माॅब लिचिंग के नाम पर लौट आया असहिष्णु गैंग ?

जिस समय देश की संसद आतंकवाद के खिलाफ व आर्थिक तथा सामाजिक भ्रष्टाचारों व अपराधों के खिलाफ कड़े कानूनों पर बहस व उनका पारण शांतिपूर्वक कर रही है, आधा देश भयंकर बाढ़ का सामना कर रहा है तथा भारतीय वैज्ञानिकों ने चंद्रयान 2 का सफल प्रक्षेपण किया है, उस समय एक बार फिर एक सोची समझी साजिश के तहत माॅब लिचिंग व जय श्रीराम के नाम पर महाझूठ के पुलिंदों पर आधारित फर्जी घटनाओं को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी को असहिष्णुता के नाम पर पत्र लिखो अभियान शुरू करके अपनी बेहद विकृत और घटिया मानसिकता का परिचय दिया है। जिन हस्तियों ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है वह ईष्र्या पर आधारित है तथा माॅब लिचिंग जैसी घटनाओं को हारर फिल्में की कहानी की तरह पेश करने का बेहद घृणित प्रयास है। ऐसी हस्तियों ने पीएम नरेंद्र मोदी, भाजपा, संघ व संपूर्ण हिंदू जनमानस ही नहीं, अपितु पूरे विश्व में भारत की छवि को विकृत करने का असफल प्रयास किया है।
इन तथाकथित हस्तियों ने चुनावों के पहले भी समाज में जहर घोलने का प्रयास किया था जिसे देश की महान जनता ने किस प्रकार से नकार दिया है। यह बात इन फर्जी हस्तियों को पसंद नहीं आ रही है। इन तथाकथित हस्तियों को पीएम नरेंद्र मोदी की विजय रहस्य नजर आ रही है। ये लोग अभी अपनी और फजीहत करवाना चाहते हैं। इन लोगों ने बाढ़ पीड़ितों के लिए अभी तक कोई सहायता उपलब्ध करायी है क्या?
लोकसभा चुनावों के पहले फिल्म अभिनेता नसीरूददीन शाह को भारत में काफी भय लग रहा था अब वह माॅब लिचिंग में मारे गये लोगों को सलाम ठोक रहे हैं। इतिहासकार रामचंद्र गुहा पता नहीं कैसे इतिहासकार हैं तथा उनके विचार क्या हैं। अब यह बात साफ हो गयी है कि आज के समय भारत की आधी फिल्मी दुनिया पर दाऊद इब्राहीम गिरोह का पूरा शिकंजा है। आज जो फिल्मी हस्तियां भारत विरोधी व मोदी सरकार विरोधी अभियानों में समय-समय शामिल होती रहती हैं वह सभी दाऊद व नक्सलवादियों के हाथों खिलौना बन चुके है।
जब इन हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा और उसके बाद सोशल मीडिया और टीवी चैनलों में एक बार बहस हो जाने के बाद तृणमूल सांसद नूरजहां ने बहुत ही अधिक शातिराना अंदाज में विषय को आगे बढ़ा दिया है। यह सभी लोग खूब हो हल्ला मचा रहे हैं। लेकिन भारतीय जनमानस का मूड अब काफी बदला-बदला सा है। यह सभी दोहरे चरित्र वाले लोग हैं। आज भी देश में जहां मुस्लिम समाज बहुसंख्यक है, वहां पर हिंदू जनमानस व अन्य जातियों के लोंगों के साथ माॅब लिचिंग की घटनाएं काफी बढ़ रही हैं। किन्तु इन तथाकथित हस्तियों का फर्जी भय एकतरफा है।
सांसद नूरजहां नें जिस प्रकार से सोशल मीडिया पर हंगामा बरपाने का प्रयास किया, उसके बाद वह पूरी तरह से बेनकाब हो चुकी हैं। सांसद नूरजहां ने शपथ ग्रहण के समय बिंदी लगायी और सिंदूर भी लगाया तथा जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ आरती उतारकर अपने आपको देश की जनता के बीच में धर्मनिरपेक्षता की सबसे बड़ी झंडाबरदार घोषित करने का असफल प्रयास किया था। सबसे बड़ी ध्यान देने की बात यह है कि जिस दिन उन्होंने माॅब लिचिंग का विषय आगे बढ़ाने का प्रयास किया था, उस दिन उनके माथे पर बिंदी और सिंदूर गायब हो चुका था। अब वह धर्मनिरपेक्ष नेता नहीं अपितु एक दल की सांसद व अपने नेता का एजेंडा ही आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही थी।
