भजन/भावगीत

माँ की महिमा

नव दुर्गा मात की  महिमा है अपरंपार, नौ रूप है शक्ति तेरे  जग की तू है पालनहार । सुनहरे रंगो की लेकर मन में फुहार, अद्भूत सिंह पे होकर चली है सवार । रिश्तो में जोड़ देती है ऐसी कड़ियां, खुशियो की लगा देती है झड़िया। फूलों की बगिया को बहार से महकाती हो, मन […]

लघुकथा

‘प्यार का नगमा’

लता मंगेशकर और मुकेश द्वारा गाया हुआ ‘शोर’ फिल्म का गाना ‘इक प्यार का नगमा है’ गाते-गाते रानू मंडल तो स्टेशन कलाकार से स्टेज कलाकार हो गई, लेकिन मनीषा तो खुद ‘प्यार का नगमा’ हो गई, ठीक उसी तरह जैसे कबीरदास की लाली- ”लाली मेरे लाल की, जित देखूं तित लाल, लाली देखन मैं चली, […]

लघुकथा

सजा

जेल में सजा काट रहे पति ही एकमात्र घर के सहारा थे । जवान पत्नी कहाँ जाए काम करने जहाँ भी जाती लोगों के नजरों और तानों का शिकार होती । पति से जेल में मिलने आयी थी । पत्नी को देखकर पति रो पड़े पत्नी भी रोने लगी । “कैसी हो नीलू ?” आँसू […]

कविता

प्याज रानी

प्याज रानी आई देखो प्याज रानी आई आते ही उसने अपनी कीमत खूब बढ़ाई चारो तरफ खुसर फुसर फिर होने लगी और पब्लिक बिना प्याज काटे ही प्याज के आँसू रोने लगी पहले कम खाते थे अब ज्यादा खायेंगे प्याज के दाम और बढ़ायेंगे इसी प्याज ने एक बार  सरकार गिराई थी अब फिर प्याज […]

कविता

पेट भरता है….

नेताओं के भाषण से नहीं राशन से ही पेट भरता है. राशन जुटाने में आम आदमी का दम निकलता है. आज के नेताओं का अजीबोगरीब अंदाज अखरता है. सत्ता मिलते ही वह जनता की खामियां निरखता है. पानी तब सिर से भी ऊपर चला जाता है. जब वोट लेने वाला नेता वोटरों के ऐब गिनाता […]

संस्मरण

अतीत की अनुगूंज – 8 : अभागा बचपन

उस वर्ष प्ले ग्राउंड का सबसे शरारती बच्चा था एडवर्ड। बेहद सुन्दर , काले घुंघराले बाल। गोरा रंग और चमकती चंचल आँखें। बात बात पर उसकी किसी न किसी से मुठभेड़ हो जाती। हरदम मैं उसको ऑफिस के बाहर सज़ा में बैठा हुआ पाती।  जब लंच की छुट्टी ख़तम होती तब उसको क्लास में वापिस […]

मुक्तक/दोहा

कुछ मुक्तक

:1: सुना है रोशनी के घर अंधेरों  ने बसाये हैं, सुना है चांद  तारे चांदनी से बौखलाए हैं, मुझे तुमसे मुहब्बत है यह मेरी हक़ीक़त है- हमारी आंख के आंसू तेरे गम में  नहाये हैं ।। :2: प्रीत का स्वप्न सजाना तो सरल होता है, गीत  से दिल को लुभाना  तो सरल होता है, मुग्ध […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ईश्वर के मुख्य एवं निज नाम ओ३म् पर विचार एवं चर्चा

जिस सर्वव्यापक, सर्वशक्तिमान तथा सर्वज्ञ चेतन सत्ता ने इस संसार की रचना करने सहित हमारे शरीरों को बनाया है और जो इस सब जगत को चला रही है उस सत्ता को परमात्मा या ईश्वर नाम से पुकारते हैं। वह सूक्ष्मतम सर्वव्यापक चेतन सत्ता दिखाई नहीं देती और न ही अविद्या से युक्त मनुष्यों को उसका […]

ब्लॉग/परिचर्चा

ठक-ठक, ठक-ठक-12

ठक-ठक, ठक-ठक-1 ”ठक-ठक, ठक-ठक”. ”कौन है?” ”मैं हूं राजस्थान का एक कलाकार.” ”आपका नाम और आपकी विशेषता.” ”मेरा नाम शरद माथुर और मेरी विशेषता मेरा रामचरितमानस-लेखन.” ”लीजिए, रामचरितमानस तो तुलसीदास ने लिखी थी.” ”जी, आपने बिलकुल दुरुस्त फरमाया है. उन्होंने इसे बांस की कलम या कबूतर के पंख की कलम से लिखा होगा, मैंने ऑइल […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

वेद मन्त्र साधना पर विचार

ओ३म् वेद ईश्वर प्रदत्त ज्ञान है जो सृष्टि के आरम्भ में ईश्वर ने चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य और अंगिरा की आत्माओं में अपने जीवस्थ स्वरूप से दिया था। ज्ञान, कर्म, उपासना और विज्ञान से युक्त चार वेदों के नाम ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद हैं। मन्त्र संख्या वा आकार की दृष्टि से ऋग्वेद चार […]