अमेजन के जंगलों में आग लगाना समस्त जैवमण्डल के लिए आत्मघाती

आज वैश्विक स्तर पर मानवीय, पर्यावरण और पशुपक्षियों के जीवन से प्रेम करने वाले लोग, जीवन के स्पंदन से युक्त इस धरती के लिए, जो पूरे ज्ञात ब्रह्मांड में अपनी तरह की इकलौती और अनूठी है, के लिए प्रकृति द्वारा अमेजन के करोड़ों साल पूर्व अपने अथक मेहनत और सुविचारित, सुचिन्तित तौर पर बनाए गये इस पृथ्वी के संपूर्ण जैवमण्डल के लिए प्रयुक्त ऑक्सीजन के 20 प्रतिशत पैदा करने वाले जंगलों के विनाश पर बहुत दुःखी और क्षुब्ध हैं।
यूरोपियन यूनियन अर्थ ऑब्जर्वेशन प्रोग्राम के सेटेलाइट और विभिन्न समाचार माध्यमों से प्राप्त सूचनाओं के अनुसार अमेजन के इन जंगलों के बहुत बड़े विस्तृत क्षेत्र में पिछले दो हफ्ते से लगी इस आग की भयंकर लपटें 2700 किलोमीटर दूर से दिखाई दे रहीं हैं, जिस पर अभी तक काबू नहीं पाया जा सका है। दुनिया के समूचे वनक्षेत्र के एक तिहाई क्षेत्रफल (लगभग 55 लाख वर्ग किलोमीटर) के विस्तृत क्षेत्र में फैले इस जंगल की आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घटनास्थल से 3200 किलोमीटर दूरस्थ ब्राजीलियन शहर साओ पाउला और उसके आसपास के 45 लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में इतना काला धुँआ भर गया है कि वहाँ दिन में भी सूरज नहीं दिखाई दे रहा है।
अब तक 47 हजार वर्ग किलोमीटर विस्तृत क्षेत्र के वन क्षेत्र को आग ने उसमें रहने वाले विभिन्न किस्म के कीटपतंगों, परिदों, स्तनधारी जीवों, सरिसृपों आदि सहित भस्म कर चुकी है। पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार अमेजन के जंगल प्रति वर्ष 140 अरब टन कार्बनडाईऑक्साइड सोखकर ग्लोबलवार्मिंग वार्मिंग से परेशान पृथ्वी को बहुत बड़ी राहत प्रदान करते हैं।
इस विस्तृत जंगल में 410 किस्म की आदिमानव प्रजातियाँ यहाँ पिछले 11000 वर्षों से रह रहीं हैं। 6900 किलोमीटर क्षेत्र में बहने वाली अमेजन नदी अपने 2500 मछलियों की प्रजातियों के साथ दुनिया की 20 प्रतिशत मीठा पानी इस घाटी में समेटे हुए है। वानस्पतिक और जैविक रूप से यह इलाका इतना समृद्ध है कि यहाँँ 1500 किस्म की चिड़ियों, 500 किस्म के स्तनधारी जीवों, 550 किस्म के सरिसृपों, 30 हजार किस्मों के वृक्षों का बसेरा है, जबकि पिछले 20 सालों में इस जंगल में 22 सौ किस्मों के नये पौधे वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला है।
ब्राजील के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस रिसर्च संस्थान के अनुसार पिछले मात्र 8 महिनों में इस जंगली क्षेत्र में 73 हजार बार (आग लगने की 83 प्रतिशत मामलों की वृद्धि) आग लगी है, इस एजेंसी ने अमेजन के घटते जंगलों का आँकड़ा भी दुनिया के सामने प्रस्तुत कर दिया, जिससे धुर दक्षिण पंथी विचारधारा का पोषक राष्ट्रपति जैर बोल्सानारो ने इस अपराध के लिए इस एजेंसी के डायरेक्टर को ही निलंबित कर दिया। वैज्ञानिकों के अनुसार, आग कभी भी प्राकृतिक रूप से इतने बड़े इलाके में नहीं लगती, उसे जंगलों को नष्ट करके खेती करने, माँस के लिए पशुपालन करने, लकड़ी मॉफियाओं और खननमॉफियाओं के इशारों पर सत्ता के कर्णधारों की मिलीभगत से जानबूझकर इतनी बड़ी आग लगाई जाती है।
