पद्य साहित्य हाइकु/सेदोका

कुछ हाइकु

कुछ हाइकु 01 – पाक हंसता अपनों की वृद्धि से पराये घर। 02- आजादी पर्व जुड़कर जन्मते हमको गर्व। 03- तिगड़मबाज शत्रु को रिझाते कल या आज। 04 – भारत देश कुछ से है अजूबा गीदड़ी वेश। 05 – रेश ही रेश जयचन्द बनेंगे हमारे देश। 06 – देश की भक्ति नापने का पैमाना उनकी […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

दर्द में डूबी हुई आंखें दिखाऊं कैसे, प्यार का आपसे इज़हार छुपाऊं कैसे। मौत आती है मगर कोई तमन्ना लेकर, जिंदगी बोल तुझे जीना सिखाऊं कैसे। रात आती है हमेशा तेरी यादें लेकर, ये बता यादों को इस दिल से मिटाऊं कैसे। मुझको आवाज़ लगाते हैं दुखों के साए ज़िंदगी मैं तुझे खुशियों से सजाऊं […]

कविता

प्रयास

बच्चा रूठ गया तो क्या हुआ तू उसे मनाकर तो देख । जाल टूट गया तो क्या हुआ तू उसे जोड़कर तो देख । चड्डी फट गयी तो क्या हुआ तू उसे सीकर तो देख । ऐ मेरे भाई ! अरे कुछ हो गया तो क्या हुआ तू फिर से कुछ करके तो देख । […]

कविता

पहले “राम” बन 

हे राम ! उस सीता की बात न धर तू अपनी सीता की बात कर । सच है ! कभी सीता की चोरी हुई थी पंचवटी से , पर अब तुम्हारी सीता चहुँ ओर से भयावह पंचवटी से घिरी है । आज तुम्हारा भाई से लक्ष्मण नहीं न पर्णकुटीद्वार पर लक्ष्मणरेखा नहीं , क्योंकि तुम्हारी […]

इतिहास

हिन्दी ग़ज़ल के सशक्त हस्ताक्षर दुष्यन्त कुमार

दुष्यन्त कुमार की पैदाइश उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद की तहसील नजीबाबाद के ग्राम राजपुर नवादा में 1 सितम्बर 1933 में हुई थी। आम बोलचाल के शब्दों को अश्आर में ढाल कर उन्होंने  हिन्दी ग़ज़ल को बड़ी बुलन्दी अता की। जनता के ज़बान से आज भी उनके शे’र अक्सर ओ बेसतर सुनने को मिल जाते […]

गीत/नवगीत

गणपति बप्पा आए फिर से

उल्लास से भरे दिन पावन,खुशियों की लाली लेकर गणपति बप्पा आए फिर से समृद्धि खुशहाली लेकर ऋद्धि-सिद्धि साथ हैं आई चूहे बाबा भी आए उनकी प्यारी छवि निराली भक्तों के मन को भाए भक्त सारे खड़े हैं देखो पूजन की थाली लेकर गणपति बप्पा आए फिर से समृद्धि खुशहाली लेकर अबकी बप्पा के पूजन का […]

गीत/नवगीत

लावणी छन्द गीत – हां! मृत्यु से प्रीत होगी 

जब हारेंगी श्वास जीव की ,मृत्यु की तब जीत होगी । आत्मा हँस कर देह बिसारे ,मृत्यु की मनमीत होगी । कुछ भी रूप धरे मृत्यु किन्तु ,डर कैसा घबराना क्यों । मृत्यु जन्म है आत्म-तत्व का ,हा-हा कार मचाना क्यों । मृत्यु अटल है स्तय शाश्वत ,यही काल की रीत होगी । जब हारेंगी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

शक से देखी गयी भूमिका हर क़दम। ढूँढते   जो  रहे   फायदा   हर  क़दम। बावफा  से  रखो  राबिता  हर  क़दम। बेवफा को  करो  अनसुना  हर क़दम। साथ  उसके  रहो   साथ उसके  चलो, जो रहे  हम क़दम आपका हर क़दम। ज़िन्दगी  के लिये  ज़िन्दगी  भर करो, खूब  हालात  का  सामना  हर क़दम। हर  क़दम  पर  मिली  कामयाबी […]

कविता

लोग

मौसम की तरह बदल जाते हैं अब लोग. इरादतन वो कर रहे शायद नहीं ये संयोग सुना था गुफ्तुगू ख्वाबों में भी हो जाती है ये बात और है कि ऐसा कर पाते हैं चंद लोग वैसे चाह की राह में रोड़ा नहीं कोई बन सकता. इरादा पक्का हो तो मिलन का सबब बन सकता. […]

भजन/भावगीत

हे केशव

हे केशव, हे मधुकर, हे कृपासिंधु देवकीनंदन, हे मुरलीधर, हे श्रीकृष्ण है तुमको शत बार नमन। भारत भू के नायक हो तुम, अखिल विश्व के पालक हो, मानवता के प्रतिपालक हो तुम, दुष्ट दलों के संहारक हो प्रेम पन्थ के उन्नायक हो तुम, करुणा, दया के सागर हो वीरों में वीर शिरोमणि हो तुम, तीनों […]