नशा मुक्ति की दिशा में राजस्थान सरकार का सार्थक कदम

महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर राजस्थान सरकार ने युवाओं में नशे की लत को रोकने के लिए राज्य में मैग्निशियम कार्बोनेट, निकोटिन, तंबाकू या मिनरल ऑयल युक्त पान मसाला और फ्लेवर्ड सुपारी के उत्पादन, भंडारण, वितरण और बिक्री पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही राजस्थान महाराष्ट्र, बिहार के बाद देश का ऐसा तीसरा राज्य बन गया है जहां इन उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध लग गया है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व सरकार ने ई-सिगरेट और हुक्का बारों पर भी प्रतिबंध लगाया था। गौरतलब है कि राजस्थान सरकार ने जन घोषणा पत्र और बजट घोषणा में नशीले पदार्थों पर रोक लगाने का जिक्र किया था जिसे अब पूरा किया गया है। यह प्रतिबंध राज्य सरकार की ओर से जारी कार्यालय आदेश के अनुसार खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अंतर्गत खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विक्रय का प्रतिषेध और निर्वधन) विनियम, 2011 के तहत लगाया गया है। राज्य सरकार के जन घोषणा पत्र के बिंदु 24 के 19.4 पर ‘युवाओं में नशे की लत रोकने हेतु कारगर कदम उठाना’ और बजट घोषणा वर्ष 2019-20 के बिंदु संख्या 100 ‘युवाओं में पान-मसाला गुटखा खाने की लत से स्वास्थ्य को हानि होती है’, ‘घटिया सामग्री की बिक्री को नियंत्रिक कर, चोरी के माल की बिक्री पर सख्ती बरतते हुए पूरी तरह रोक लगाने की कार्ययोजना बनाई जाएगी‘ का जिक्र किया गया था।

नि:संदेह नशा समाज का एक ऐसा स्याह पहलू है जो आधुनिक समय में हमारी युवा पीढ़ी को खोखला करता जा रहा है। नशे की इस गिरफ्त में केवल युवा ही नहीं अपितु हर उम्र, लिंग, धर्म-जाति के लोग फंस चुके हैं। नशे जैसा मीठा जहर आज कहर बनकर हमारे देश को तबाही की ओर ले जा रहा है। नशे के कारण केवल व्यक्ति की मौत ही नहीं होती, उसका घर-परिवार बर्बाद ही नहीं होता बल्कि देश की सभ्यता और संस्कृति भी नष्ट हो जाती है। नशे में व्यक्ति अपना विवेक खोकर मानसिक रूप से असंतुलित होकर ऐसा कुछ कर बैठता है कि उसे उसका पता ही नहीं रहता और जब होश आता है तो उसके पास पश्चाताप करने के सिवा कुछ नहीं बचता। नशे की गहरी होती खाई में हमारा समाज किस कदर धंसता जा रहा है इसका पुख्ता सबूत पेश करती है हाल में ही सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के निर्देश पर एम्स के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर द्वारा तैयार की गई ‘मैग्नीट्यूड ऑफ सब्सटेंस एब्यूज इन इंडिया’ नामक रिपोर्ट, जो बताती है कि देश में साढ़े सात करोड़ ऐसे लोग है जोे नशे की गंभीर गिरफ्त में हैं, यानी उन्हें जल्द से जल्द उपचार की आवश्यकता है। वहीं तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम की एक रिपोर्ट के अनुसार, 13 देशों की सूची में भारत (34.6) तीसरे स्थान पर है, जहां इस वक्त सबसे ज्यादा तंबाकू उत्पादों का सेवन किया जा रहा है। सूची में इससे ऊपर बांग्लादेश (43.3) और रूस (39.3) हैं। चीन का प्रतिशत 28.1 है।

ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की कुल 130 करोड़ आबादी में से 28.6 फीसदी लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार करीब 18.4 फीसदी युवा न सिर्फ तंबाकू, बल्कि सिगरेट, बीड़ी, खैनी, बीटल, अफीम, गांजा जैसे अन्य खतरनाक मादक पदार्थों का सेवन करते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में नशे करने वाले हर पांच में एक व्यक्ति की उम्र 21 साल से कम है। कई बच्चे तो 11 साल की उम्र से ही ड्रग्स लेना शुरू कर देते हैं। इनमें से करीब 5 फीसदी ऐसे हैं जो 12 से 17 साल के बीच है। रिपोर्ट में पाया गया कि भारत के करीब दो करोड़ बेघर बच्चों में से 40-70 फीसदी किसी ना किसी तरह के ड्रग्स के संपर्क में आते हैं और इनमें से कई को तो पांच साल की उम्र से ही नशे की लत लग जाती है। भारत में हर साल 10.5 लाख मौतें तम्बाकू के पदार्थों के सेवन से होती हैं। 90% फेफड़े का कैंसर, 50 % ब्रोन्काइटस एवं 25% घातक ह्रदय रोगों का कारण धूम्रपान है। अपराध ब्यूरो रिकार्ड के अनुसार, बडे़-छोटे अपराधों, बलात्कार, हत्या, लूट, डकैती, राहजनी आदि तमाम तरह की वारदातों में नशे के सेवन का मामला लगभग 73. 5 % तक है और बलात्कार जैसे जघन्य अपराध में तो ये दर 87 % तक पहुंची हुई है। अपराधजगत की क्रियाकलापों पर गहन नजर रखने वाले मनोविज्ञानी बताते हैं कि अपराध करने के लिए जिस उत्तेजना, मानसिक उद्वेग और दिमागी तनाव की जरूरत होती है उसकी पूर्ति ये नशा करता है। जिसका सेवन मस्तिष्क के लिए एक उत्प्रेरक की तरह काम करता है।

आज की भागदौड़ भरी रोजमर्रा की जिंदगी में लोगों पर थोड़ा टेंशन आया, किसी सगे संबंधी या प्रेमिका से संबंध टूट गए, माता-पिता ने कुछ कह दिया तो सीधे नशे पर उतर आए और उसको ही समस्त समस्या का एकमेव समाधान मान लिया। सीधी-सी बात है कि लोगों की सहनशक्ति में दिनोंदिन ह्रास होता जा रहा है, लोगों में तनाव और परिस्थितियों से लड़ने की क्षमता कम होती जा रही है, वे सूझबूझ खो रहे हैं और नादानी में गलत कदम की ओर बढ़ रहे हैं। राज्य सरकार ने देर दुरुस्त ही सही राजस्व की आड़ में नशे के चंगुल में बर्बाद होती युवा पीढ़ी की सेहत को लेकर जो तात्कालिक कदम उठाया है वो निश्चित ही सराहनीय है। लेकिन इस दिशा में कारगर नियंत्रण व जांच की जरूरत होगी। नशेड़ियों की बेचैनी नशीले पदार्थों को कैसे भी हासिल करने और दुकानदारों को अपने स्टॉक माल को कैसे भी बेचकर जान छुड़ाने की होगी। अत: सरकार को अपने निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करके नशीले पदार्थों की रोक के बावजूद कालाबाजारी करने एवं काले कारोबार को बढ़ावा देने वाले अपराधियों पर त्वरित शिकंजा कसना होगा।

– देवेन्द्रराज सुथार
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परिचय - देवेन्द्रराज सुथार

देवेन्द्रराज सुथार , अध्ययन -कला संकाय में द्वितीय वर्ष, रचनाएं - विभिन्न हिन्दी पत्र-पि़त्रकाओं में प्रकाशित। पता - गांधी चौक, आतमणावास, बागरा, जिला-जालोर, राजस्थान। पिन कोड - 343025 मोबाईल नंबर - 8101777196 ईमेल - devendrasuthar196@gmail.com