कविता का रूप

कविता का रूप सरल
मसले कुछ भी रहे मगर
भाव, भाषा और विचार
का सभी पर हो असर।
कुछ आक्रमकता और कर्मठता
पर्सनल हस्तक्षेप को न प्राथमिकता
अच्छे शब्द और मौलिकता
सही मायने में कविता की प्रमाणिकता ।
देश का सवाल हो या विदेश का
प्रधान का सवाल हो या प्रांत का
कविता दिलों की धार ही नही
तमाम मसलों का है निचोड
इसके रस में नहाकर होते भाव विभोर।
उपयोग में लाओ मौलिकता
अधिकार मिला है स्वतंत्रता
राष्ट्रभक्ति अध्याय प्रथम स्वतंत्रता
रम जाओ यही है महानता।
इसलिए पढ़ा करो कविता
वाणी में मधुर सगीत निखर आएगी
कटु-आलोचना विलुप्त हो जाएगी
चहुँ ओर फैलेगी बस सुन्दरता।
— आशुतोष

परिचय - आशुतोष झा

पटना बिहार M- 9852842667 (wtsap)