Monthly Archives: September 2019

  • वंशबेला

    वंशबेला

    बेटी बेटी रूप है लक्ष्मी का सरस्वती का दुर्गा का महाकाली का ! बेटी बांधती है परिवार को रिश्तों में बन बेटी, बहन और बन पत्नी ! बन माँ बेटी ही कुल को आगे बढ़ाती है...

  • कालिका स्तुति

    कालिका स्तुति

    # कालिका स्तुति तू भव्य भ्रांत भामिनी तू काव्यकांत कामिनी तू दिव्य दीप्त दामिनी तू शुभ्र सौम्य शामिनी ….. नमन तुम्हे , नमन तुम्हे ।। ….. नमन तुम्हे , नमन तुम्हे ।। तू क्रूद्ध क्रूर कालिका...

  • बिरादरी

    बिरादरी

    “मार डालो इन कुत्तों को। कोई भी बचने न पाए!” “काट डालो इन सूअरों को ! कोई भी सूअर जिंदा ना रहा पाए !” चारों तरफ ऐसी ही आवाजों की गूंज सुन कर, शहर के सारे...

  • नवरात्रि के हाइकु

    नवरात्रि के हाइकु

    नवरात्रि के हाइकु   01 दक्ष नाशिनी बहुवर्णी देवि मां भव मोचनी। 02 ऐन्द्री कौमारी वाराही माहेश्वरी विशाला ग्राही। 03 मां उत्कर्षिणी चण्डमुण्ड मारिणी सर्वास्त्रधरिणी। 04 शंकर वरी कुमारी कन्या शैवा ज्वालदंशिनी। 05 रौद्र रूप हो...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    लोग अधिक ही घबराये हुए हैं नदी के तट पर घर बनाये हुए हैं भीड़ में कैसे पहचानोगे उसे जबकि वो मुखौटा लगाये हुए है शतरंज के हैं वे माहिर खिलाड़ी हरेक गोटियाँ भी बिछाये हुए...



  • व्यंग्य- डग्गामार यात्रा वृतांत

    व्यंग्य- डग्गामार यात्रा वृतांत

    काशी बोले वाराणसी कौन नही जानता है, पडो़सी जिला से लगा हूं। आना-जाना हमेशा लगा रहता है, कभी साहित्य के कार्य से कभी व्यापार के लिये समय देते थे। सरकारी बसो की किराये बेतहाशा बढ़ जाने से दुखी हो गया। एक...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    राहबर  आज   ग़र   भला होता। राहे – नेकी   पे   वो   चला होता।। वो  तो   खुदगर्जियों   में  डूबा है, उसको  नासेह  ग़र    मिला होता। इक    गया     और       दूसरा आया, काश   ये   खत्म ...