा सकता है।
धीर-गंभीर रहकर विजय प्राप्त की जा सकती है।
संस्कार से कुल की रक्षा की जा सकती है।
भारतीय संस्कृति को गले लगाकर शिखर पर जाया जा सकता है।
धर्म के शरण में जाकर आवागमन से मुक्त हुआ जा सकता है।
वैमनस्व से अशांति तो प्यार से शांति प्राप्त की जा सकती है।
सब कुछ किया जा सकता हैं अगर कुछ नहीं किया जा सकता है तो वह है
सृष्टि की उत्पत्ति व उसके विनाश को रोका नही जा सकता है तथा सत्य को झुठलाया नहीं जा सकता है।
तर्क से अपनी बात को अन्य पर थोप सकते हैं
पर सकून अर्जित नहीं किया जा सकता है।
……सर्वे भवन्तु सुखिनः………!

महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

परिचय - महातम मिश्र

शीर्षक- महातम मिश्रा के मन की आवाज जन्म तारीख- नौ दिसंबर उन्नीस सौ अट्ठावन जन्म भूमी- ग्राम- भरसी, गोरखपुर, उ.प्र. हाल- अहमदाबाद में भारत सरकार में सेवारत हूँ