मुक्तक/दोहा

दोहा

“दोहा”

कश्मीर संग देखिए, सगर हिन्द के घाट।
भेद-भावना मिट गई, खुली प्यार की हाट।।-1

जन-जीवन हर्षित हुआ, सुधरी भारी भूल।
घाटी की रौनक बढ़ी, खिले प्यार के फूल।।-2

बड़े शान से आ मिले, गले हजारों हाथ।
न्याय मिला इंसान को, झंडा डंडा साथ।।-3

लहराते हैं तरु सभी, देवदार कचनार।
फहर रहा झंडा लहर, अरु भारती विचार।।-4

बड़े गर्व की बात है, हार गया अनुबंध।
जीत हुई हैं न्याय की, बलशाली संबंध।।-5

आजादी के पर्व पर, गौतम गाए गीत।
नमन शहीदों को करे, है वीरों का मीत।।-6

महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

*महातम मिश्र

शीर्षक- महातम मिश्रा के मन की आवाज जन्म तारीख- नौ दिसंबर उन्नीस सौ अट्ठावन जन्म भूमी- ग्राम- भरसी, गोरखपुर, उ.प्र. हाल- अहमदाबाद में भारत सरकार में सेवारत हूँ