ईमान

क्यों डिगाऊं?
ईमान अपना
चंद पैसे लेकर
मैं हिंद का पुजारी हूँ
हिंदुस्तानी हूँ!

मेरे ईमान पर
मुझे सौपा है
लड़ना दुश्मनों से
डटे रहना सख्त
सीमा पर!

मेरे ईमान पर
मुझे मिला है
सम्मान प्यार लोगों का
चूँकि मेरे अंदर बसा है
शूरवीर,खून ईमान का!

मेरे ईमान पर
कांपते थरथराते दुश्मन
रोते विलविलाते दुश्मन
क्योंकि सच्चा है मेरा ईमान?
सख्त सच्चाई लेकर!

परिचय - अशोक बाबू माहौर

जन्म -10 /01 /1985 साहित्य लेखन -हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में संलग्न प्रकाशित साहित्य-विभिन्न पत्रिकाओं जैसे -स्वर्गविभा ,अनहदकृति ,सहित्यकुंज ,हिंदीकुंज ,साहित्य शिल्पी ,पुरवाई ,रचनाकार ,पूर्वाभास,वेबदुनिया आदि पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित I साहित्य सम्मान -इ पत्रिका अनहदकृति की ओर से विशेष मान्यता सम्मान २०१४-१५ से अलंकृति I अभिरुचि -साहित्य लेखन ,किताबें पढ़ना संपर्क-ग्राम-कदमन का पुरा, तहसील-अम्बाह ,जिला-मुरैना (म.प्र.)476111 ईमेल- ashokbabu.mahour@gmail.com 9584414669 ,8802706980