Monthly Archives: September 2019

  • कलियुग का रावण

    कलियुग का रावण

    विनाश काले विपरीत बुद्धि इस कथनी का मारा हूँ । जानकी अपहरण करके मै खुद अब तक भी पछताता हूँ । सुन पुकार जानकी की तब राम दौड़े आ जाते थे। रघुकुल रीत निभाने को तब...


  • मेरे भारत देश को

    मेरे भारत देश को

    क्या हो गया मेरे भारत देश को किसकी नजर लग गई मेरे देश को मानव है मगर मानवता  नहीं है क्रोध हैं मगर सहजता नहीं है लोग सम्भाल नहीं पा रहे अब अपने गुस्से और आवेश...

  • माँ शेरावाली

    माँ शेरावाली

    माँ दुर्गा तुम्हारी आरती मैं करूँ भक्ति के साथ चरणों में माथा धरें सबल,दुर्बल, दीन अनाथ। सुरों में सरगम सजा दो गीत दो झंकार दो माँ खड़ा हूँ कबसे ही किनारे मुझे मझधार दो माँ। खुशियाँ...

  • रूम नंबर-13

    रूम नंबर-13

    रूम नंबर-13 वाह! दिल्ली आए और रंगीला होटल में न जाएं तो क्या खाक दिल्ली आए? क्या मैनेजर साहब क्या हाल है? और वो अपनी रूम नंबर 13 वाली शबनम कैसी है? सब अच्छा है सर!...

  • बिडम्बना

    बिडम्बना

    बिडम्बना “बहु ओ बहु कहाँ मर गयी!” सुषमा जी पूजा घर से चिल्ला रही थीं। आज नवरात्रि का पहला दिन था। पंडित जी को और भी घरों में जाना था वो थोड़ा जल्दी में थे। ”...

  • फिर सदाबहार काव्यालय- 42

    फिर सदाबहार काव्यालय- 42

    शारदीय नवरात्र के अवसर पर विशेष लेके नौ दिन की बहार मैय्या राणी आई है (मैय्या राणी भजन)   (तर्ज़- बाजे-बाजे रे बधाई बहिना तेरे अंगना——) लेके नौ दिन की बहार मैय्या राणी आई है मैय्या...


  • हमीद के दोहे

    हमीद के दोहे

    आत्म प्रसंशा  से  नहीं, बनती  है  पहचान। सब करते तारीफ जब,तब मिलता सम्मान। पुख्ता  होती  है तभी,‌ रिश्तों  की  बुनियाद। प्यार मुहब्बत की अगर,उसमें  डालो खाद। चेला अब मिलता नहीं, मिलते सब उस्ताद। चाहत हो  जब...

  • एक और सूरज

    एक और सूरज

    सदियों पहले टकराए ग्रह कहते हैं उससे धरती बनी ! “आग का गोला” थी तब यह, फिर धीरे-धीरे शाँत हुई !! जल, वायु और हरियाली से फिर इसमें जीवन उभरा ! विकास हुआ, जीवन संवरा, विज्ञान...