बाल गीत: आपके-हमारे- 2

एक आह्वान, छह कवियों के बाल गीत!
1.बिल्ली-चूहा
बिल्ली बोले म्याऊँ-म्याऊँ,
चूहा कहे, ”कहाँ छुप जाऊँ?”
बिल्ली बोली, ”छुप न सकोगे,
अब तो मेरा भोज्य बनोगे.”
”तुम क्या जानो मुझे पकड़ना,
इतना भी आसान नहीं है,
यह लो मैं तो दौड़ा-भागा”,
बिल्ली न समझी पीछा-आगा.
इंद्रेश उनियाल

2.जन्माष्टमी का पर्व
कृष्ण कन्हैया की मुरली बाजे,
राधा रानी रास-रंग रचाये,
प्रीत-भाव से हरखा गोकुल,
नन्द-यशोदा होते व्याकुल.
गोपाला-गोपाला निनाद गूंजे,
गोप-गोपियां झूमें-नाचें,
जन्माष्टमी का शुभ अवसर आया,
नटखट माखनचोर लो आया.
भर-भर माखन मटकी सजाई,
बाल-गोपालों की टोली आयी,
जोश-उल्लास-आनंद की चली पुरवाई,
गिरते-उठते फिर-फिर चतुराई.
मिल-जुलकर मटकी फोड़ो,
संगठित हो तुम सदा जीतो ,
सन्देश प्रेम का, एकता का देने आया,
जन्माष्टमी का पर्व मनभाया.
चंचल जैन

3. बच्चे हैं
बच्चे हैं, बड़ों से अच्छे है!
कच्चे हैं, दिल के सच्चे हैं!!
दोस्ती है, कभी कट्टी बट्टी है!
मस्ती है, बातें खट्टी-मीठी हैं!
गुस्सा है, पल में प्यार है!
रिश्ते है, रिश्तों में दुलार है!
हिन्दू हैं, न मुसलमान हैं!
बन्दे हैं, खुदाई पहचान है!
यारी है, न मतलब का व्यापार है!
नेकी है, जिंदा ईमान-प्यार है!
बच्चे हैं, बच्चों का अपना संसार हैं!
छल है, न कपट, स्फटिक-सा संसार है!!
गिले हैं, शिकायतों का अम्बार है!
मिले हैं पल भर, फिर वारंवार है!
बच्चे हैं, बड़ों से सयाने हैं!
अच्छे हैं, रूहानियत के खजाने हैं!
कुसुम सुराणा

4.नटखट नंदकुमार
मोरमुकुट-बंसीधर सोहे नटखट नंदकुमार,
सांवरी सूरत मोहनी मूरत नटखट नंदकुमार,
मात-दुलारो, भ्रात को प्यारो नटखट नंदकुमार,
गोकुल जी गलियन को जीवन नटखट नंदकुमार,
संग ग्वालन के धेनु चरावै नटखट नंदकुमार,
माखन-चुरैया मटकी-फुड़ैया नटखट नंदकुमार
वस्त्र-चुरैया रास-रसैया नटखट नंदकुमार
बंसी की तानों से मोहे नटखट नंदकुमार,
रास रचावै गोपिन के संग नटखट नंदकुमार,
मुख में माँ को सृष्टि दिखावै नटखट नंदकुमार,
राधिका के संग रास रचावै नटखट नंदकुमार,
मीरा की हर सांस में बसते नटखट नंदकुमार,
कालिया के फन पर हैं नाचत नटखट नंदकुमार,
यमुना का जल पावन कीन्हा नटखट नंदकुमार,
साग विदुर घर खाये भैय्या नटखट नंदकुमार,
नन्दा नाई बने रे भैय्या नटखट नंदकुमार,
एक सीत से तृप्त हुए थे नटखट नंदकुमार,
मित्र को तीनों लोक दिये हैं नटखट नंदकुमार,
चंचल-चपल है लक्ष्मीरमणा नटखट नंदकुमार,
गीता के उपदेश दिये हैं नटखट नंदकुमार!!
गौरव द्विवेदी

4.कहें सभी हो ऐसी मित्रता

आओ सुदामा फिर चलें,
धरती पर हम सब मिलें,
इस युग के रहने वालों को,
मित्रता क्या है बतलाएं.
ऊंच-नीच के भेद को भूलें,
सब ग्वाले मिल गाएं-झूलें
राधा-संग फिर रास रचाएं,
खुशियों से हम नभ को छू लें.
कामधेनु का दूध पिएं हम,
माखन-मिश्री जम के खाएं,
कालिया सुन्दर नृत्य दिखाए,
उसका दंश न किसे सताए.
कोई मामा कंस न होवे,
पूतना पूरी ममता निभाए,
मुष्टिक-चाणूर सत्कर्म करें औ’
महाभारत नहीं होने पाए.
गूंजे फिर भारत में गीता,
भारत-भूमि हो परम पुनीता,
आनंद का सागर लहराए,
कहें सभी हो ऐसी मित्रता.
सुदर्शन खन्ना

6.कृष्ण बना दे
मां मुझको तू कृष्ण बना दे,
देश-प्रेम की लगन लगा दे ।
छोटा-सा पीताम्बर पहना,
नन्हीं-सी वंशी दिलवादे ॥
मोर-पंख का मुकुट सजीला,
मेरे शीश पर आज सजा दे ।
माखन-मिश्री खूब खिलाकर,
मुझको शक्तिमान बना दे ॥
लीला तिवानी

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।