गीत/नवगीत

यदा यदा हि धर्मस्य

यदा यदा हि धर्मस्य फिर चरितार्थ होना चाहिए
इस धरा पर श्री कृष्ण का अवतार होना चाहिए

पाप अत्याचार से फिर भरने लगें है घड़े
भ्रष्टाचारी दानव ने खोखलीं कर दी जड़ें
पापियों का अब फिर यहाँ संहार होना चाहिए
यदा यदा हि धर्मस्यफिर चरितार्थ होना चाहिए
इस धरा पर श्री कृष्ण का अवतार होना चाहिए

एक कंस ने किया था त्राहि त्राहि जन संहार
गली गली में कंस है विध्वंस होना चाहिए
इस धरा पर श्री कृष्ण का अवतार होना चाहिए

पूतना भी आज फिर जिंदा है इस देश में
छोड़ अपना रूप बैठी नागिन के वेश में
ऐसी पूतनाओं का अब सर कुचलना चाहिए
इस धरा पर श्री कृष्ण का अवतार होना चाहिए

एक नाग कालिया विष का भरा भंडार था
काले कारनामो से उसके यह जगत बेहाल था
आस्तीनों में छिपेकई कालिया इस देश में
इनका भी मर्दन यहाँ तत्काल होना चाहिए
इस धरा पर श्री कृष्ण का अवतार होना चाहिए

प्यार भी व्यापiर है अब इस ज़माने में यहाँ
वो होलियों के रास वो मुरली की तान अब कहाँ
राधा और गोपियों के संग आना चाहिए
इस धरा पर श्री कृष्ण का अवतार होना चाहिए

दोस्ती भी रह गई मतलब की अब इस देश में
जो सुदामा है वो रहता दीन दुखिया वेश में
मित्र बैठे कोठियों में मौज मस्ती चाहिए
उनको सच्चे मित्र का अहसास होना चाहिए
इस धरा पर श्री कृष्ण का अवतार होना चाहिए

भीष्म पितामह आज का खामोश है मजबूर है
शकुनि की चाल है यहाँ दुर्योधन मशहूर है
शहर क्या और गाँव क्या हर जगह कुरुक्षेत्र है
फिर सुदर्शन चक्र से अब वार होना चाहिए
इस धरा पर श्री कृषण का अवतार होना चाहिए

बन के पार्थसारथी उपदेश गीता का दिया
कौरवों का नाश कर पांडवों को हक दिया
आज कौरव देश में फिर उठा रहे हैं सर
अर्जुन को आज फिर काटने हैं इनके पर
धर्म की रणनीति का विस्तार होना चाहिए
इस धरा पर श्री कृष्ण का अवतार होना चाहिए

— जय प्रकाश भाटिया

जय प्रकाश भाटिया

जय प्रकाश भाटिया जन्म दिन --१४/२/१९४९, टेक्सटाइल इंजीनियर , प्राइवेट कम्पनी में जनरल मेनेजर मो. 9855022670, 9855047845