गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दरिया में उतर आए मियां जुल्म के डर से । पानी न गुज़र जाए कहीं आपके सर से ।। लगता है मेरे गांव में जुमलों का असर है ।। भटके मिले कुछ लोग शराफ़त की डगर से ।। कातिल हुई है भीड़ यहां मुद्दतों के बाद । निकलो न अकेले ही कहीं रात में घर […]

पर्यावरण लेख सामाजिक

जल प्रलयः बाढ़ से कराहता हिंदुस्तान

भारत में एक बार फिर से जलप्रलय ने अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है और उफनते नदियों के जल से उत्पन्न हुए बाढ़ ने असम, बिहार समेत समूचे पूर्वोत्‍तर को अपनी चपेट में ले लिया है। बाढ़ की मार से लोगों का जीना दुश्ववार हो गया है। प्राप्त खबरों के मुताबिक असम में अबतक […]

कविता

राख हथेली पर

क्यों? राख हथेली पर रखूँ सवाल करूँ  हल्के फुल्के उलझे अपनों से,  अभी राख चंद मिनटों में  उड़ जायेगी  या घुल जायेगी  पानी में शराफत भरी बातें  छोड़ विलुप्त हो जायेगी  यूँही  खामोश,  मुझे उलझाकर  शायद आज या अभी अभी। 

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ऋषि दयानन्द ने सभी सुखों का त्याग कर वेदप्रचार क्यों किया?

ओ३म् ऋषि दयानन्द ने 10 अप्रैल, सन् 1875 को मुम्बई में आर्यसमाज की स्थापना की और इसके द्वारा संगठित रूप से वेद प्रचार किया। 30 अक्टूबर, सन् 1883 को दीपावली के दिन उन्होंने अपने जीवन की अन्तिम सांस ली थी। उनकी मृत्यु का कारण उनके पाचक व कुछ लोगों के षडयन्त्र द्वारा उनको मृत्यु से […]

कहानी

स्ट्रीट चिल्ड्रन

स्ट्रीट चिल्ड्रन ‘देखा, उसके हाथ में कितना सुन्दर गिलास है’ बातुल ने गंजू से उस गिलास से कोई पेय पदार्थ पीते हुए अमीर से दिखने वाले लड़के की तरफ टुकुर-टुकुर देखते हुए कहा। बातुल और गंजू सड़क के बच्चे थे जिन्हें अंग्रेजी में स्ट्रीट चिल्ड्रन कहा जाता है और अंग्रेजी का यह शब्द ‘चिल्ड्रन’ संभवतः ऐसा […]

भजन/भावगीत

वाणी वंदना

करूँ वंदना मैं, मातु तुम्हारी…. शरण पड़ी हूँ रख लाज हमारी… करूँ वंदना मैं…………………. न है ज्ञान माता,झोली खाली हमारी ज्ञान दे दो माता, भरो झोली हमारी तुम्हारे अलावा न कोई है मेरा तू जो कृपा कर दे तो बदले किस्मत हमारी करूँ वन्दना मैं मातु तुम्हारी शरण में पड़ी हूँ रख लाज हमारी। भंवर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल-मैं अंबर में हूँ

कहने को तो घर में हूँ. पर दिन-रात सफ़र में हूँ. मेरी नज़र में वो न सही, पर मैं उसकी नज़र में हूँ. तू है जोड़ – घटाने में, मुझको देख, सिफ़र में हूँ. काम ग़लत से जब तू डरे, मैं तेरे उस डर में हूँ. मन की आँखें खोल ज़रा, मैं हर एक बशर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

वो दर्द देने में भी करते हैं किफायत अब तो जान लेकर ही वो करते हैं रियायत अब तो। बड़ी मुश्किल से संभाला है मैंने दिल को धड़कने कर रही थीं मुझसे बगावत अब तो। कहो कब तक ना पलकों से अश्क गिरने दूं हमसे होती नहीं अश्कों की हिफ़ाज़त अब तो। इश्क करती है […]

समाचार

‘मनहर ठहाका पुरस्कार 2019’ हास्य सम्राट डॉ. सुरेंद्र यादवेंद्र को

मुम्बई ।  महानगर की साहित्यिक,सामाजिक एवं सास्कृतिक संस्था ‘साहित्य संगम’ द्वारा प्रति वर्ष दिया जाने वाला राष्ट्रीय स्तर का ‘मनहर ठहाका पुरस्कार’ इस वर्ष सुप्रसिद्ध हास्य व व्यंग्य कवि हास्य सम्राट डॉ.सुरेंद्र यादवेंद्र को प्रदान किया जाएगा । यह घोषणा संस्था के अध्यक्ष श्री रामस्वरूप गाडिया ने की । संस्था के कार्याध्यक्ष श्री जेपी खेमका […]

कविता

उमस

पसीना झर रहा झरने की तरह जिस्म तर, कपड़े हैं तर दिन को मक्खियां और रात को मच्छर कैसे सहें इस उमस का कहर ? अमीरों ने लगाईं एसियां घरों में लेते मजे गर्मी में सर्दी का पूछो रामू से, श्यामू से कैसे गुजरती हैं रातें उमस भरीं ? खड़ा था धनुआ मालिक के पास […]