उक्त निहित स्वार्थी लोगों और पर्यावरण के दुश्मनों की गहरी साजिश के तहत ब्राजील के अमेजन के जंगलों को तेजी से काटा जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है जब से बाल्सोनारो राष्ट्रपति बने हैं, तब से इस जंगल में आग लगने की घटनाओं में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हुई है। यह अकारण नहीं है, क्योंकि एक प्रश्न के उत्तर में इस जनविरोधी और पर्यावरण विरोधी राष्ट्रपति ने अपनी नीतियों को स्पष्ट करते हुए स्वीकार भी किया है कि, अमेजन इलाके में खेती करना, माँस निर्यात हेतु पशुपालन करना और खनन करना उनकी प्राथमिकता है, राष्ट्रपति की तरफ से यह स्पष्ट किया गया कि, खेती के लिए जंगलों की सफाई का मौसम है, इसलिए किसान जंगलों को आग लगाकर खेती के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं।
इस राष्ट्रपति महोदय पर आरोप है कि वे जानबूझकर जंगलमॉफियाओं, खननमॉफियाओं और मीटमॉफियाओं से मिलकर जंगलों का तेजी से सफाया करवा रहे हैं, परन्तु दुख की बात यह है कि उक्त राष्ट्रपति महोदय उलटा कुछ एनजीओ पर आरोप लगा रहे हैं कि, चूँकि उन्होंने कुछ एनजीओ के फंड रोक दिए हैं, इसलिए वे उनको बदनाम करने के लिए ही खुद ही अमेजन के जंगलों में आग लगा रहे हैं ! यह राष्ट्रपति महोदय की तो दोगली बात हो गई एक तरफ आप स्वयं स्वीकार भी कर रहे हैं कि खेती के लिए किसान खेत साफ कर रहे हैं और दूसरी तरफ मिथ्यारोपण लगाना ? ये कौन सी बात हुई ?
वैज्ञानिक आँँकड़ों के अनुसार इस साल मात्र जुलाई 2019 के एक महिने में अमेजन के जंगलों के 1345 वर्ग किलोमीटर विस्तृत भूभाग से जंगलों का निर्ममतापूर्वक सफाया कर दिया गया, इसके क्षेत्रफल का अँदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया के सबसे घने और विस्तृत क्षेत्र में फैले जापान की राजधानी टोक्यो के क्षेत्रफल से यह दुगुना क्षेत्रफल है ! अब तक के ज्ञात इतिहास में इतने बड़े विस्तृत क्षेत्र में जंगल का इतने कम समय में विनाश पहली बार विनाश किया गया है !
इस लेख का सार यह है कि अमेजन के जंगलों का इतनी तेजी से विध्वंस करना मानवप्रजाति सहित इस पृथ्वी के समस्त जैवमण्डल के लिए अत्यंत घातक साबित होगा, इसलिए इस पृथ्वी के सभी जीवजंतुओं के साँस लेने के लिए इस पृथ्वी के बचे-खुचे जंगलों को किसी भी तरह बचाना ही होगा, नहीं तो निकट भविष्य में एक दिन ऐसा अवश्य आने वाला है, जब ऑक्सीजन के अभाव में इस धरती के सभी जीवों का साँस घुट-घुटकर धीरे-धीरे मौत आकर अपने आगोश में ले ले और यह पृथ्वी भी इस ब्रह्मांड के अन्य अरबों-खरबों तारों, ग्रहों, उपग्रहों आदि की तरह ही साँसों के स्पंदन से मुक्त एक वीरान रेगिस्तान ग्रह में सदा के लिए तब्दील हो जाय ! इससे दुःखद स्थिति से पूर्व इस पृथ्वी के हम समस्त जागरुक और मानवीय सोच वाले मानवों को संभल जाना चाहिए और एक पागल, सनकी व्यक्ति के सनक भरे निर्णय पर रोक लगाकर, अपनी इस शस्यश्यामला धरती को बचा लेना चाहिए। इसी में सभी की भलाई और मंगकामना अंतर्निहित है।

— निर्मल कुमार शर्मा

परिचय - निर्मल कुमार शर्मा

"गौरैया संरक्षण" ,"पर्यावरण संरक्षण ", "गरीब बच्चों के स्कू्ल में निःशुल्क शिक्षण" ,"वृक्षारोपण" ,"छत पर बागवानी", " समाचार पत्रों एवंम् पत्रिकाओं में ,स्वतंत्र लेखन" , "पर्यावरण पर नाट्य लेखन,निर्देशन एवम् उनका मंचन " जी-181-ए , एच.आई.जी.फ्लैट्स, डबल स्टोरी , सेक्टर-11, प्रताप विहार , गाजियाबाद , (उ0 प्र0) पिन नं 201009 मोबाईल नम्बर 9910629632 ई मेल .nirmalkumarsharma3@gmail.com