व्यंग्य – हनी ट्रैप की मक्खी 

माहौल बदल रहा है। जलवायु परिवर्तित हो रही है। संकट बढ़ रहा है। सर्दी की आहट सुनाई दे रही है। सवेरा देर से हो रहा है। दिन छोटा और रातें बड़ी हो रही हैं। बदलते मौसम में मच्छरों की तादाद बढ़ने लगी हैं। ट्यूबलाइट शुरू करते ही मच्छर मंडराने लग रहे हैं। बढ़ते मच्छरों को देखकर मच्छर भगाओ अभियान भी परवान चढ़ने लगा है। स्वच्छ भारत अभियान में विस्तार होने लगा है। इस मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री ने सराहनीय पहल की है। वे अब स्वयं मच्छर मारने में अपने समय का सदुपयोग कर रहे हैं। और लोगों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। मच्छरों की मसखरी देखकर इन दिनों मक्खियों ने भी अपना जलवा दिखाना शुरू कर दिया है। ये मक्खियां कोई आम मक्खियां नहीं हैं। ये हुस्न का बाजार है। सौंदर्य का व्यापार है। इनको हनी के नाम पर मनी की तलाश है। ये सपनों की सौदागर हैं। वायदों का घर है।
ये मक्खियां पहले पहले इश्क का नाटक करती है। फिर रोमांस का जादू बिखेरती है। फिर चुपके से वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी देती है। एक ही क्लिक में ये भद्र पुरुष को भ्रष्ट पुरुष का खिताब दिलाने की ताकत रखती है। कई लोगों से ये लाखों ऐंठ चुकी हैं। करोड़ों की इज्जत बचाने के लिए लोग लाखों कुर्बान करने में जरा भी देर नहीं कर रहे हैं। इज्जत बची तो लाखों पाएं की नई कहावत बाजार में लॉन्च हुई है। ये पुरुष की नाजुक नस को पहचानती है। समय आने पर दबा भी देती है। टूटी तमन्नाओं से त्रस्त पुरुष न घर का रहता है और न ही घाट का। यदि पुरुष कोई सानपटी करने की कोशिश करे तो मी टू अभियान छेड़ देती है। हालिया माहौल बिलकुल अक्षय कुमार की फिल्म एतराज की तरह करवट ले रहा है। चूंकि हमारे समाज का माइंड सेट है। उसकी नजरों में पुरुष ही गलत है। यानी की पुरुष ही बलात्कार करता है महिला नहीं। महिला ने किया पुरुष का बलात्कार यह बात अब भी हमारी सोसायटी में हास्यास्पद मानी जाती है। ये पुरुषों का दुर्भाग्य है कि उनके फेवर में कोई पुख्ता कानून नहीं है। महिलाओं को थप्पड़ मारने पर पुरुष सलाखों के पीछे हो सकता है लेकिन एक महिला पुरुष को सौ थप्पड़ भी मार दे तो हमारा कानून विकलांग हो जाता है।
दुनिया यह मानने को तैयार नहीं कि हर पुरुष इमरान हाशमी नहीं होता। कोई कोई पुरुष सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र भी होता है। अब जब पुरुष की इज्जत को चहुंओर से खतरा होने लगा है तो ऐसे वक्त में महिला आयोग की तरह पुरुष आयोग भी होना ही चाहिए। बेचारा निर्दोष पुरुष कब तक हनी ट्रैप और मी टू अभियान के नाम पर अपनी इज्जत की हिंदी होते देखेगा। महिला सशक्तिकरण के दौर में अब हमें मानना चाहिए कि महिला कुछ भी कर सकती है। कुछ भी मतलब कुछ भी। उन्हें कम आंक कर हम उनकी प्रतिभा और पुरुष आभा का मजाक बना रहे हैं।
— देवेन्द्रराज सुथार

परिचय - देवेन्द्रराज सुथार

देवेन्द्रराज सुथार , अध्ययन -कला संकाय में द्वितीय वर्ष, रचनाएं - विभिन्न हिन्दी पत्र-पि़त्रकाओं में प्रकाशित। पता - गांधी चौक, आतमणावास, बागरा, जिला-जालोर, राजस्थान। पिन कोड - 343025 मोबाईल नंबर - 8101777196 ईमेल - devendrasuthar196@gmail.com