समारोह

आज सुबह पार्क में सैर करते हुए सुनीता से मुलाकात हुई. उसने 23 अगस्त को शाम को 6 बजे पार्क में आकर श्री कृष्ण जन्माष्टमी समारोह में उपस्थित होकर धूम मचाने और आनंद लेने-देने का निमंत्रण दिया. मन हर्ष से गद्गद हो गया. ‘हरि-इच्छा’ कहकर हमने अपनी सहमति दे दी. सुनीता के हर्ष का पारावार नहीं था.
”कुछ समय पहले आपने अपने पोते का जन्मदिन शाम को पार्क में हम सहेलियों के साथ मनाया था. हमने तो जन्मदिन के अवसर पर इतनी ढेर सारी निश्छल-निःस्वार्थ खुशी पहली बार देखी थी. घर में बनाई हुई आपकी बेसन की बर्फी तो कमाल की बनी थी. आपने जन्मदिन के गीत-भजन गाए, डांस भी हुआ, सबसे वरिष्ठ सहेली से केक की तरह बेसन की बर्फी कटवाकर सबका मुंहं मीठा करवाया गया, पूरे समारोह का वीडियो बनाकर हमने वाट्सऐप पर डाल दिया था. समारोह मनाने का यह तरीका सबको बहुत पसंद आया.” सुनीता ने अपना कथन जारी रखा.
”हम तो हमेशा जन्मदिन या अन्य कोई समारोह पार्क में या मंदिर में मनाते हैं.” हमारी सहज प्रतिक्रिया थी.
”इसलिए तो मैंने भी अपना जन्मदिन ऐसे ही मनाया था. आपको याद होगा हमारे ग्रुप की एक और सदस्या की शादी की सालगिरह की और फिर तीज की खुशियां भी हमने ऐसे ही मनाई थीं. अब हमारी बहुएं-बेटियां श्री कृष्ण जन्माष्टमी समारोह भी ऐसे ही मनाने को कह रही हैं, आप अवश्य आइएगा.”
”बिलकुल जी, बिलकुल. बिना किसी औपचारिकता के श्री कृष्ण जन्माष्टमी समारोह मनाने का इतना सुनहरा अवसर भला कैसे छोड़ा जा सकता है.”
अब सबको श्री कृष्ण जन्माष्टमी के ऐसे समारोह के अतुलित आनंद की प्रतीक्षा है.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।