बाल गीत: आपके-हमारे- 1

1.आज के बच्चे कल के नेता
आज के बच्चे कल के नेता, आगे बढ़ते जाएंगे
देश की सेवा करने हेतु, मिलकर कदम बढ़ाएंगे-

मत समझो हम नन्हे बालक, हम हैं जलती चिनगारी
हम ही गगन गुंजा सकते हैं, आज जो भरते किलकारी
दे दो हमको लक्ष्य कठिन भी, जीत के हम दिखलाएंगे
देश की सेवा करने हेतु, मिलकर कदम बढ़ाएंगे-

नए-नए उद्योग चलाकर, बनें देश के हितकारी
कल-पुर्जों से बन जाएगी, एक अनोखी फुलवारी
हम हैं इसके फूल शूल से, टकराकर दिखलाएंगे
देश की सेवा करने हेतु, मिलकर कदम बढ़ाएंगे-

मेहनत से जो मिल पाई है, वह आजादी अमर रहे
गांधी-गौतम जैसे हमको, राह दिखाते सदा रहें
इनके पद-चिह्नों पर चलकर, देश का मान बढ़ाएंगे
देश की सेवा करने हेतु, मिलकर कदम बढ़ाएंगे-
लीला तिवानी

 

2.बात पते की ( बाल कविता )

चुन-चुन करती आई चिड़िया,
काम की बात बतायी चिड़िया,
बात पते की आज सुनाऊँ,
चुन्नू ,मुन्नू सुन लो गुड़िया.

रोज सवेरे उठ जाती हूँ,
देर रात तक कभी न जगती,
काम सभी मैं अपने करती,
नहीं कभी भी मैं हूँ थकती.

तुम भी बच्चों जल्दी सोना,
बुरी आदतों में मत खोना,
सुबह-सवेरे जल्दी उठना,
दाँत माँज कर मुँह को धोना.

सही समय स्कूल में जाकर,
ध्यान लगाकर बच्चो पढ़ना,
खेल-कूद भी बहुत जरुरी,
इसमें भी तुम आगे रहना.

किस्से, कविता और कहानी,
बड़े ध्यान से इनको पढ़ना,
सबक बहुत होते हैं इनमें,
ग्रहण करो, जीवन में बढ़ना.

कंप्यूटर पर गेम न खेलो,
जा पहुँचो मैदान के अंदर,
यही तो प्यारे दिन अच्छे हैं,
चपल रहो जैसे हों बंदर.

गुल्ली-डंडा, खो-खो खेलो
या फिर जी भर खेलो लंगड़ी,
हू तू तू खेल निराला,
या फिर खेलो पकड़ा-पकड़ी.

आपस में मिल-जुलकर खेलो,
बड़े प्रेम से सबसे रहना,
सबक प्रेम का याद है रखना,
होकर बड़ा यही तुम कहना.

प्रेम प्यार के पाठ के संग तुम
भाईचारा भी पढ़ लेना,
आनद की बगिया नित महके,
ऐसा ही इस देश को गढ़ना.

बहुत हुए उपदेश अब,
अच्छा घर को मैं जाती हूँ,
मानो या फिर ना तुम मानो,
बात पते की कह जाती हूँ.
राजकुमार कांदु

 

3.राखी पूनम का पावन पर्व

मनवा मेरा, मेरे भैया,
हर्षाया, इठलाया, इतराया,
राखी पूनम का,
पर्व पावन यह आया.
जैसे सीप में मोती सजा हो,
दिल में मेरे स्नेह-ज्योति,
खट्टी-मीठी यादों में,
जैसे बचपन लौट आया.
भाईबहन का रिश्ता,
कितना है निराला।,
निर्मल, निश्छल, अविरल,
बहती नेह-धारा.
रोली-चन्दन-कुमकुम-राखी,
मंगलकामनायें ले चली,
प्यार-दुलार आशीषों की,
मन में सरिता है बह चली.
विश्वास और स्नेह का,
रिश्ता यह सदा बना रहे,
फले-फूले, खुश रहे,
मन में यही शुभभावना.
चंचल जैन

 

4.जन्मदिन की बहार
जन्मदिन की बहार है, जन्मदिन की बहार का क्या कहना!
मिलती हैं जो आशीषें, उन आशीषों का क्या कहना!
उपहार भी ढेरों मिलते हैं, उन उपहारों का क्या कहना!
छोटों से प्रेम जो मिलता है, उस निश्छल प्रेम का क्या कहना!
मेरे मन की यह इच्छा है, साल में दो बार तो जन्मदिन आ जाए,
मुझको भी हर्षाए मेरे मित्रों को भी हर्षाए,
यह दिन मेरे लिए ख़ास होता है, मैं सबके लिए ख़ास होता हूं,
यह ख़ास होना तो ही तो ख़ास है, जन्मदिन की बहार का क्या कहना!
लीला तिवानी

पुनश्च-
बाल गीत: आपके-हमारे का अगला अंक जन्माष्टमी के दिन आएगा.

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आप सबको स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं. आज ई हमारे दोहते मेहुल का जन्मदिन भी है, मेहुल को भी जन्मदिन की हार्दिक बधाइयां और शुभकामनाएं.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।