मोल है अच्छाई का

भले चलो पथरीले पथ पर, साथ हो सचाई का।
अडिग निर्भय मन विचलित न हो, तुफां हो बुराई का।

सोच अपनी साकार होगी, हो कर्म भलाई का।
भेद रता भी न आए मन में, अपना पराई का।

एक मुठ्ठी में बाँध लो रिश्ते, पाटो बंधन खाई का।
वैरभाव नफरत को छोड़ो, मोल हो अच्छाई का।

रोशनियाँ मायूस हो जाएं, छाऐं घोर अंधेरे।
आशाओं के दीप जलाओ, आएंगे नए सबेरे।

सभी को दिया है मालिक नें, भाग्य लेख उकेरे।
लग जाएं अंबार दुखों के, ज्यूँ मकड़ी के डेरे।

कभी तो सूरज निकलेगा, होंगे दूर हनेरे।
चाहे काल जी भर बिछाले, क्षण संकट बहुतेरे।

रख विश्वास नित ईश्वर पर, आए काम वो तेरे।
जिस के सिर, हाथ मालिक का, उसे दुख कैसे घेरे।

शिव सन्याल

परिचय - शिव सन्याल

जन्म तिथि- 2/4/1956 जन्म स्थान- गां. समरालियाँ डा. मंगवाल तह. देहरा अब पौंगबाँध जलाशय में समा चुका है। राम निवास मकड़ाहन तह. ज्वाली कांगड़ा(हि.प्र) 176023 शिक्षा:- इंजीनियरिंग में डिप्लोमा लोक निर्माण विभाग में सेवाएं दे कर सहायक अभियन्ता के पद से रिटायर्ड। अभी तक दो संग्रह प्रकाशित 1) मन तरंग 2) बोल राम राम रे 3)बज़्म-ए-हिन्द सांझा काव्य संग्रह संपादक आदरणीय निर्मेश त्यागी जी प्रकाशक वर्तमान अंकुर बी-92 सेक्टर-6 नोएडा हिंदी और पहाड़ी में अनेक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं ई-मेल -sanyalshivraj@gmail.com