कविता

वंशबेला

बेटी बेटी रूप है लक्ष्मी का सरस्वती का दुर्गा का महाकाली का ! बेटी बांधती है परिवार को रिश्तों में बन बेटी, बहन और बन पत्नी ! बन माँ बेटी ही कुल को आगे बढ़ाती है करती है निर्माण, सृष्टि का, नवयुग का ! अंजु गुप्ता  

कविता

कालिका स्तुति

# कालिका स्तुति तू भव्य भ्रांत भामिनी तू काव्यकांत कामिनी तू दिव्य दीप्त दामिनी तू शुभ्र सौम्य शामिनी ….. नमन तुम्हे , नमन तुम्हे ।। ….. नमन तुम्हे , नमन तुम्हे ।। तू क्रूद्ध क्रूर कालिका तू घोर घात घालिका तू बाल बोध बालिका तू पृथ्वीप्राण पालिका ….. नमन तुम्हे , नमन तुम्हे ।। ….. […]

लघुकथा

बिरादरी

“मार डालो इन कुत्तों को। कोई भी बचने न पाए!” “काट डालो इन सूअरों को ! कोई भी सूअर जिंदा ना रहा पाए !” चारों तरफ ऐसी ही आवाजों की गूंज सुन कर, शहर के सारे कुत्ते – सूअर सन्न से पड़ गए और फिर वे बेज़ुबान अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। […]

पद्य साहित्य हाइकु/सेदोका

नवरात्रि के हाइकु

नवरात्रि के हाइकु   01 दक्ष नाशिनी बहुवर्णी देवि मां भव मोचनी। 02 ऐन्द्री कौमारी वाराही माहेश्वरी विशाला ग्राही। 03 मां उत्कर्षिणी चण्डमुण्ड मारिणी सर्वास्त्रधरिणी। 04 शंकर वरी कुमारी कन्या शैवा ज्वालदंशिनी। 05 रौद्र रूप हो काल कराली काली कालरात्रि हो। 06 ब्रह्म की छाया शिवदूती प्रत्यक्षा तपस्वी माया। 07 हो नारायणी भद्रकाली मां तुम […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

लोग अधिक ही घबराये हुए हैं नदी के तट पर घर बनाये हुए हैं भीड़ में कैसे पहचानोगे उसे जबकि वो मुखौटा लगाये हुए है शतरंज के हैं वे माहिर खिलाड़ी हरेक गोटियाँ भी बिछाये हुए हैं भले ही उपलब्धि को शून्य मगर वे सब पर अपनी धाक जमाये हुए हैं टूट गयी महँगाई से […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ऋषि दयानन्द सदैव अमर रहेंगे

ओ३म् मनुष्य जीवन की प्रमुख आवश्यकताओं में शरीर का पालन व पोषण हैं। शरीर का पालन तो माता-पिता आदि परिवारजनों द्वारा मिलकर किया जाता हैं और पोषण माता-पिता आदि करते हैं और युवा  होने व किसी व्यवसाय को करने पर मनुष्य व्यं धन अर्जित कर अपना और अपने परिवार का पोषण करता है। हमने अपने […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

भारत माता के सपूत एवं हिन्दू जाति के रक्षक वीर वन्दा वैरागी

ओ३म् महान अमर आर्य-हिन्दू महापुरुषों की श्रृंखला में इतिहास में एक नाम वीर बन्दा वैरागी का भी है। हिन्दू जाति का यह दुर्भाग्य है कि इसने अपने इस महापुरुष को विस्मृत कर दिया है। आर्यसमाज के आयोजनों में भी कभी हिन्दू जाति के रक्षक इस महात्मा को स्मरण नहीं किया जाता। हमने इन पर कभी […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य- डग्गामार यात्रा वृतांत

काशी बोले वाराणसी कौन नही जानता है, पडो़सी जिला से लगा हूं। आना-जाना हमेशा लगा रहता है, कभी साहित्य के कार्य से कभी व्यापार के लिये समय देते थे। सरकारी बसो की किराये बेतहाशा बढ़ जाने से दुखी हो गया। एक मित्र ने सुझाव दिया ” कवि महोदय वाराणसी प्राइवेट बस से यात्रा करो सरकारी बसो से कम किराये पर मान […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

राहबर  आज   ग़र   भला होता। राहे – नेकी   पे   वो   चला होता।। वो  तो   खुदगर्जियों   में  डूबा है, उसको  नासेह  ग़र    मिला होता। इक    गया     और       दूसरा आया, काश   ये   खत्म   सिलसिला होता। हमको  आदत  है   जुल्म सहने की, आदमी     यूँ     नहीं     ढला होता। इक  हुनर है  […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

श्राद्ध पक्ष में परमात्मा की विज्ञानसम्मत आध्यात्मिक चेतावनी

पुत्रो/बहुओ/पुत्रियो/दामादो ! मैंने सोचा कि यह जो मनोहर भण्डारी नाम का प्राणी है, इसकी कलम में प्रवेश कर तुम सभी पारिवारिक पात्रों और दुनिया के तमाम रिश्तों-अरिश्तों से जाने जाने वाले लोगों को श्राद्ध पक्ष में कुछ चेतावनियाँ दे ही दूं. क्योंकि तुम सब लोग इस भ्रान्त धारणा में जी रहे हो कि तुम्हारी निरंकुशता […]