कविता

सुंदर पावन धरा भारती

भारत माँ की करो आरती ।
सुंदर पावन धरा भारती ।।
प्राची में फैले जब कुंकुम ।
शीश नवाये दिनकर हरदम ।
सुबह यहां की बड़ी निराली,
अँगना नवरस से बुहारती ।
सुंदर पावन धरा भारती  ।।
खड़ा हिमालय,जीवट प्रहरी ।
नदियाँ जिनमें ,ममता गहरी ।
सुरसरिता सी पावन नदिया,
भवउदधि से पार उतारती ।
सुंदर पावन धरा भारती  ।।
मधुमासों में मस्त धरा हो
लगती है जैसे अप्सरा हो
लरजती है आम की डाली
कोयलिया जब है पुकारती
सुंदर पावन धरा भारती ।।
अभिनन्दन करते हैं भँवरे ।
तितलियों के पर हैं  सुनहरे ।
स्वच्छ सुगन्धित वायु बहती,
स्वर्ग धरा पर है उतारती ।
सुंदर पावन धरा भारती ।।
संस्कृतियाँ मलयानिल चन्दन ।
भाषाएँ भी यहाँ हैं अनगिन ।
हर घर है एक तीर्थ यहां पर,
प्रेम से सबको है पालती ।
सुंदर पावन धरा भारती ।।
— रागिनी स्वर्णकार (शर्मा)

परिचय - रागिनी स्वर्णकार (शर्मा)

1- रचनाकार का पूरा नाम- श्रीमती रागिनी स्वर्णकार (शर्मा) 2- पिता का नाम-श्री पूरन चंद सोनी 3- माता का नाम -श्रीमती पार्वती 4- पति / पत्नी का नाम- श्री अरुण शर्मा 5- वर्तमान/स्थायी पता -डायमंड रेजीडेंसी, a सेक्टर सिलिकॉन सिटी राऊ ,इंदौर ,जिला-इंदौर मध्यप्रदेश 6- फोन नं/वाट्स एप नं. - 9754835741 7- जन्म / जन्म स्थान-बेगमगंज ,जिला- रायसेन जन्मतिथि 01,/05/1970 8- शिक्षा /व्यवसाय- बी.एस-सी.,एम .ए.(हिंदी,इंग्लिश) एम.एड. 9- प्रकाशित रचनाओं की संख्या-- 300 रचनाएँ प्रकाशित 10- प्रकाशित रचनाओं का विवरण । (लगभग 300 रचनाएँ समाचार पत्र ,संचार एक्सप्रेस ,निशात टाईम्स ,रीडर एक्सप्रेस भोपाल, लोकजंग भोपाल,दैनिक भास्कर भोपाल,देशबन्धु भोपाल ,से प्रकाशित हो चुकी हैं ) संकल्प शालेय पत्रिका का 7 वर्ष से सम्पादन

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