बाल कविता

फिर सदाबहार काव्यालय- 36

इंद्रेश उनियाल का प्रथम प्रयास – तीन बाल गीत 1.महक-चहक फूल महक रहे बगिया में, पक्षी चहकें घर-आंगन में, फाग महीना जब भी आता होली का हुल्लड़ दिखलाता, ऋतु बंसत जब आती है, कोयल राग सुनाती है, अमराई में झूले पड़ते, मीठे आम खिलाती है. सावन आया भादों आया, हरियाली भर-भर लाया, माघ-पूस जब आएंगे, ठंड […]

कविता

और सुनाओ दुनिया वालो

निज आँचल में फूल सँजोके पर-पथ कांटो से भर डालो और सुनाओ दुनिया वालों । सुनने को दो कान मिले है मन में आए वो कह डालो और सुनाओ दुनिया वालों । सहनशक्ति कितनी मत देखो चाहोे जितना आजमा लो और सुनाओ दुनिया वालों । पत्थर चेहरे और पत्थर दिल पत्थर जितने चाहे उछालो और […]

कविता

दर्द

अब्र ए दर्द जब दिल पर घुमड़ आते हैं. लाख रोके कोई पलकों को नम कर जाते हैं. बहुत मुश्किल है दीवार ए सब्र को महफूज रखना. दर्द बेइंतहा हो तो कांच से बिखर जाते हैं बहुत सोचा कि दिल की बात दिल में ही रहे तेरी चाहत का जादू ऐसा लब खुद ही थिरक […]

गीत/नवगीत

नभ में उड़ जाये

आओ मेरी प्रेयसि! जी भर मैं दुलराऊं। तेरा रूप मनोहर मेरे मन की जलधारा, तुम कुछ इतनी सुन्दर ज्यों फूलों की माला, तेरे चलने पर यह धरती है मुस्काती, देखकर रुप तुम्हारा किरणें भी शरमातीं , तुम जिस दिन आई थी मन में मैं सकुचाया, लेकर छाया-चुम्बन कुछ आगे बढ़ आया, आओ पास हमारे फूल […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ईश्वर के साथ हमारा पिता-पुत्र संबंध होने के कारण हमें उसके सभी श्रेष्ठ गुणों को धारण करना है

ओ३म् मनुष्य सत्य व चेतन स्वभाव से युक्त प्राणी है। सत्य का अर्थ है कि मनुष्य की सत्ता यथार्थ  है। आत्मा की सत्ता काल्पनिक सत्ता नहीं है। चेतन का अर्थ है कि ज्ञान प्राप्ति व कर्म करने की सामथ्र्य से युक्त अल्पज्ञ सत्ता है।  आत्मा सुख व दुःख का अनुभव करता है। जड़ पदार्थों की […]