राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत शोधपत्र-सार

शिक्षा में कविता के साथ मेरे प्रयोग

राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत शोध-सार
संस्कृत के आचार्योंने काव्य या साहित्य के प्रयोजनों पर प्रकाश डालते हुए लिखा है-
‘काव्यम यशेर्थ कृते व्यवहारविदे शिवेत रक्षतये,
सद्यः परिनिर्वृते कांतः सम्मितयोपदेशयुजे. (काव्य प्रकाश)

अर्थात् काव्य यश की प्राप्ति, संपत्ति लाभ, सामाजिक व्यवहार आदि की प्राप्ति और अशिव तत्त्वों से शिव तत्त्वों की रक्षा करना है. काव्य या साहित्य की सृजन प्रक्रिया में प्रवृत होने पर कवि या साहित्यकार को अपनी मौलिक प्रतिभा या तज्जन्य भावना के कारण सहृदयों से यश की प्राप्ति होती है. छात्राओं को कविता का रसास्वादन करवाने व उन्हें सृजन प्रक्रिया में प्रवृत करने के प्रयास का यही मूलभूत कारण है, ताकि छात्राएं आनंद-प्राप्ति के साथ-साथ यश, अर्थ-, सद्व्यवहार आदि प्राप्त कर सकें.

अनुभूति प्रवणता, गुनगुनाना और सहसा गा उठना मानव का स्वभाव है. अनुभूतियां जन्मजात होती हैं और विभिन्न प्रकार की कोमलकांत, मधुरिम अनुभूतियां स्वर-लय में बद्ध होकर संयत अभिव्यक्ति गीत या कविता का रूप ले लेती ऐं. छात्राओं की सुषुप्त अनुभूतियों को स्वर देकर आनंद-प्राप्ति के साथ समाजोपयोगी रचनाओं का सृजन भी मेरे प्रयोग के लक्ष्यों में से एक है.

मेरे प्रयोग के विशेष लक्ष्य इस प्रकार हैं कविता द्वारा-
कविता द्वारा काव्यात्मक अभिव्यक्ति की शिक्षा
अपना दीपक आप बनना है
“कभी किसी पर आश्रित होकर,
किसने यश है पाया?
अपने पर विश्वास करे जो,
उसने ही संबल पाया॥”

सूत्रों द्वारा हिंदी-शिक्षण-
अर्थालंकार
“अर्थ में हो सौंदर्य जहां पर,
रचना का सौष्ठव निखरे।
उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा आदि,
अर्थालंकार मोती बनकर निखरे॥”

कविता द्वारा हिंदी के महत्त्व की शिक्षा
“सूर, कबीरा, तुलसी, मीरा.
हिंद की बगिया के माली।
प्रेमचंद और पंत, निराला,
लेखक थे गौरवशाली॥
महादेवी के रूप में हिंदी,
भाषा का वरदान है।
जय हिंदी, जय हिंदी बोलो
हिंदी भाषा महान है॥”

शिक्षा कैसी हो?
शिक्षण-क्रांति
“नई-नई विधियां अपनाकर,
पाठ को रोचक बनाना है।
खुद करके देखो-समझो की,
उनको राह दिखाना है॥”

कविता द्वारा संस्कृति-शिक्षा
“जनसंख्या रफ़्तार देखकर,
कांप रहा अपना मन है।
साक्षरता कैसे आएगी?
दीन-हीन जन-जीवन है॥”

साक्षरता-शिक्षा
कविता द्वारा साक्षरता-शिक्षा
“जिनको अवसर मिला नहीं है,आओ उन्हें पढ़ाएं।
पढ़े-लिखे तो बढ़ जाएंगे,आओ उन्हें पढ़ाएं॥
साक्षरता महका सकती जीवन, साक्षरता है सबकी आस।
हम सब मिलकर महाकाएंगे, साक्षरता-मधुमास॥”

जनसंख्या-शिक्षा
कविता द्वारा जनसंख्या-शिक्षा
“छोटा-सा परिवार हो,
सुखों का आधार हो।
देश बढ़ेगा आगे तब ही,
खुशियों का आगार हो॥”

राष्ट्रीय एकता-शिक्षा
वृक्ष व वन संरक्षण-शिक्षा
कविता द्वारा वृक्ष व वन-संरक्षण शिक्षा
“हम सब नन्हें बाच्चे मिलकर, वृक्ष उगाते जाएंगे,
वन महोत्सव आज मनाकर, वृक्ष की महिमा गाएंगे।

वन हों ज़िंदाबाद के केवल, नारे नहीं लगाएंगे,
कैसे होगी वन की रक्षा, यह करके दिखलाएंगे॥”
तथा
”परोपकार की सुरम्य-सरिता,
वृक्ष हैं आकाश से उतरी हुई, जीवंत कविता॥”

