सामाजिक

चमत्कार है तो नमस्कार है…

डयूटी के दौरान लोगों के प्रिय – अप्रिय सवालों से सामना तो अमूमन रोज ही होता है। लेकिन उस रोज आंदोलन पर बैठे हताश – निराश लोगों ने कुछ ऐसे अप्रिय सवाल उठाए , जिसे सुन कर मैं बिल्कुल निरूत्तर सा हो  गया। जबकि आंदोलन व सवाल करने वाले न तो पेशेवर राजनेता थे और […]

कविता

धीर वीर

समय कापुरुषों का साथ कभी नहीं देता. वे तमाम उम्र बस रोते और पछताते हैं. धीर वीर बस जब तब दावे नहीं करते. वे अपनी करनी से इतिहास मोड़ जाते हैं. वीरों को कभी अंजाम डरा नहीं पाया. उन्हें कभी दूसरों की फिक्र ने नहीं सहमाया. वो करते हैं हमेशा अपने दिल की. इसी नाते […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

आधुनिक संसार शिक्षित होकर भी कर्म-फल विधान से अपरिचित है

ओ३म् वर्तमान युग में ज्ञान व विज्ञान विकास एवं उन्नति के शिखर पर कहे जाते हैं। यह बात भौतिक विद्याओं पर ही लागू कही जा सकती है। विज्ञान की इस उन्नति में मनुष्य को आध्यात्मिक ज्ञान से विमुख व दूर किया है। मनुष्य संसार में उत्पन्न होते हैं व अपनी अपनी बड़ी व छोटी आयु […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ऋषि दयानन्द और दीपावली पर्व

ओ३म् वेद मनुष्यों को ज्ञानी बनकर देश व समान को ज्ञान से लाभान्वित करने की प्रेरणा देने के साथ उसकी अन्याय व शोषण आदि से रक्षा करने तथा अन्नादि पदार्थों के देश में अभावों को दूर करने के लिये किसी एक कार्य को चुनने व करने की प्रेरणा देने हैं। कृषि व वाणिज्य आदि कार्यों […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ईश्वर सृष्टि की रचना व संचालन क्यों व किसके लिए करता है?

ओ३म् मनुष्य, आस्तिक हो या नास्तिक, बचपन से ही उसके मन में सृष्टि व इसके विशाल भव्य स्वरूप को देखकर अनेक प्रश्न व शंकायें होती हैं। इसका रचयिता कौन है और उसने किस उद्देश्य से इसकी रचना की है? इसका उत्तर या तो मिलता नहीं है और यदि मिलता भी है तो प्रायः यह होता […]

कविता

सूखा पत्ता

देखकर सूखे पत्ते की सूखी उभरी नसों को याद आ गई बूढ़ी माँ छोड़ आया था जिसे नितांत अकेला सूने से कोने में कट कर जड़ों से आ बसा माया के लोभ में विधर्मी देश में। सूख कर पेड़ से गिरा ये मुरझाया पीत पत्र कितने दिन बच पायेगा। कुचल कर पैरों तले मसल जायेगा […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – किसी की सुनना नहीं

मुँह का काम कुछ ज़्यादा ही बढ़ गया लगता है। जब यह शुरू हो जाता है तो  किसी की सुनना उसके सिद्धान्तों के विरुद्ध है। अब क्या किया जाए कि ब्रह्मा जी से इसे बनाने में भूल हो गई कि इसके अंदर कान नहीं बनाए। कानों की स्थापना  मुँह से आठ अंगुल ऊपर  कर दी, […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – मोहब्बत बड़ी ‘फालतू’ चीज है

सन् 1978 में फिल्म आई थी ‘त्रिशूल’ जिस पर साहिर लुधियानवी साब द्वारा लिखा हुआ एवं लता जी किशोर कुमार जी के युगल स्वर में गाया हुआ एक गीत ‘मोहब्बत बड़े काम की चीज है’ काफी लोकप्रिय हुआ था। शायद…!ऐसा संभव रहा होगा कि उन दशकों में मोहब्बत बड़े काम की चीज रही होगी तभी […]

लघुकथा

सर्पदंश

”ये मुझे क्या होता जा रहा है? छः साल हो गए, अन्न का एक दाना तक नहीं चखा, पाइप से ही लिक्विड डाइट ले रही हूं, काम पर भी आ रही हूं, फिर भी दिन-ब-दिन मोटी होती जा रही हूं.” फुड पाइप कैंसर से पीड़ित हरप्रीत को लगा वह खुद से ही बात कर रही थी. […]

कविता

दिलखुश जुगलबंदी- 20

बस आज में जीना है! चाँद शरमा जाता था और सितारे रंग बदलते थे मयखाने जाने से पहले ही कदम बहक-बहक जाते थे फोन के रिश्ते भी अजीब होते हैं, बेलैंस रखकर भी लोग गरीब होते हैं, खुद तो मेसेज करते नहीं, मुफ्त के मेसेज पढ़ने के, कितने शौक़ीन होते हैं, रिमझिम तो है पर […]