‘आदेश 😊’

”आदेश सर, ऑस्ट्रेलिया में सातवीं कक्षा में आपने मुझे इलेक्ट्रिक चॉक से दिये बनाना सिखाया था. मेरी दिये बनाने की कला, उन पर खूबसूरती और विभिन्नता लिए चित्रकारी से आप बहुत प्रसन्न हुए थे.” दीपक अपने मोबाइल पर वाट्सऐप पर आदेश सर के अकाउंट पर लिखे अपने भेजे संदेशों को देख रहा था.

”आदेश सर, आपने मुझे कभी समय निकालकर भारत के पारम्परिक चॉक पर दिये बनाने की कला सीखने को कहा था. आपके इस परामर्श को ही मैंने आदेश मान लिया था और मैं तीन महीने का अवकाश लेकर भारत गया था. वहां मैंने कुम्हार बस्ती में इस कला को तो सीखा ही था, साथ ही कुम्हारों के बच्चों की शिक्षा-व्यवस्था में सुधार के लिए वहीं से नेट पर अपनी नौकरी से इस्तीफा दिया और एक स्कूल खोल लिया. इस पर आपने लिखा था- ‘आदेश 😊’.”

”वहां मैंने दिवाली मेलों और ग्रामीण मेलों में अनेक कुम्हारों को प्रतिभागी बनाया था, जो मेरे लिए और विशेषकर उनके लिए अत्यंत विशेष उपलब्धि थी. आपने उस पर भी लिखा था- ‘आदेश 😊’.”

”जब मुझसे अमेरिका के दिवाली मेले में प्रतिभागिता के लिए अनुरोध किया गया था, तब भी मैं उस अनुरोध को आदेश मानकर तीन कुम्हारों के साथ वहां गया था. आपने वहां मेरी उपलब्धि को देखकर लिखा था- ‘आदेश 😊’.”

”आदेश सर, अब मुझे यूरोप से ग्रामीण मेले के आयोजन के लिए बुलाया गया है, मैं आपके आशीर्वाद का आकांक्षी हूं.” दीपक ने अपना संदेश भेज दिया.

रिप्लाई भी तुरंत ही आ गया था, ”मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है. बस सदैव अपनी परम्पराओं से जुड़े रहना, क्योंकि वे ही सफलता का मूल मंत्र होती हैं. ‘आदेश 😊’.”

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।