कविता

मत करो तुलना

करो मत किसी से तुलना तुम जैसे हो अच्छे हो। रहकर स्वार्थ बोध से दूर तुम सीधे सच्चे हो। होता गुण एक सब में रहते तुम अनभिज्ञ हो। उस एक को तराश कर तुम सफल हो सकते हो। विधाता देता मीठे रंग को कड़वे रंग उतार फेंखो। खोल रंगों की पोटली जीवन को उससे रंग […]

कविता

माँगे (कविता)

हक के लिए आवाज उठाया तो सही, आवाज में हमारे वजनदारी चाहिए। देश हमारा प्यारा, श्रेष्ठ और सच्चा है, बस देशवाशियों में भी ईमानदारी चाहिए। भ्रष्टाचार अभी चरम सीमा पर है, बस हमें सच्चे अधिकारी चाहिए। आरोपियों को कड़ी-से-कड़ी सजा मिले, जल्द-से-जल्द हमारी माँग पूरी चाहिए। आरोपियों को सजा दे सकें हम, हमे भी ये […]

कविता

मुक्त काव्य

मुंशी जी को सादर नमन “मुक्त काव्य” ऐसे थे मुंशी प्रेमचंद जी धनपत राय श्रीवास्तव श्री कलम हथियार बनी शब्द बने तलवार आव भगत से तरवतर भावना के अवतार।। दो बैलों की जोड़ी नमक का दरोगा ईदगाह का मेला चिमटा हुआ हमसफर गबन गोदान और कफन प्रेम पंचमी प्रेम प्रसून प्रेम प्रतिमा कन्यादान प्रेम प्रतिज्ञा […]

कविता

हम अपने मन के कैदी

मन की बात न सुनियो भैया यह तो बड़ा ही चंचल है, इस के चक्कर में जो पड़ता वह पछताता हरदम है। पंछी बनकर यह उड़ता रहता कहां ठहरता एक पल है, इस पर अंकुश होता मुश्किल यह मदमस्त सा चलता है। हम अपने मन के कैदी हैं ,भ्रम में भटकते रहते हैं, विषय वासना […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ईश्वर सभी शुभ-अशुभ कर्मों का फलदाता होने से न्यायाधीश है

ओ३म् संसार में तीन अनादि एवं नित्य सत्तायें हैं ईश्वर, जीव एवं प्रकृति। संसार की यह तीन सत्तायें सनातन एवं शाश्वत् हैं। यह सत्तायें कभी उत्पन्न नहीं हुई एवं इनका अस्तित्व स्वयंभू, स्वमेव व अपने आप है। यह तीनों सत्तायें एक दूसरे से पृथक एवं स्वतन्त्र अस्तित्व वाली हैं। इन सत्ताओं का आदि नहीं है […]

गीत/नवगीत

मां

मां बस एक शब्द नही, यह जीवन की संजीवनी है मां जग में सुंदर सपनों की, नई कीर्ति अभिलाषा है। मां केवल जननी नही मात्र, वह तो दुर्गा, शक्ती, देवी है, मां प्रेम, वात्सल्य की मूर्ति नही, साक्षात ब्रम्ह स्वरूपा है मां जीवन की बागडोर है, मां बच्चों के मन की भाषा है। मां जग […]

गीत/नवगीत

“सावन में”

सपनों में ही पेंग बढ़ाते, झूला झूलें सावन में। मेघ-मल्हारों के गानें भी, हमने भूलें सावन में।। — मँहगाई की मार पड़ी है, घी और तेल हुए महँगे, कैसे तलें पकौड़ी अब, पापड़ क्या भूनें सावन में। मेघ-मल्हारों के गानें भी, हमने भूलें सावन में।। — हरियाली तीजों पर, कैसे लायें चोटी-बिन्दी को, सूखे मौसम […]

लघुकथा

पिता की बेबसी

मैं पत्नी और अपने दो छोटे बच्चों को लेकर कुछ महीनों पहले ही गाँव से दिल्ली आया था। वो जनवरी की ठिठुरती हुई रात थी। मेरे ऊपर ठंडा पानी गिरने से मैं हड़बड़ाकर उठा। खिड़की की झिर्री से सड़क से आती रोशनी में मैंने देखा कि मेरा ढाई साल का मुन्ना हाथ मे मग लिए […]

भजन/भावगीत

सावन और भोले को समर्पित दो भजन

भजन-1 आया सावन का महीना लगा नाचने मन का मोर   22.7.19 कांवड़िया कांवड़ ले आए, धूम मची चहुं ओर- आया सावन का—– 1.सावन में भोले की महिमा, हम सब मिलकर गाते सोमवार भोले का दिन है, भोले को खूब मनाते धरती-अंबर-सागर भीगे, भीगा नदिया का कोर- आया सावन का—– 2.सावन की बरखा में झूले, अमराई […]