इन सभी तथाकथित हस्तियों को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए कि अब भारत में धर्मनिरेक्षता का एकतरफा ढोंग नहीं चलने वाला। भगवान श्रीराम संपूर्ण भारतीय समाज के आस्था पुरूष ही नहीं अपितु हमारे रोम रोम में व हिंदू जनमानस के दिलों में जगह बसाने वाले आराध्य हैं। अगर भारत में जय श्रीराम का नारा नहीं लगेगा तो और कहां लगाया जा सकता है यह बात इन तथाकथित हस्तियों को बतानी ही होगी। अभी तक देशभर में माॅब लिचिंग की एक भी घटना सही नहीं साबित हुई है। यह इन दलों व हस्तियों का फर्जी एजेंडा देश में चलाया जा रहा है। भगवान श्रीराम भारतीय संस्कृति की अदभुत अद्वितीय सनातन परम्परा के प्रतीक है। यह लोग जिस प्रकार से जयश्रीराम के नारे के प्रति असहिष्णुता का भाव प्रकट कर रहे हैं वह भारत की सनातन परम्परा के खिलाफ गहरी साजिश रच रहे हैं। ये उन्मादी लोग हंै तथा इन लोगों को देश में शांति के साथ विकास यात्रा पसंद नहीं आ रही है। लेकिन अब ये आंसू बहाने वाले लोग अपनी विकृत साजिशों में सफल नहीं होंगे। ये लोग पत्र में लिखते हैं कि सरकार की आलोचना करना देशद्रोह की श्रेणी में नहीं आता तथा इन तथाकथित हस्तियों की मांग है कि उन्हें अर्बन नक्सल कहकर न बुलाया जाये। पर क्यों ?
यह पत्र इन लोगों ने उसी दिन क्यों सार्वजनिक किया, जिस दिन लोकसभा में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) में संशोधनों पर सदन में चर्चा हो रही थी। लोकसभा में बहस के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया है कि अब शहरी नक्सलियों के लिए सरकार के दिल में कोई दया नहीं है। यूएपीए में संशोधनों को सही ठहराते हुए उन्हाने कहा कि जांच एजेंसियों को आतंकियों से चार कदम आगे रखने और आतंकवाद का खात्मा करने के लिए कड़े कानूनी कदम उठाने जरूरी हैं। यह कानून पूरी तरह से लागू हो जाने के बाद ऐसे तथाकथित फर्जी असहिष्णु पत्र लेखकों के दिन अब देश में उठने वाले हैं।
सरकार ने संसद में इस विषय पर विपक्ष को आंकड़ों के साथ आईना भी दिखाया है। गृह राज्यमंत्री ने आंकड़ों के साथ बोलते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं की कोई एक प्रकृति नहीं है। यह सभी राज्यों में अलग-अलग तरीके से देखने को मिलती है। माॅब लिचिंग जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनायें हर विचारधारा वाली सरकारों के कार्यकाल में घटित हुई हैं।
बंगाल के भाजपा नेता सायंतन बसु का यह बयान बिलकुल सही है जिसमें उन्होंने कहा है कि इनमें से अधिकांश बुद्धिजीवी ममता बनर्जी के गुलाम हैं। उन्होंने भी सवाल किया कि जब बंगाल में जय श्रीराम कहने पर लोगों को मारा जाता है तब ये लोग पत्र क्यों नहीं लिखते?
उप्र में आज भी कई जगह मुस्लिम समाज की ओर से हिंदू जनमानस के खिलाफ कई प्रकार से माॅब लिचिंग हो रही है। मेरठ, बरेली, बिजनौर ही नहीं समूचा पश्चिमी उप्र मुसलमानों की माब लिचिंग से घबराया हुआ है। आज माॅब लिचिंग के ही कारण अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण नहीं हो पा रहा है। अब समय आ गया है कि जिन लोगों के दिलो दिमाग में असहिष्णुता का वातावरण जाग उठता है उनके खिलाफ अशांति फैलाने के लिए कड़ी कार्रवाईयां की जायें। इन तत्वों की वजह से देश का माहौल खराब हो रहा है।
— मृत्युंजय दीक्षित