कविता

पहले “राम” बन 

हे राम !
उस सीता की बात न धर
तू अपनी सीता की बात कर ।
सच है !
कभी सीता की चोरी
हुई थी पंचवटी से ,
पर अब तुम्हारी सीता चहुँ ओर से
भयावह पंचवटी से घिरी है ।
आज तुम्हारा भाई से
लक्ष्मण नहीं
न पर्णकुटीद्वार पर
लक्ष्मणरेखा नहीं ,
क्योंकि
तुम्हारी सीता में
तुम्हारे लक्ष्मण ने तुम्हें देखा नहीं ।
इसलिए ,
पहले ” राम ” बन
तब कहीं तू बचा पाएगा
अपनी सीता को  ” जगेश आतंकानन ” से ।

परिचय - टीकेश्वर सिन्हा "गब्दीवाला"

शिक्षक , शासकीय माध्यमिक शाला -- सुरडोंगर. जिला- बालोद (छ.ग.)491230 मोबाईल -- 9753269282.

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