धुन में घुन

अहमदाबाद का एक इलेक्ट्रिशियन जयेश पटेल अपनी पड़ोसिन के अमेरिका में रहकर ज्यादा कमाई कर पाने की बात सुनकर अमेरिका जाने की धुन को पूरा करने में प्रयासरत हो गया.

”मैं अमेरिका कैसे जा सकता हूं, मैं तो एक मामूली इलेक्ट्रिशियन हूं?” जयेश ने अपनी पड़ोसिन से पूछा.

”मैं तो बस किसी एजेंट से मिलने की सलाह दे सकती हूं.” पड़ोसिन ने उसको एजेंट का नाम-पता देते हुए कहा.

जयेश के अमेरिका जाने की चाहत को तिनके का सहारा मिल गया.

”आप मुझे अमेरिका भेजने में मदद कर सकते हैं?” जयेश ने एजेंट से पूछा.

”हमारा तो काम ही यही है!” एजेंट का सीधा-सा जवाब था.

”उसके लिए मुझे क्या करना होगा?” जयेश ने उत्सुकता से पूछा.

”आपको तो बस जेब ढीली करनी पड़ेगी, बाकी काम मेरा.” एजेंट की लार टपक पड़ी थी.

”कितना देना होगा?”

”केवल तीस लाख.” मानो वह तीस रुपल्ली मांग रहा था.

जयेश को दिल्ली से न्यू यॉर्क भेजने का ठेका एजेंट ने 30 लाख रुपये में लिया था. इसमें 32 साल के जयेश को 81 साल का अमरीक बनाकर सबसे पहले उसे दिल्ली का एड्रेस प्रूफ दिलाया गया. जयेश को 81 साल का अमरीक बनाने के लिए एक मेकअप आर्टिस्ट हायर किया गया. जयेश को अहमदाबाद से बुलाकर करोलबाग के एक होटल में ठहराया गया. वहां उसका मेकअप कराया गया. मेकअप आर्टिस्ट को बताया गया था कि जयेश एक मॉडल है, जो आने वाली एक फिल्म और एक सीरियल में बूढ़े का रोल करेगा. इसके लिए उसी तरह का गेटअप तैयार करना है. मेकअप आर्टिस्ट ने एक जवान को बूढ़े का ऐसा रूप दिया कि एकाएक कोई पहचान ही नहीं सका. 32 का जयेश पटेल 81 का अमरीक सिंह बनकर दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनैशनल एयरपोर्ट पहुंचा. उसका सपना पूरा होने को था.

अपने सिर और दाढ़ी के बाल पूरी तरह से सफेद कर लिए हुए, सिर पर पगड़ी पहने हुए 81 के बुजुर्ग के रूप में अमरीक सिंह व्हील चेयर पर चेक इन एरिया में पहुंच गया. यही चेक इन एरिया उसके लिए घातक साबित हुआ.

चोर-लुटेरे-हत्यारे वारदात में अक्सर कोई-न-कोई निशानी छोड़ ही जाते हैं. मेकअप आर्टिस्ट से भी एक चूक रह गई थी. भले ही जयेश ने मोटे फ्रेम का चश्मा पहन लिया था, पर सुरक्षाकर्मियों की पैनी नजर को वह मात नहीं दे सका. उसके सिर और दाढ़ी के बाल तो सफेद हो गए थे, लेकिन हाथों के बाल काले रह गए. इसके अलावा उसकी स्किन भी एकदम युवाओं सरीखी थी.

इसी चूक ने उसकी धुन में घुन लगा दिया था.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।