Monthly Archives: August 2019


  • धीर वीर

    धीर वीर

    समय कापुरुषों का साथ कभी नहीं देता. वे तमाम उम्र बस रोते और पछताते हैं. धीर वीर बस जब तब दावे नहीं करते. वे अपनी करनी से इतिहास मोड़ जाते हैं. वीरों को कभी अंजाम डरा...




  • सूखा पत्ता

    सूखा पत्ता

    देखकर सूखे पत्ते की सूखी उभरी नसों को याद आ गई बूढ़ी माँ छोड़ आया था जिसे नितांत अकेला सूने से कोने में कट कर जड़ों से आ बसा माया के लोभ में विधर्मी देश में।...



  • सर्पदंश

    सर्पदंश

    ”ये मुझे क्या होता जा रहा है? छः साल हो गए, अन्न का एक दाना तक नहीं चखा, पाइप से ही लिक्विड डाइट ले रही हूं, काम पर भी आ रही हूं, फिर भी दिन-ब-दिन मोटी होती...

  • दिलखुश जुगलबंदी- 20

    दिलखुश जुगलबंदी- 20

    बस आज में जीना है! चाँद शरमा जाता था और सितारे रंग बदलते थे मयखाने जाने से पहले ही कदम बहक-बहक जाते थे फोन के रिश्ते भी अजीब होते हैं, बेलैंस रखकर भी लोग गरीब होते...