कविता

मधुगीति – पतझड़ में जो पत्ते देखे

पतझड़ में जो पत्ते देखे, कहाँ समझ जग जन थे पाए; रंग बिरंगे रूप देख के, कुछ सोचे वे थे हरषाये! क्या गुज़री थी उनके ऊपर, कहाँ किसी को वे कह पाए; विलग बृक्ष से होकर उनने, अनुभव अभिनव कितने पाए ! बदला वर्ण शाख़ के ऊपर, शिशिर झटोले कितने खाए; धूप ताप हिम की […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – जो मेरे गुनाहों पर पर्दा डाल देता है

वो कौन है जो मेरे गुनाहों पर पर्दा डाल देता है और मेरे गुनहगार होने का डर निकाल देता है बताओ, कैसे आदतें ये अपनी काबू में आएँगीं वो तो रोज़ कोई नया सिक्का उछाल देता है मैं कोशिश में हूँ कि कोई तो मीनार बच जाए हवा जब चले तेज़ तो हाथ में वो […]

कहानी

एक फूल दो माली

पुराने समय की बात है, मेवाड़ के नगर सेठ का पुत्र “नीर ” बहुत सुंदर साहसी और कार्य में कुशल था। कोई भी कन्या उसको एक नज़र देखे तो मोहित जो जाये और उसको निहारती ही रहे। नगर सेठ को उसके विवाह की चिन्ता रहती थी। उसको कोई भी कन्या पसंद नहीं आती। नीर को […]

सामाजिक

आभासी दुनियाँ और युवा

बदलते दौर में सबसे क्रांतिकारी परिवर्तन जो हुआ है वो है सोशल मिडिया में हर उम्र के लोगों की दिलचस्पी ।आज हर आदमी अपने पसन्द अनुसार व्हाटसप ,फेसबुक ,ट्वीटर पर किसी न किसी से जुडा़ है भले ही ये जुडा़व आभासी है पर तन व मन को स्वस्थ रखने में ये योगदान बहुत मायने रखता […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मज़े के साथ ज़हर घूँट-घूँट पीने का कि अंदाज़ मुख्तलिफ है अपने जीने का है नमकीन लहज़ा शहर के सब लोगों का तू ही बता दिखाऊँ ज़ख़्म किसे सीने का नफरत – ओ – इश्क दोनों अधूरे ही रहे हुआ न काम हमसे एक भी करीने का बचा लेता मुझे भी नाखुदा औरों की तरह […]

गीत/नवगीत

समकालीन गीत

रोदन करती आज दिशाएं,मौसम पर पहरे हैं ! अपनों ने जो सौंपे हैं वो,घाव बहुत गहरे हैं !! बढ़ता जाता दर्द नित्य ही, संतापों का मेला कहने को है भीड़,हक़ीक़त, में हर एक अकेला रौनक तो अब शेष रही ना,बादल भी ठहरे हैं ! अपनों ने जो सौंपे वो,घाव बहुत गहरे हैं !! मायूसी है,बढ़ी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

नशीली तेरी जब नज़र साथ होगी। मुहब्बत की तब रहगुज़र साथ होगी। रहेगी ये मस्ती यूँ ही ज़िन्दगी भर, क़दम दर क़दम हमसफ़र साथ होगी। न तन्हा रहूँगा कभी ज़िन्दगी में, तेरी याद आठो पहर साथ होगी। मुकद्दर में साहिल जो रब ने लिखा है, समन्दर की तो हर लहर साथ होगी। डरेंगे नहीं फिर […]

पुस्तक समीक्षा

पुस्तक समीक्षा – डस्ट बिन में पेड़ (बाल कहानियाँ)

मेरी एक बहन की बेटी मेरे कमरे में रखी इस पुस्तक के मुख पृष्ठ से प्रभावित होकर पुस्तक पढ़ने के लिए ले गई। कल उन बहन का फोन मिला कि उनकी बेटी को पुस्तक इतनी अधिक पसंद लगी कि वह अपने पास ही रखेगी। एक रचनाकार की पुस्तक को इससे बड़ा सम्मान एवं पुरस्कार नहीं […]

इतिहास

सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती विशेष

सरदार वल्लभभाई पटेल जिनको लौह पुरुष के रूप में जाना जाता है।चूंकि भारत के एकीकरण में सरदार पटेल का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण था, इसलिए उन्हें भारत का लौह पुरूष कहा गया।इनका जन्म 31 अक्टूबर 1875 में हुआ।भारत के लौह पुरुष के साथ-साथ भारत का बिस्मार्क के रूप में भी जाना जाता हैं। इन्होंने आज़ादी के बाद […]

कहानी

आत्मविश्वास

एक लड़की थी रिया। जीवन के 17 सावन पार कर चुकी थी ।अल्हड़, हंसमुख, निश्चल, दुनियादारी से दूर, अपने आप को बेहद प्यार करने वाली, जीवन के हर पल को हजार बार जी लेने को बेचैन । मानो एक पूरा जीवन उसके लिए कम पड़ जाएगा। उसकी चंचलता और जिंदादिली तो ऐसी कि मुर्दे में […]