कहाँ आ गए हम

दिल को लगाके कहाँ आ गए हम?
तुम्हें आजमा के कहाँ आ गए हम?

ख़ुशी है ज़ियादा नहीं ग़म भी कम है,
रिश्ते निभाके कहाँ आ गए हम?

बड़े दिलजले हैं मुहब्बत शहर में,
पते को भुलाके कहाँ आ गए हम?

सुना था सभी को बड़ा दर्द देती,
वही चोट खाके कहाँ आ गए हम?

वफ़ा नाम है पर वफ़ाई नही है,
इसी को बता के कहाँ आ गए हम?

जले दीप जो थे उजालों कि ख़ातिर,
सभी को बुझाके कहाँ आ गए हम?

सताते नही थे कभी ख़्वाब हमको,
उन्हें भी सताके कहाँ आ गए हम?

बड़ी तीरगी थी निगाहों में जिनकी,
निशाना बनाके कहाँ आ गए हम?

कभी टूटते भी कभी छूटते भी,
मग़र मुस्कुरा के कहाँ आ गए हम?

— सौरभ दीक्षित मानस

परिचय - सौरभ दीक्षित मानस

नामः- सौरभ दीक्षित पिडिट्स पताः- भवन संख्या 106, जे ब्लाक, गुजैनी कानपुर नगर पिन 208022, उत्तरप्रदेश मो 8004987487, 9760253965