नहीं लिखना मुझे अब

नहीं लिखना मुझे अब
कोई कविता या कहानी
लिखने से क्या फायदा
जब डायरी मे ही सिमट कर रह जाते हैं
और फेसबूक वाट्सएप्प खेलकर
अपने मे खुश हो जाते हैं
नहीं पहुंच पाता एक बेटी का दर्द
उस न्यायालय में
जहां उसे न्‍याय मिलें
तड़पती है कराहती है
तिल तिल मरती हैं
एक पल के लिए खुश होती है कि
उसने जो मुकदमा की है
उसकी आज सुनवायी है
सोचती है शायद आज न्‍याय मिले
लेकिन नहीं फिर उस दिन को
अगले दिन में टाल दिया जाता है
फिर हताश हो जीवन से हार जाती है
अब मृत्यु को अपना दोस्त बना
गहरी नींद मे सो जाना चाहती है
जहां उसे शांति मिले
और ये सच भी है
मृत्यु के आगोश मे वह महफूज रहती है
नहीं दरिंदों का डर
नहीं किसी की गंदी नजर का भय
न न्यायालय का चक्कर
और न ही न्याय का गुहार लगाने वापस आती है।
निवेदिता चतुर्वेदी

परिचय - निवेदिता चतुर्वेदी

बी.एससी. शौक ---- लेखन पता --चेनारी , सासाराम , रोहतास , बिहार , ८२११०४