कविता

पावस ऋतु

तपन भरी थी जेठ दोपहरी, हाँफ रहे नर पशु पक्षी | झील सरोवर सूख रहे थे,प्यासी -प्यासी यह धरती | लुप्त हो गई शीतल छाया ,पवन रोक बैठा साँसे | अकुलाए सब जीव जहाँ के,राह तकें बादल आएं | ******* तपन भरे इस जग को जब आकर मेघों ने घेर लिया | पावस का स्वागत […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

साम्प्रदायिक सद्भावना प्रतिक : लोक देवता बाबा रामदेव

जन-जन के आस्था और साम्प्रदायिक सद्भावना के प्रतीक बाबा रामदेव का मेला राजस्थान का कुंभ कहा जाने वाला सावन-भादवा लगते ही शुरू हो गया हैं। इस समय आस्था नगरी, बाबा रामदेव समाधी स्थल रूणीचा यानि रामदेवरा और अवतार धाम जन्म स्थली उण्डू काशमीर में मेला परवान पर चढा हुआ हैं। श्रध्दालुओं, पद यात्रियों व संघो […]

मुक्तक/दोहा

शिक्षक दिवस (5 सितंबर) पर शिक्षक-वंदना

शिक्षक तेरी वंदना,करता मैं दिन-रात । तुमने ही सौंपी मुझे,उजली यह सौगात ।। तुम से ही सद् सोच है,तुम से ही है ज्ञान । तुमने ही जीना दिया,जीने का सम्मान ।। शिक्षक तुम तो सूर्य हो,तुम में है अति ताप । तुम में है जो तेज वह,कौन सकेगा माप ।। शिक्षक तुम शीतल पवन,तुम हो […]

इतिहास

राष्ट्रीय खेल दिवस (29 अगस्त)

हाकी के जादूगर  महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन को राष्ट्रीय खेल दिवस के रुप में मनाया जाता है। इसी दिन खेल जगत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भारत के राष्ट्रपति द्वारा खेलों में विशिष्ट योगदान देने के लिए राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है. इन सम्मानों में राजीव गांधी खेल रत्न, […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मौसम जैसे बदल गए जो उन इंसानों का गम क्या अपने ही जब रहे न अपने तो बेगानों का गम क्या नेकियाँ मेरी भूल गए हैं वो तो कोई बात नहीं जो दरिया में डाल दिए उन एहसानों का गम क्या हम जैसे न जाने कितने आए, आकर चले गए चार रोज़ के मेहमां हैं […]

कविता

फिर सदाबहार काव्यालय- 35

1.लौट कर आजा… झरोखे से झाँका मासूम बचपन दिखा मन किया गले लगा लूं बनूं शासक उस जहान का जहाँ ना कोई टेंशन, ना कोई बंधन हो महज ज्ञानार्जन, मनोरंजन और खुशी का संचयन… प्यार,दुलार और लोरी से परोसा हुआ बहुव्यंजनीय बचपन बहन से लड़ाई ,भाई को फ़साई मानो विशेषज्ञ सभी विषयों का क्या,क्यों,कैसे रगों […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सख़्त इससे कोई  यार पत्थर नहीं। ज़िन्दगी  फूल का नर्म बिस्तर नहीं। लग रहा  देश  में  कोई  संजर नहीं। घूमते  नौजवां  कोई  अवसर  नहीं। माह भर रोज़ कर्फ्यू लगाकर कहा, फेंकना अब किसी पे भी पत्थर नहीं। गर तुम्हें  ही नदामत नहीं  दाग पर, धो सकेगा उसे  फिर समन्दर नहीं। घाव गहरा करे दिल जिगर […]

कविता

जिन्दगी में लौटकर आना

शुष्क होती जमीन पर बारिश बन  बरसना बेजान होती मुस्कराहटों पर इत्र सा महकना कुछ यूं हुआ है तेरा मेरी जिन्दगी में लौटकर आना ।। मुरझाये ख्वाबों की बगिया का खिलना पंछियों के शोर से ज्यों सुबह का होना कुछ यूँ हुआ है तेरा मेरी जिन्दगी मे लौटकर आना।। बिन घुंघरू  पैरों का थिरकना बेवजह […]

लघुकथा

अनजान डर

घंटी बजती है रम्या दौड़कर जाती है “अरे पोस्टमास्टर अंकल आप।” “हाँ भई ख़ुशख़बरी है जल्दी से इनाम लाओ।” पोस्टमास्टर जी ख़ुश होते हुए बोलते हैं। “अरे क्या हुआ? मैं भी तो देखूँ” माँ कहती हुई आती हैं। “ये लो बहन जी बिटिया की नौकरी लग गई है। अब तो हवाई यात्रा करेगी रोज़।“ “ये […]

कविता

और सुनाओ दुनिया वालों

निज आँचल में फूल सँजोके पर-पथ कांटो से भर डालो और सुनाओ दुनिया वालों । सुनने को दो कान मिले है मन में आए वो कह डालो और सुनाओ दुनिया वालों । सहनशक्ति कितनी मत देखो चाहोे जितना आजमा लो और सुनाओ दुनिया वालों । पत्थर चेहरे और पत्थर दिल पत्थर जितने चाहे उछालो और […]