कविता द्वारा सद्गुण शिक्षा
“जगालो अपने में विश्वास।
बनालो जीवन को मधुमास॥”
तथा
सद्भावना जीवन सार बने।
हर मानव का शृंगार बने॥
एवं
“हम गगन की लालिमा से, प्यार ही सीखें सदा,
हम घटा की कालिमा, उपकार की समझें अदा।
रंग हो कोई प्रभु हमें, रंग अपना दीजिए,
दीजिए सद्बुद्धि हमको नाम की धुन दीजिए।
हे प्रभु हम बालकों की प्रार्थना सुन लीजिए॥”

कविता द्वारा समसामयिक समस्याओं के समाधान शिक्षा
“दुर्घटना से देर भली,
राह देखते फूल-कली।
सावधान ऐ वाहन चालक,
सावधानी से बला टली,”

सफलता के सुमन
“सफलता के सुमन चुनें हम,
ह्रदय-सुमन को विकसित कर लें।
इन सुमनों की मधुर स्मृति से,
अपना जीवन सुरभित कर लें॥”

व्यावसायिक-शिक्षा
नारी-महत्ता की शिक्षा
शिक्षक की महिमा की शिक्षा
कविता द्वारा शिक्षक-महिमा शिक्षा
“शिक्षक वह है, जो शिक्षा का आगार हो,
जो, छात्रों को, जीवन रूपी नौका को,
भली-भांति खेना सिखा सके,
उनका जीवन सफल बना सके।

कविता द्वारा विज्ञान-शिक्षा
“विज्ञान हमारा पूरक है, विज्ञान हमारा प्रेरक है,
विज्ञान हमारा रक्षक है, विज्ञान हमारा सेवक है।

विविध समाजोपयोगी विषयों की शिक्षा

इन लक्ष्यों की प्राप्ति में हमारी छात्राओं की लेखनी का जादू तो एक सशक्त प्रमाण है ही, साथ ही इस बात का भी गर्व है कि मेरी कविताओं में मुखरित स्वर ‘लड़का-लड़की एक समान’ से छात्राओं में पर्याप्त जागरुकता व सचेतनता का संचरण हुआ है. वे केवल लड़के की ही नहीं लड़की की भी पहली लोहड़ी मनाने की परंपरा को प्रश्रय देना चाहती हैं. दहेज प्रथा की विकरालता को समाप्त करने की छटपटाहट उनमें देखी जा सकती हैं. रुपहले पर्दे की अश्लीलता को समाप्त करने की कुलबुलाहट उनमें परिलक्षित होती है, ताकि वे अभिहावकों के साथ बैठकर सिनेमा व दूरदर्शन का आनंद ले सकें.

भावनात्मक एकता एवं समन्वय-साधना भारतीय सभ्यता-संस्कृति की अनादि काल काल से ही मूल चेतना रही है. साहित्य में आरंभ से ही अपने कलेवर के निर्माण में इन चेतनाओं को प्रश्रय दिया है. कविता के माध्यम से भावनात्मक एकता एवं समन्वय-साधना का मेरा प्रयास रहा है.

प्रेम आनव-मन की निर्मल, कोमल व अमर भावना है. प्रेम की मधुरिम भावना जब देश-प्रेम का पावन रूप ले लेती है, तो वह उत्कृष्टता की चरम सीमा का स्पर्श कर लेती है. कविता-प्रक्रिया द्वारा यह उद्देश्य प्राप्त करने को मैं सदैव आतुर रही हूं.
कविता द्वारा देशप्रेम-शिक्षा
“आज एकता की चाहत ने,
हम सबको ललकारा है।
एक साथ सब मिलकर बोलो,
भारत देश हमारा है॥”

तथा

”जहां प्रेम हो, स्नेह-दया हो,
वहीं मुझे तुम पाओगे।
सत्य-अहिंसा का दीपक ले,
खुद भारत बन जाओगे॥”

देश-भक्ति के साथ छात्राओं में प्रभुभक्ति, साधना, उपासना का बीज प्रस्फुटित करने को मैं सतत प्रयत्नशील हूं.

शिक्षा की पूर्णता के लिए छात्राओं में अनुशासन, स्वच्छता आदि सद्गुणों का समावेश अनिवार्य है. कविता के सशक्त एवं सुरीले माध्यम द्वारा यह संभव करने का मेरा प्रयास जारी है. साक्षरता के लगभग सवा सौ गीत व कविताओं ने छात्राओं को साक्षरता शिक्षा देने को प्रेरित किया है.

अत्यंत सहज रूप से निःसृत मेरी व छात्राओं की कविताएं मेरी प्रेरणा भी हैं और प्रयोग भी.
हमने अपने इस शोध का शीर्ष रखा था-
‘शिक्षा में कविता के साथ मेरे प्रयोग’
गांधीजी ने अपनी आत्मकथा में ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ किये थे, हमने शिक्षा में कविता के साथ प्रयोग किये.

अंत में सफलता के कुछ सुमन
“सफलता के सुमन चुनें हम,
ह्रदय-सुमन को विकसित कर लें।
इन सुमनों की मधुर स्मृति से,
अपना जीवन सुरभित कर लें॥”

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।