ग़ज़ल

जादू पैसे का यारो कमाल होता है
बिना इसके जीना-मरना मुहाल होता है

सिखा रहे हैं सबक रहम का वो दुनिया को
रोज़ जिनके यहां बकरा हलाल होता है

हमारे खून का रंग लगता है सफेद जिन्हें
उनके घर का तो पानी भी लाल होता है

सूरज-चांद के ढलने का वक्त भी तय है
बाद उरूज़ के सबका जवाल होता है

जहां के इख्तलाफ़ का रंज नहीं रहता
हमसफर जो अपना हम ख्याल होता है

— भरत मल्होत्रा