कविता

पापा मुझको मारना मत

पापा मुझको मारना मत
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भरा हुआ है अपना आँगन, बारिस के पानी से,
नाव बनाया कागज की, फाड़ के अपनी कापी से।
डूब गये हैं कई अभी तक, मगर बनाये जाता हूँ,
आधा पेज हुआ है गायब, पापा अपनी कापी से।।

डर लगता है बहुत आपसे, आप बहुत मारेंगे,
आया गुस्सा अगर आपको, रौद्र रूप धारेंगे।
पर मस्ती के पल में मैंने, नाव बनायी चाहत से,
आज हमें जो छोड़ दिया तो, कापी कभी ना फरेंगे।।

हाँथ जोड़कर विनती करता, पापा मुझको मारना मत,
कान पकड़ कर बैठक करता, पापा मुझको मारना मत।
रोका था मैंने खुद को पर, जाने क्यों ना रोक सका,
शापथ पुनः ना फाड़ेंगे, पापा मुझको मारना मत।।

।।प्रदीप कुमार तिवारी।।
करौंदीकला, सुलतानपुर
7978869045

परिचय - प्रदीप कुमार तिवारी

नाम - प्रदीप कुमार तिवारी। पिता का नाम - श्री दिनेश कुमार तिवारी। माता का नाम - श्रीमती आशा देवी। शिक्षा - संस्कृत से एम ए। जन्म स्थान - दलापुर, इलाहाबाद, उत्तर-प्रदेश। मूल निवासी - करौंदी कला, शुकुलपुर, कादीपुर, सुलतानपुर, उत्तर-प्रदेश। इलाहाबाद मे जन्म हुआ, प्रारम्भिक जीवन नानी के साथ बीता, दसवीं से अपने घर करौंदी कला आ गया, पण्डित श्रीपति मिश्रा महाविद्यालय से स्नातक और संत तुलसीदास महाविद्यालय बरवारीपुर से स्नत्कोतर की शिक्षा प्राप्त की, बचपन से ही साहित्य के प्रति विशेष लगव रहा है। समाज के सभी पहलू पर लिखने की बराबर कोशिस की है। पर देश प्रेम मेरा प्रिय विषय है मैं बेधड़क अपने विचार व्यक्त करता हूं- *शब्द संचयन मेरा पीड़ादायक होगा, पर सुनो सत्य का ही परिचायक होगा।।* और भ्रष्टाचार पर भी अपने विचार साझा करता हूं- *मैं शब्दों से अंगार उड़ाने निकला हूं, जन जन में एहसास जगाने निकला हूं। लूटने वालों को हम उठा-उठा कर पटकें, कर सकते सब ऐसा विश्वास जगाने निकला हूं।।*

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