शांतता! यह डॉक्टर-कक्ष है

अभी-अभी मेहुल का मैसेज आया है- ”नानी-नानू, अभी-अभी यूनिवर्सिटी से मेरे रिजल्ट का मैसेज आया, मैं डॉक्टर बन गया.”

”देखते-देखते समय पंख लगाकर उड़ गया!” मुझे लगा और मेरी मधुर स्मृतियों में 23 साल पहले के नजारे नजर जीवंत होने लगे.

”15 अगस्त 1996 का वह सुहाना दिन, नर्स ने हमें नाती मेहुल के जन्म का शुभ समाचार सुनाया.” स्मृति मधुरिम हो उठी थी.

”नानी के घर आया 6 महीने का मेहुल: एक दिन उसे पिंक कस्टर्ड खिलाया, बड़ी खुशी से खाया, दूसरे दिन पिंक कस्टर्ड देखते ही मुख बिचकाया. नानी को तो कुछ समझ नहीं आया. ऑफिस में उसकी मॉम को फोन लगाया, मॉम बोली- ‘आज उसे किसी और रंग का कस्टर्ड चाहिए.’ झट से उसको गोद में उठाया, पास की दुकान से 6 रंगों का कस्टर्ड-पैकेट खरीदा और उसे हरे रंग का कस्टर्ड खिलाया.”

”डेढ़ साल का मेहुल! नानी के घर घर ‘भजन दुपहरिया’ का कार्यक्रम चल रहा था. गोल बनाकर बैठी हुई 12 सखियां बारी-बारी से भजन सुना रही थीं. मेहुल को मैंने इशारे से बताया कि अब उसकी बारी है. उसने टी.व्ही. के ऊपर डैक की तरफ इशारा करके ‘दिल तो पागल है’ का गाना चलवाया और उस पर एक्शन करके सबका साथ निभाया.”

”आएगा-आएगा-आएगा, मेहुल राजा आएगा- कह-कहकर उसको चलना सिखाया.”

अभी मेहुल की बाललीलाएं चल ही रही थीं, कि वह ऑस्ट्रेलिया पहुंच गया. यहां भी सबको अपनी बाललीलाओं से मुग्ध कर पढ़ाई व अन्य क्रियाकलापों में नाम कमाकर रोबोटिक्स-विशेषज्ञ बन गया. बहुत सुंदर रोबोट बनाकर प्रदर्शन के लिए दो बार नासा गया और सिंगापुर से अंतर्राष्ट्रीय गणित प्रतियोगिता का गोल्ड मैडलिस्ट भी बना.

”मुझे डॉक्टर बनना है.” उसका सजीला सपना था.

”उसके कमरे में पोस्टर लग गया- ”Silence please, it is doctor’s room.” और वह शांतिपूर्वक पढ़ाई करता रहा.

आज वह डॉक्टर बन गया है.

हिंदी भाषा का अभ्यास करने के लिए हमसे वह हिंदी में बात करता है.

”मुझे इतनी हिंदी तो अवश्य सीखनी है, कि अंग्रेजी न बोल-समझ पाने वाले भारतवासियों की समस्या को अच्छी तरह समझ-समझा सकूं.” मेहुल का सराहनीय शुभ विचार है.

”शांतता! यह डॉक्टर-कक्ष है” मेहुल का कमरा अब सचमुच डॉक्टर-कक्ष बन गया है.

”मैं न्यूरो सर्जरी विशेषज्ञ बनना चाहता हूं,” एम.डी. करने के लिए तैयार मेहुल का मानना है- ”अगर मस्तिष्क स्वस्थ रहेगा, तो तन-मन-जीवन अपने आप स्वस्थ रहेंगे.”

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।