कविता

कलियुग का रावण

विनाश काले विपरीत बुद्धि इस कथनी का मारा हूँ । जानकी अपहरण करके मै खुद अब तक भी पछताता हूँ । सुन पुकार जानकी की तब राम दौड़े आ जाते थे। रघुकुल रीत निभाने को तब मृत्यु से भी लड़ जाते थे । दुःख होता है देख के मुझको रुदन कर रही है कई सीताये […]

राजनीति

अमेरिका यात्रा से पीएम मोदी वैश्विक नेता बनकर उभरे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक सप्ताह की अमेरिका यात्रा पूर्ण हो चुकी है। अब देश के कूटनीतिक व आर्थिक विश्लेषक तथा भारतीय राजनीति के चिंतक एवं सभी वर्गों के लोग इस यात्रा से भारत को क्या मिला, इस विषय पर लंबे समय तक चिंतन करते रहेंगे, लेकिन यह बात तो तय हो चुकी है कि […]

कविता

मेरे भारत देश को

क्या हो गया मेरे भारत देश को किसकी नजर लग गई मेरे देश को मानव है मगर मानवता  नहीं है क्रोध हैं मगर सहजता नहीं है लोग सम्भाल नहीं पा रहे अब अपने गुस्से और आवेश को क्या हो गया मेरे भारत देश को नन्हीं कली यहाँ खिलने से पहले तोड़ी और मरोड़ी जाती है […]

भजन/भावगीत

माँ शेरावाली

माँ दुर्गा तुम्हारी आरती मैं करूँ भक्ति के साथ चरणों में माथा धरें सबल,दुर्बल, दीन अनाथ। सुरों में सरगम सजा दो गीत दो झंकार दो माँ खड़ा हूँ कबसे ही किनारे मुझे मझधार दो माँ। खुशियाँ अपार दो नाते रिश्तों में प्यार दो माँ बुराईयों का खात्मा,समाज को संस्कार दो माँ। हृदय कभी ना विचलित […]

लघुकथा

रूम नंबर-13

रूम नंबर-13 वाह! दिल्ली आए और रंगीला होटल में न जाएं तो क्या खाक दिल्ली आए? क्या मैनेजर साहब क्या हाल है? और वो अपनी रूम नंबर 13 वाली शबनम कैसी है? सब अच्छा है सर! लेकिन आज आपका कमरा किसी और ने पहले ही बुक कर लिया है। कोई बात नही आप दूसरा कमरा […]

लघुकथा

बिडम्बना

बिडम्बना “बहु ओ बहु कहाँ मर गयी!” सुषमा जी पूजा घर से चिल्ला रही थीं। आज नवरात्रि का पहला दिन था। पंडित जी को और भी घरों में जाना था वो थोड़ा जल्दी में थे। ” क्या बोलूँ पंडित जी! पता नहीं कैसी बहुरिया पल्ले पड़ गई। कल से ही बोल रखी थी सुबह सब […]

भजन/भावगीत

फिर सदाबहार काव्यालय- 42

शारदीय नवरात्र के अवसर पर विशेष लेके नौ दिन की बहार मैय्या राणी आई है (मैय्या राणी भजन)   (तर्ज़- बाजे-बाजे रे बधाई बहिना तेरे अंगना——) लेके नौ दिन की बहार मैय्या राणी आई है मैय्या राणी आई है, अम्बे राणी आई है, महाराणी आई है- पहले दिन मां शैलपुत्री जी आईं दरश दिखाने दूसरे […]

कविता

माँ के चरणों में भक्त का विनम्र निवेदन

माँ के चरणों में भक्त का विनम्र निवेदन होंठों पे माँ बस तेरा ही नाम है, तुझे इक पल तो आना पड़ेगा, ग़म किसको सुनाऊँ मैं मइया , अब तुझको तो सुनना पड़ेगा । मेरा तेरे सिवा कौन है माँ , तेरी दासी ने तुझको पुकारा , रूठ जाना न मुझसे तू मइया , नहीं […]

मुक्तक/दोहा

हमीद के दोहे

आत्म प्रसंशा  से  नहीं, बनती  है  पहचान। सब करते तारीफ जब,तब मिलता सम्मान। पुख्ता  होती  है तभी,‌ रिश्तों  की  बुनियाद। प्यार मुहब्बत की अगर,उसमें  डालो खाद। चेला अब मिलता नहीं, मिलते सब उस्ताद। चाहत हो  जब ज्ञान की , करते गूगल याद। जीने  वाले  जी  गये , जीवन  अपना  यार। जीवन  पर तो  मौत की, […]

बाल कविता बाल साहित्य

एक और सूरज

सदियों पहले टकराए ग्रह कहते हैं उससे धरती बनी ! “आग का गोला” थी तब यह, फिर धीरे-धीरे शाँत हुई !! जल, वायु और हरियाली से फिर इसमें जीवन उभरा ! विकास हुआ, जीवन संवरा, विज्ञान से जीवन आगे बढ़ा !! फिर दौर विकास का ऐसा चला, प्रकृति पर शुरु हुआ अत्याचार ! बाढ़ कहीं […]